Korea jile ke pramukh paryatan sthal: ठंड में घूमने का है मन, तो कोरिया जिला है सबसे बेस्ट! जानिए यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल!
Korea jile ke pramukh paryatan sthal: छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक वैभव अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया के सामने आ रहा है, आज हम आपको कोरिया जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के बारे में बताने वाले हैं।

Korea jile ke pramukh paryatan sthal: छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक वैभव अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया के सामने आ रहा है। यहां के मनमोहक, रोमांचक और सुकून देने वाले पर्यटन स्थल लोगों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। उत्तर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले को पर्यटन स्थलों की धरती कहना गलत नहीं होगा क्योंकि यहां दर्शनीय स्थलों से लेकर प्राकृतिक गुफा, पर्वतीय श्रृंखला और आकर्षक झरने भी मौजूद हैं। कोरिया जिला पहले एक रियासत हुआ करता था, और यहां जाने पर इसकी विशिष्ट वास्तुकला और महल की बनावट काफी शानदार लगती हैं। आज हम आपको कोरिया जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के बारे में बताने वाले हैं।
1. बालमगढ़ी पहाड़
इस पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई लगभग 1350 फिट है। कर्क रेखा पर स्थित यह पर्वत 180 डिग्री का विराट और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। पहाड़ी पर आपको नीलगाय, भालू, हिरण, सांभर, कोटरी जैसे वन्यजीव भी नजर आ सकते हैं। यह पर्वत श्रृंखला इसलिए भी विशेष है क्योंकि यहां से दो प्रमुख नदियों का उद्गम होता है– गोपद और हसदो। इस पर्वत श्रृंखला की ढलानों पर प्राचीन शैल चित्र भी देखने को मिलते हैं जिस कारण यह कोरिया जिले का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन जाता है।
2. गौरघाट जलप्रपात
यह जलप्रपात हसदेव नदी पर बना पहला प्राकृतिक झरना है। जिला मुख्यालय से इसकी दूरी 35 किलोमीटर है जो की हसदेव नदी पर बना है। इस हारने के आसपास का माहौल काफी शांत और झरनों की कल कल आवाज पर्यटकों को बार बार यहां आने पर मजबूर करती है। बरसात के दिनों में इस मतजल कुंड के आसपास काफी सावधानी बरतनी पड़ती है।
3. अमहर रिजॉर्ट,
सोनहत तहसील से तकरीबन 4 किलोमीटर की दूरी पर अमहर गांव में घुंघुट्टा नदी पर 30 से 40 मीटर लंबा एक विशाल जलाशय बनाया गया है और इसके पास ही पहाड़ो से घिरे हुए मैदान में एक खूबसूरत सा रिजॉर्ट भी बनाया गया है। जहां पर्यटक फिशिंग, साइक्लिंग और ट्रेकिंग जैसे चीजों का आनंद ले सकते हैं। यहां 3 ट्री हाउस, 1 कैफेटेरिया और आकर्षक घास के मैदान मौजूद है।
4. झुमका बांध
यह बांध वर्ष 1982 में बना और इसका उद्घाटन मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्य-मंत्री अर्जुन सिंह ने किया था। यह बैकुंठपुर रेलवे स्टेशन से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस बांध से 17 गांव के लगभग 1100 हेक्टेयर कृषि भूमि को सींचा जाता है। पर्यटको के लिए यहां बोटिंग, फिशिंग और एक बड़ा सा एक्वेरियम भी बनाया गया है जिसका शुल्क 20 रुपए है। यहां का शांत वातावरण और हरियाली, साल के हर मौसम में लोगों को आकर्षित करता है।
5 सीतामढ़ी हरचौका
छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक स्थल में सीतामढ़ी हरचौका और सीतामढ़ी गुफा का नाम अवश्य आता है। यह पवई नदी के तट पर स्थित है। मान्यता है कि भगवान श्री राम और माता सीता ने वनवास काल के कुछ समय यहां बिताए थे, इस वजह से यह स्थान अध्यात्म की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
6. कोरिया पैलेस
यह राजमहल प्राचीन कोरिया के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। इस राजमहल का निर्माण चूना पत्थर से किया गया है साथ ही महल की बनावट और इसका शाही अंदाज लोगों को वही पुराने राजतंत्र की याद दिलाता है। इस महल में पहले कोरिया रियासत के शासक निवास करते थे। महल के अंदर कई जानवरों की खाल, तोपें और कई प्राचीन वस्तुएं रखी गई है।
7. गुरु घासीदास – तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व
इसे भारत का 56वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह विशाल 2829 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले होने की वजह से भारत का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर्स रिजर्व भी है। यह टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के संजय दुबरी, बांधवगढ़ और झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व से जुड़कर 4500 वर्ग किलोमीटर का विशाल संरक्षित एरिया निर्मित करता हैं। यह टाइगर रिजर्व सोनहत से 5 किलोमीटर और बैकुंठपुर से 35 किलोमीटर की दूरी पर है।
