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dar kyon nahin lagta: डरावनी फिल्में देखने के बाद कुछ लोगों को डर क्यों नहीं लगता? कहीं ये कोई मनोवैज्ञानिक समस्या तो नहीं! जानिए दिमाग का रहस्य।

dar kyon nahin lagta: आज हम जानेंगे कि ऐसे व्यक्तियों का दिमाग डरावनी फिल्म देखने के बाद कैसे कार्य करता है और जानेंगे कि इन डरावने सीन का उन पर कोई प्रभाव क्यों नहीं पड़ता है?

dar kyon nahin lagta: डरावनी फिल्में देखने के बाद कुछ लोगों को डर क्यों नहीं लगता? कहीं ये कोई मनोवैज्ञानिक समस्या तो नहीं! जानिए दिमाग का रहस्य।
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Chirag Sahu

31 जनवरी 2026: अक्सर जब हम डरावनी फिल्में देखते हैं तो उसका डर हमारे मन में पूरे दिन बना रहता है और यदि ये फिल्में रात के समय देखे तो बाहर जाने की हिम्मत तक नहीं होती। इन फिल्मों के सीन हमें कई हफ्तों तक डराते रहते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो डरावनी फिल्में देखने के बाद भी चैन से सो जाते हैं और उन्हें इस फिल्म का कोई असर नहीं होता। कई लोगों को लगता है कि ऐसे व्यक्ति साइको दिमाग के होते हैं और सामान्य व्यक्तियों से अलग होते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि ऐसे व्यक्तियों का दिमाग डरावनी फिल्म देखने के बाद कैसे कार्य करता है और जानेंगे कि इन डरावने सीन का उन पर कोई प्रभाव क्यों नहीं पड़ता है?

डर लगने पर शरीर में कौन सी क्रियाएं होती हैं

जब भी लोगों को डरावनी फिल्मे दिखाया जाता है तो अधिकतर लोगों के शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन नजर आते हैं जैसे की सांसों की गति का बढ़ना, हृदय की धड़कन का तेज हो जाना और शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन का स्राव अधिक होना। ऐसी स्थिति तब आती है जब व्यक्ति किसी तनाव या भय की अवस्था में होता है। जब भी इस प्रकार की अवस्था निर्मित होती है तो हमारा शरीर स्वयं ही इस चीज से लड़ने या फिर इससे भागने की प्रतिक्रिया प्रदर्शित करता है। लेकिन यह प्रतिक्रियाएं हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है और कुछ में तो होती भी नहीं।

मानव के मस्तिष्क में एक बादाम के आकार का अंग होता है जिसे अमिग्डाला (Amygdala) कहते है। यह हमारे शरीर में डर, चिंता और गुस्से जैसी भावनाओं को प्रोसेस करने का काम करता है और शरीर को अलर्ट मोड में लाता है। लेकिन कुछ लोगों में यह काफी कम संवेदनशील होता है जिस वजह से उन्हें भय का एहसास भी कम लगती है।

डरावनी फिल्म देखने के बाद आराम से सोना कोई समस्या तो नहीं

कई लोगों को यह लगता है कि वे डरावनी फिल्में देखने के बाद आराम से सो जाते हैं, उन पर इन फिल्मों के भय का कोई असर नहीं होता। ऐसे में वे अपने आप को एक सुपर ह्यूमन मानने लगते हैं और कई लोग यह भी सोचते हैं कि उन्हें कोई मनोवैज्ञानिक समस्या है। लेकिन आपको बता दें कि यह कोई समस्या नहीं है बल्कि यह आपके शरीर की क्षमता है जो फिल्मों के समाप्त होने के बाद उसकी छवियों को शीघ्रता से समाप्त कर देती है। कई बार ऐसा भी होता है कि लोग बचपन से डरावनी फ़िल्में और कहानी, सुनते व देखते आ रहे होते हैं जिस वजह से उनका दिमाग इस चीज के लिए सामान्य हो चुका होता है, तो यह भी एक कारण है कि उन्हें डरावनी फिल्मों का भय नहीं लगता और वे आराम से सो पाते हैं।

डरावनी फिल्में देखने के बाद अच्छी नींद कैसे लाएं

  • यदि आपको भी रात के समय हॉरर मूवी देखने के बाद नींद आने की समस्या है तो कुछ इन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • सोने से पहले हॉरर मूवी देखने से बचें। यदि अपने मूवी देख भी ली है तो उसके बाद कोई हल्की-फुल्की ऐसी चीजे देखे जो हंसी मजाक वाली हो।
  • जहां आप सोते हैं वहां अपने रूम में एक हल्की प्रकाश वाली लाइट जलने दे। पूरी तरह से अंधकार न बना रहे।
  • सोने से पहले गहरी सांस ले और छोड़ें यह आपके स्नायु तंत्र को संतुलित करेगा।
  • सोने से पहले इस चीज को मन में जरूर रखें कि आपने जो फिल्म में देखा वह सिर्फ एक अभिनय था उसका वास्तविक जीवन से कोई नाता नहीं है।
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