Navratna, Maharatna, MiniRatna Company kya hoti hai: महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न कंपनियां किसे कहते हैं; जानिए इन तीनों में अंतर

Navratna, Maharatna, MiniRatna Company kya hoti hai: क्या आपको पता है महारत्न और नवरत्न कंपनियां क्या होती है? आज भारत देश जापान को पीछे छोड़ते हुए पूरे विश्व का चौथा सबसे सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत की आर्थिक प्रगति के पीछे इन कंपनियों का विशेष योगदान है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को उनके आर्थिक प्रदर्शन के हिसाब से तीन क्षेत्रों में बांटा गया है– महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न। यह नियम 1997 में बनाया गया था और यह व्यवस्था आर्थिक स्वतंत्रता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए किया गया था। ये सभी कंपनियां सरकार के राजस्व का बहुत बड़ा स्रोत है। आइए जानते है कि ये कौन कौन सी कंपनियां है जो इन तीनों में शामिल है।
महारत्न कंपनी क्या होती है?
महारत्न कंपनी का दर्जा उन कंपनियों को दिया जाता है, जो कुछ मजबूत वित्तीय मापदंडों को पूरा करते है। महारत्न कंपनी बनने के लिए किसी भी कंपनी को पहले नवरत्न कंपनी बनना पड़ता है। इन कंपनियों को वित्तीय छूट और बड़े पैमाने पर निवेश की अनुमति दी जाती है। इसके साथ ही कुछ मापदंडों को पूरा करना होता है। जैसे–
- पिछले तीन वर्षों में 25 हजार करोड़ का कारोबार करना।
- कुल संपत्ति को 15 हजार करोड़ के ऊपर ले जाना।
- कंपनी का शुद्ध लाभ 5 हजार करोड़ से ऊपर रखना।
- कंपनी को भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट करना।
महारत्न कंपनियां
1. नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन
2. ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन
3. स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड
4. भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
5. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड
6. हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड
7. भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड
8. कोल इंडिया लिमिटेड
9. गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड
10. पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड
11. पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन
12. रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन
13. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड
14. ऑयल इंडिया लिमिटेड
नवरत्न कंपनी क्या होती है?
ये भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम(PSUs) होते हैं। इन कंपनियों के लगातार अच्छे वित्तीय प्रदर्शन करने पर परिचालन संबंधी छूट प्रदान की जाती है। नवरत्न कंपनी बनने के लिए भी कुछ मापदंडों को पूरा करना होता है। जैसे–
- ऐसी कंपनी जो नवरत्न बनना चाहती है उन्हें पहले मिनी रत्न श्रेणी–1 में दर्ज होना पड़ता है।
- पिछले 5 वर्ष में से कम से कम 3 वर्ष में इस कंपनी को एक अच्छा एमओयू रेटिंग (MoU) प्राप्त होना चाहिए।
- (1) प्रति शेयर आय, शुद्ध पूंजी और शुद्ध लाभ (2) जनशक्ति लागत (3) कारोबार पर ब्याज और करों से पहले अर्जित लाभ (4) नियोजित पूंजी के लिए मूल्यह्रास (5) ब्याज और करों से पहले अर्जित लाभ (6) अंतर-क्षेत्रीय प्रदर्शन।
इन 6 मापदंडों पर कम से कम 60 अंक प्राप्त करने होते है।
नवरत्न कंपनियां
1. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
2. कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमि. (CONCOR)
3. इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL)
4. महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)
5. नेशनल एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO)
6. नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉ. लिमि. (NBCC)
7. नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड (NLC)
8. एनएमडीसी लिमिटेड (NMDC)
9. राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL)
10.शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SCI)
11. रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL)
12. ONGC विदेश लिमिटेड (OVL)
13. राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCFL)
14. इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON)
15. राइट्स लिमिटेड (RITES)
16. राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड (NFL)
17.सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन
18.हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड
19.इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड
20. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL)
21.रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (RailTel)
22. सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमि. (SECI)
23. नेशनल हाइड्रोइलैक्ट्रिक पावर कॉ. लिमि. (NHPC)
24. सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVN)
25.इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉ. (IRCTC)
26. इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC)
27. नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL)
मिनी रत्न कंपनी क्या होती है?
मिनी रत्न कंपनी का दर्जा भी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दिया जाता है। ऐसी कंपनियां जो लगातार लाभ कमा रही है और उनके वित्तीय रिकॉर्ड भी मजबूत है तो सरकारी कंपनियों को यह दर्जा दे देती है। इन्हें दो श्रेणियां में बांटा गया है–
मिनीरत्न श्रेणी–1
इस श्रेणी में आने के लिए कंपनी को पिछले तीन साल में कम से कम 30 करोड़ रुपए या उससे अधिक का लगातार लाभ कमाना होता है। इस श्रेणी का दर्जा मिलने के बाद कंपनियां 500 करोड़ रुपए तक निवेश कर सकते हैं। वर्तमान में इस श्रेणी में कुल 62 कंपनियां है। जैसे– एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड आदि।
मिनीरत्न श्रेणी– 2
इस श्रेणी में भी जगह बनाने के लिए कंपनियों को पिछले 3 साल में लगातार लाभ कमाना होता है साथ ही अपनी नेटवर्थ को एक अच्छे नंबर पर रखना जरूरी है। इस श्रेणी का दर्जा मिलने पर कंपनियां 300 करोड़ रुपए या अपनी नेटवर्थ का 50% निवेश कर सकती हैं, जो भी इनमें से कम हो। इस श्रेणी में कुल 12 कंपनियां शामिल है। जैसे – फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड, भारत पंप्स एंड कंप्रेशर्स लिमिटेड आदि।
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