Paryavaran per hue antrashtriy sammelan: 5 जून को ही पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है? जानिए पर्यावरण पर हुए अब तक के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के बारे में!
Paryavaran per hue antrashtriy sammelan: पर्यावरण पर हो रहे इस अत्याचार को रोकने के लिए विभिन्न देशों में मिलकर कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किए है। आज इस लेख में हम पर्यावरण पर किए गए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनो के बारे में जानेंगे।

Paryavaran per hue antrashtriy sammelan: आधुनिकीकरण के इस युग में लोगों ने अपने विकास के लिए पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है। जमीन से कोयला, पेट्रोलियम और अन्य खनिज पदार्थ निकालने के लिए कई बड़े-बड़े जंगल तबाह कर दी गए। ये जंगल सिर्फ पौधों के नहीं होते यहां कई सारे जंगली जानवर भी निवास करते हैं। पेड़ों को काटने पर कई प्रकार के पर्यावरणीय दुष्प्रभाव पड़ते हैं जैसे– ग्रीन हाउस गैस का बढ़ना, धरती के तापमान में लगातार वृद्धि होना, जिससे ग्लेशियर आदि पिघलने पर बाढ़ आने की भी संभावना रहती है। पर्यावरण पर हो रहे इस अत्याचार को रोकने के लिए विभिन्न देशों में मिलकर कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किए है। आज इस लेख में हम पर्यावरण पर किए गए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनो के बारे में जानेंगे।
1. स्टॉकहोम सम्मेलन 1972
इस सम्मेलन का आयोजन स्वीडन देश के स्टॉकहोम शहर में 5 जून 1972 को किया गया था। पर्यावरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गया यह पहला सम्मेलन था। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ”एक ही पृथ्वी” के सिद्धांत को अपनाना था। साथी इसी पर्यावरण सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम United Nation environmental program (UNEP) का गठन किया गया। इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। इसी पहले पर्यावरणीय सम्मेलन में यह घोषणा की गई की हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
2. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987
पर्यावरण को लेकर किया गया यह सम्मेलन कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में 16 सितंबर 1987 को आयोजित किया गया था, ओजोन परत को बचाना और क्लोरोफ्लोर कार्बन के उत्पादन को कम करना था। इस सम्मेलन के नियम 1989 से प्रभावी हुए।
3. पृथ्वी सम्मेलन 1992
3 जून 1992 का यह सम्मेलन ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो में आयोजित किया गया था। यह सम्मेलन काफी खास था क्योंकि इसमें एजेंडा–21 नाम से एक पर्यावरण और विकास को लेकर दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, जो सभी देशों की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण था।
4. क्योटो सम्मेलन 1997
यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन को लेकर जापान के क्योटो शहर में 1 से 10 दिसंबर 1997 को आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को 2 से 5% कमी लाने का निर्णय लिया गया था। यह भूमंडलीय तापन से संबंधित सम्मेलन था जिसमें 6 प्रकार के ग्रीन हाउस गैसों की पहचान की गई–
• कार्बन डाइऑक्साइड
• मीथेन
• नाइट्रस ऑक्साइड
• हाइड्रोफ्लोरो कार्बन
• परफ्लोरोकार्बन
• सल्फर हेक्साफ्लोराइड
5. द्वितीय पृथ्वी सम्मेलन 2002
इस सम्मेलन का आयोजन दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 26 अगस्त से 4 सितंबर 2002 तक हुआ था। सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि पृथ्वी को बचाने की जिम्मेदारी सभी देशों की है परंतु वे देश जो अधिक धनी है उन्हें इसका खर्च उठाना चाहिए और इस सम्मेलन में 2020 तक सभी ऐसी चीजे जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है उन्हें सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा गया।
6. दोहा सम्मेलन 2012
यह सम्मेलन सिर्फ इसलिए आयोजित किया गया था ताकि क्योटो सम्मेलन की अवधि को आगे बढ़ाया जा सके, जो की 2012 को खत्म हो रही थी। इस सम्मेलन का आयोजन 26 नवंबर से 8 दिसंबर 2012 तक कतर देश के दोहा में हुआ था।
7. पेरिस सम्मेलन 2015
यह सम्मेलन पेरिस, फ्रांस में 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 तक आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था कि इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान 2 डिग्री से अधिक नहीं होने देना है। साथ ही ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की बात की गई थी।
8. बॉन सम्मेलन 2017
यह सम्मेलन पेरिस समझौते पर विचार विमर्श करने के लिए 6 नवंबर से 17 नवंबर 2017 तक बॉन, जर्मनी में आयोजित की गई थी। इस सम्मेलन में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भाग नहीं लिया था साथ ही इसका उद्घाटन फिजी के प्रधानमंत्री बैनीमारामा ने किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह भी था कि ऐसे देश जो पर्यावरणीय परिवर्तन से अधिक प्रभावित हैं उन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।
