OMG! सावन में 5 दिन महिलाओं के कपड़े न पहनने की सदियों पुरानी प्रथा, जाने इससे जुड़ी पूरी सच्चाई...
Pini Village Ki Anokhi Parampara: हिमाचल में एक ऐसा भी गांव है जहां की परंपरा को सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। जाने हिमाचल प्रदेश के पीणी गांव का अनोखा रिवाज और उसके पीछे का कारण।

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Pini Village Ki Anokhi Parampara: भारत के हर राज्य की अपनी अलग कहानी और पहचान है। वैसे ही हिमाचल प्रदेश भी अपने शांत वातावरण, प्राकृतिक वादियों और खूबसूरत नदियों के लिये जाना जाता है। लेकिन हिमाचल में एक ऐसा भी गांव है जहां की परंपरा को सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। यह परंपरा इतनी अजीब है कि शायद ही भारत के किसी अन्य गांव में मनाई जाती हो। जाने हिमाचल प्रदेश के पीणी गांव का अनोखा रिवाज और उसके पीछे का कारण।
कहां स्थित है पीणी गांव
यह गांव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मणिकर्ण घाट पर बसा हुआ है, जो आज अपनी अनोखी परंपरा के लिए पूरे देश में चर्चा का विषय बना गया है। हिमालय श्रेणियां में ऊंचाई पर बसे इस गांव का प्राकृतिक वातावरण जरूर आपको अपनी ओर खींच लेगा। यहां लोगों में व्याप्त अजीब परंपरा भी आपको सुनने को मिलेगी, चलिए जानते हैं कि वह परंपरा क्या है?
सावन में 5 दिनों के लिए कपड़े न पहनने का रिवाज
जब भी सावन का महीना आता है तब हिमाचल के पीणी गांव में एक अजीब परंपरा की जाती है जिसमें शादीशुदा महिलाओं को 5 दिनों तक बिना कपड़ों के रहना होता है। बहुत पहले से चली आ रही इस प्रथा में अब थोड़े बदलाव किए गए हैं इसलिए महिलाएं पूरी तरह निर्वस्त्र नहीं रहती बल्कि पट्टू नामक पतले ऊनी कपड़े से अपने आप को ढककर रखती है। इस पूरे 5 दिन में महिलाएं घर के अंदर ही रहती हैं साथ ही किसी भी पुरुष का इनके पास जाना वर्जित रहता है। यहां महिलाएं इसे एक व्रत की तरह मानती हैं मान्यता है कि इसे न करने पर कोई अनहोनी हो सकती है।
पुरुषों के लिए भी है सख्त नियम
सावन का यह अजीब रिवाज सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं है पुरुष वर्गों को भी इसमें सख्त नियम का पालन करना पड़ता है। गांव के सभी पुरुष को इन पूरे 5 दिनों में किसी भी प्रकार से मांस और शराब का सेवन नहीं करना होता साथ ही पत्नी के साथ व्यवहार को लेकर भी कई कठोर नियम बनाए गए हैं जैसे की पत्नी से बहुत कम बातें करना, हंसी मजाक नहीं करना, उनके पास न जाना जैसे कार्य करने पड़ते हैं ताकि महिलाओं का व्रत पूरा हो सके।
पांच दिनों की यह परंपरा आखिर क्यों मनाई जाती है
सावन में मनाए जाने वाले इस अजीबोगरीब परंपरा के पीछे एक ऐसी मान्यता है जो सालों से चली आ रही है। कहते हैं की बहुत साल पहले इस गांव में एक राक्षस हुआ करता था जो यहां की सुंदर और सज-संवरकर रहने वाली महिलाओं को उठाकर ले जाता था। इस चीज से परेशान होकर लोगों ने यहां अपने देवता लाहुआ घोंड से मदद मांगी और फिर इसी देवता ने रक्षा का वध करके गांव वालों की रक्षा भी की थी। तभी से यह परंपरा सावन के महीने में आज तक मनाई जा रही है।
पीणी गांव की असली सच्चाई
महिलाओं में 5 दिनों के लिए निर्वस्त्र रहने को लेकर जो भी मान्यताएं बताई गई हैं उसे कई लोग नहीं मानते। जो इस मान्यता को नहीं मानते उनका तर्क है कि सावन के महीने में यहां माता भागा सिद्ध जी का मेला लगता है और पूजा के पूरे 5 दिन यहां लोग अपने आधुनिक वस्त्रों को त्यागकर पारंपरिक वस्त्र पट्टू धारण करते हैं। इसका यह मतलब नहीं निकलता की महिलाएं 5 दिनों तक निर्वस्त्र ही रहती हैं। पूजा के इन दिनों में बाहरी लोगों का यहां प्रवेश वर्जित रहता है साथ ही मांस मदिरा का भी सेवन नहीं किया जाता और देवता लाहुआ घोंड की स्थापना कर उनकी पूजा की जाती है। कई लोग यह मानते है कि पीणी गांव की महिलाओं को ’निर्वस्त्र रहती है’ कहना उनकी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना है।
