Begin typing your search above and press return to search.

Ganatantra Divas 2026 kyon tha sabse khas: 77वां गणतंत्र दिवस 2026 क्यों था सबसे खास? इन 7 पॉइंट से जानिए इस बार क्या रहा अलग!

Ganatantra Divas 2026 kyon tha sabse khas: इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि यह गणतंत्र दिवस किन वजहों से बाकियों से अलग था।

Ganatantra Divas 2026 kyon tha sabse khas: 77वां गणतंत्र दिवस 2026 क्यों था सबसे खास? इन 7 पॉइंट से जानिए इस बार क्या रहा अलग!
X
By Chirag Sahu

Ganatantra Divas 2026 kyon tha sabse khas: 26 जनवरी के दिन पूरे भारत ने 77 वें गणतंत्र की खुशी बड़े शान से मनाई है। दिल्ली के कर्तव्य पथ से लेकर भारत के कोने-कोने तक गणतंत्र की महक फैली। गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत ने अपनी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया। वैसे तो हर साल गणतंत्र दिवस पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते ही हैं लेकिन इस बार के गणतंत्र दिवस में कई ऐसी चीजें हुई जो बाकियों से अलग थी। इस बार भारत के अपनी रक्षा क्षमता और सभी राज्यों की सांस्कृतिक विरासतों के प्रदर्शन ने सबको मोहित कर दिया। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि यह गणतंत्र दिवस किन वजहों से बाकियों से अलग था।

1. मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ के दो नेताओं का आगमन

इस बार का गणतंत्र दिवस इस वजह से भी खास था क्योंकि इसमें पहली बार यूरोपीय संघ के दो प्रमुख नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। जिसमें यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्ट और यूरोपीय कमीशन के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन आए हुए थे। यह दर्शाता है कि भारत और यूरोप के संबंध कितने अच्छे और सुदृढ़ हैं। कर्तव्य पथ पर इस पूरे कार्यक्रम की अगुवाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की जहां उन्होंने सेना की सलामी भी ली।

2. 77 में गणतंत्र दिवस की थीम है काफी खास

2026 में मनाया गया यह 77वां गणतंत्र दिवस का थीम था राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का 150वीं वर्षगांठ। इसी थीम को ध्यान में रखते हुए इस पूरे समारोह में कुल 30 झांकियां निकाली गई। सभी झांकियां काफी अद्भुत थी लेकिन छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बात करें तो यहां की झांकी भी वंदे मातरम की थीम पर आधारित थी और इसमें देश के पहले डिजिटल संग्रहालय को भी दर्शाया गया था जहां आदिवासियों की वीरता और बलिदान को दिखाया गया।

3.ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए विशेष प्रदर्शन

इस समारोह का सबसे प्रमुख आकर्षण था ऑपरेशन सिंदूर के समय उपयोग किए गए हथियार का प्रदर्शन। 6 से 7 मई 2025 की रात को PoK में आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए यह ऑपरेशन चलाया गया था जो की पूरी तरह से सफल रहा। इस प्रदर्शन में सेना ने एक कांच के बॉक्स में बंद इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर के प्रदर्शन से यह दिखाया कि अब भारत किसी से डरता नहीं है और न ही किसी से कम है।

4. भैरव बटालियन ले लिया पहली बार हिस्सा

गणतंत्र दिवस की इस खास परेड में सेना के भैरव बटालियन ने पहली बार हिस्सा लिया जिसे देखने के लिए सभी उत्सुक रहे। परेड में इस बटालियन का नेतृत्व मेजर अंजुम गोरका ने किया और चार भैरव बटालियन ने इस परेड में शानदार मार्च पास्ट करते हुए अपना प्रदर्शन दिखाया। भारत में 25 भैरव बटालियन बनाई गई है। ये अपनी आक्रामक रणनीति से दुश्मनों को खत्म करने के लिए जाने जाते हैं। परेड में इन्हें देखना काफी रोमांचक था क्योंकि उनके चेहरे पर लाल और हरे रंग की धारियां बनी हुई थी, जो दुश्मनों को चकमा देने के लिए होता है।

5. अत्याधुनिक मिसाइल और रॉकेट लांचर का प्रदर्शन

इस परेड में भारत ने अपनी सैन्य आत्म निर्भरता को भी प्रदर्शित किया। जिसके तहत सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर, कैलिबर रॉकेट सिस्टम, इगला एयर डिफेंस सिस्टम जैसी स्वदेशी तकनीक दिखाए गए। इसके साथ ही ऑपरेशन सिंदूर में प्रयोग हुए आकास मिसालइ सिस्टम और एस-400 का प्रदर्शन भी किया। ये दुश्मनों के बड़े से बड़े मिसाइल को नाकाम कर सकती हैं। परेड में टी-90 भीष्म टैंक, अर्जुन एमके-1 मेन बैटल टैंक, स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत और नाग मिसाइल भी पूरी दुनिया को दिखाए गए।

6. पहली बार हुआ शिकारी पक्षियों का प्रदर्शन

परेड का एक और प्रमुख आकर्षण रहा ब्लैक काइट शिकारी पक्षी का प्रदर्शन। इस पक्षी का प्रदर्शन गणतंत्र दिवस में पहली बार हुआ है। इन पक्षियों को इस तरह से ट्रेंड किया जाता है कि यह दुश्मन पर ऊपर से काफी अच्छी तरह निगरानी रख सकती हैं साथ ही दुश्मनों के ड्रोन को भी विफल कर सकती हैं। कई बार पहाड़ी इलाके जहां आतंकवादियों की सूचना सेना को मिलती है वहां इन पक्षियों का काफी उपयोग होता है क्योंकि कई बार इन इलाकों में सेना का तुरंत पहुंचना संभव नहीं हो पाता।

7. महिला सशक्तिकरण का दिखा अनोखा उदाहरण

सिमरन बाला, सीआरपीएफ की एक ऐसी असिस्टेंट कमांडेंट जिन्होंने केवल 26 साल की आयु में कर्तव्य पथ पर 140 से अधिक पुरुष जवानों के दल का नेतृत्व किया। ऐसा करने वाली वे पहली महिला बन गई है। परेड में उनका हर एक कदम लोगों को यह संदेश दे रहा था कि अब महिलाएं सिर्फ वर्दी ही नहीं पहन रही बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं।

Next Story