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Train News : ट्रेन में तो हमेशा सफर करते हैं... पर क्या जानते हैं ट्रेन के डिब्बों के बाहर लिखा 5 Digit का रहस्य ?

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Train News : ट्रेन में तो हमेशा सफर करते हैं... पर क्या जानते हैं ट्रेन के डिब्बों के बाहर लिखा 5 Digit का रहस्य ?
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By Meenu Tiwari

akhir train ke dibbon ke upar 5 digit ka kya hai matlab : हमारे आसपास ऐसी बहुत सी चीजें होती है जैसे गैस सिलेंडर, ट्रैन, कोई बॉक्स, डिब्बा या कुछ भी... जिसमें कुछ न कुछ एक या एक से बढ़कर डिजिट लिखे होते हैं. पर हम न उन डिजिट को ध्यान देते हैं न ही हम उनका मतलब समझते हैं. ऐसे ही हम आपके आसपास की एक बेहद ही जरुरी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं. हम बात कर रहे हैं ट्रेन की.




अक्सर आप ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने डिब्बों के बाहर लिखा एक 5 अंकों का नंबर जरूर देखा होगा। ज्यादातर यात्री इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नंबर सिर्फ पहचान के लिए नहीं, बल्कि रेलवे की एक महत्वपूर्ण जानकारी छुपी होती है। इस 5 डिजिट कोड में कोच की उम्र से लेकर उसकी कैटेगरी तक की पूरी जानकारी छुपी होती है, जिसे 95 प्रतिशत लोग आज भी नहीं जानते।

भारतीय रेलवे को देश की रीढ़ कहा जाता है और हर दिन करोड़ों यात्री इसका इस्तेमाल करते हैं। रेलवे ने कोचों की पहचान और रखरखाव के लिए यह 5 अंकों का कोड सिस्टम अपनाया है, ताकि किसी भी डिब्बे की जानकारी तुरंत हासिल की जा सके। यह कोड हर कोच के बाहर साफ-साफ लिखा होता है।


5 अंकों के नंबर का क्या मतलब?


इस 5 अंकों के नंबर के पहले दो अंक कोच के निर्माण वर्ष को दर्शाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कोच पर नंबर 00296 लिखा है, तो इसके शुरुआती दो अंक “00” बताते हैं कि यह डिब्बा साल 2000 में बनाया गया था। इससे रेलवे को कोच की उम्र और उसकी मेंटेनेंस जरूरत समझने में आसानी होती है।

वहीं आखिरी तीन अंक सबसे ज्यादा जानकारी देने वाले होते हैं। ये अंक बताते हैं कि आप किस तरह के कोच (एसी, स्लीपर या जनरल) में सफर कर रहे हैं। उदाहरण के लिए :

001 से 025: एसी फर्स्ट क्लास

051 से 100: एसी 2 टियर

101 से 150: एसी 3 टियर

201 से 400: स्लीपर क्लास

401 से 600: जनरल सेकेंड क्लास

601 से 700: सेकेंड क्लास सीटिंग


अगर कोच नंबर के आखिरी तीन अंक 296 हैं, तो इसका मतलब है कि वह स्लीपर क्लास कोच है। इसी तरह पैंट्री कार, जनरेटर या मेल वैन के लिए भी अलग नंबर रेंज तय की गई है।

इस तरह, ट्रेन के डिब्बे पर लिखा यह 5 अंकों का नंबर सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि रेलवे की स्मार्ट ट्रैकिंग और सेफ्टी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। अगली बार जब आप ट्रेन में सफर करें तो इस नंबर पर जरूर नजर डालिएगा।

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