Kuchh mahan vaigyanik aur unke khoj: रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाले आविष्कार; जानिए कुछ महान वैज्ञानिक और उनके खोज के बारे में!
Kuchh mahan vaigyanik aur unke khoj: मानव सभ्यता के विकास उसके जीवन शैली को सरल बनाने का काम विज्ञान ने किया है। समय-समय पर ऐसे महान वैज्ञानिक दुनिया में जन्म लेते रहे हैं जिन्होंने अपने नए–नए आविष्कारों से लोगों का जीवन सहज बनाया है।

Kuchh mahan vaigyanik aur unke khoj: मानव सभ्यता के विकास उसके जीवन शैली को सरल बनाने का काम विज्ञान ने किया है। समय-समय पर ऐसे महान वैज्ञानिक दुनिया में जन्म लेते रहे हैं जिन्होंने अपने नए–नए आविष्कारों से लोगों का जीवन सहज बनाया है। बल्ब, पंखे या मोटरसाइकिल और भी कई चीजों के आविष्कार ने मानव जगत में क्रांति ला दी है। साइकिल के टायर से लेकर परमाणुओं की खोज तक हर क्षेत्र में विज्ञान और उनके खोजकर्ताओं को सराहा गया है। उनके प्रयोग आज हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है। चलिए जानते हैं कुछ खोजकर्ताओं के नाम और उनके आविष्कारों के बारे में।
01. इलेक्ट्रॉन – जे. जे. थॉमसन (इंग्लैंड)
परमाणु के अंदर पाए जाने वाला सबसे हल्का कण इलेक्ट्रॉन ही होता है जो कि एक ऋणावेशित कण है। थॉमसन ने इसकी खोज 1897 में कैथोड किरण प्रयोग से की थी और इस बात का खंडन किया था कि परमाणु अविभाज्य है। तारों में विद्युत धारा का प्रभाव इलेक्ट्रॉन की गति के कारण ही होता है जो की बहुत तेज होती है। इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमती रहती है।
02. प्रोटॉन – गोल्डस्टीन
प्रोटॉन नाभिक के अंदर पाया जाता है जो कि धन आवेशित कण है, इसे कैनाल किरणें भी कहते हैं। गोल्डस्टीन ने इसकी खोज (1886) गैस डिसचार्ज ट्यूब प्रयोग से की थी। इसकी खोज से परमाणु की संरचना को समझने में मदद मिली। लेकिन रदरफोर्ड को प्रोटॉन का वास्तविक खोजकर्ता (1919) माना जाता है क्योंकि इन्होंने ही इस कण को प्रोटॉन नाम दिया था और बताया था कि परमाणु संख्या, प्रोटॉन की संख्या पर निर्भर करती है।
03. न्यूट्रॉन – जेम्स चैडविक (इंग्लैंड)
न्यूट्रॉन की खोज इंग्लैंड के वैज्ञानिक जेम्स चैडविक ने 1932 में की थी। इन्होंने बेरिलियम पर अल्फा कणों के प्रयोग से यह कारनामा कर दिखाया था और यह सिद्ध किया था कि न्यूट्रॉन विद्युत आवेश रहित कण होते हैं और परमाणुओं को स्थिरता प्रदान करते हैं।
04. नाभिक – अर्नेस्ट रदरफोर्ड
नाभिक की खोज का श्रेय रदरफोर्ड को जाता है जिन्होंने 1911 में इसकी खोज की थी। इन्होंने सोने की पतली पन्नी पर अल्फा कणों के प्रयोग से यह खोज किया था, जिसे gold foil experiment भी कहते हैं। इन्होंने बताया कि नाभिक परमाणु का केंद्र होता है और इसमें धन आवेशित होता है। इसके साथ ही परमाणु का पूरा द्रव्यमान इसी नाभिक के अंदर ही मौजूद होता है।
05. साइकिल – जॉन के. मैकमिलन (स्कॉटलैंड)
पुराने जमाने में दो प्रकार के साइकिल हुआ करते थे, एक में पैडल होता था और एक बिना पैडल के पैरों से धकेलते हुए चलाना होता था। बिना पैडल वाली साइकिल का आविष्कार कार्ल वॉन ड्राइस ने 1817 में किया था। फिर 1839 में जॉन के. मैकमिलन ने इसमें चेन और गियर जोड़े, जिससे यह पैडल वाली साईकिल बन गई।
06. साइकिल टायर – जॉन बॉयड डनलप (ब्रिटेन)
स्कॉटलैंड के इस वैज्ञानिक ने 1888 में हवा से भरा एक टायर तैयार किया। जिससे साइकिल चलाना काफी आसान हो गया था साथ ही झटके भी कम लगते थे और साइकिल की गति को कंट्रोल भी किया जा सकता था। इसका आविष्कार मानव जीवन के लिए एक बहुत बड़ी क्रांति है, जो आज भी इस्तेमाल होती है।
07. बल्ब – थॉमस अल्वा एडिसन
अमेरिकी वैज्ञानिक एडिसन ने 1879 में बल्ब का आविष्कार किया था। इन्होंने कार्बन फिलामेंट का उपयोग करके बल्ब बनाया था। इनके पहले भी जोसेफ स्वान ने बल्ब पर काम किया था, लेकिन सफलता नहीं मिलती थी। कहा जाता है कि 1000 बार असफलता के बाद एडिसन को यह सफलता मिली थी।
08. मोटरसाइकिल – जी. डैमलर (जर्मनी)
इन्होंने दुनिया की पहली पेट्रोल से चलने वाली मोटरसाइकिल का आविष्कार 1885 में किया जो दोपहिया थी। यह लकड़ी से बनाई गई थी जिसकी रफ्तार 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जो कि बहुत कम है। उस समय से राइटवैगन(Reitwagen) कहा जाता था।
09. डायनामाइट – अल्फ्रेड नोबेल
डायनामाइट का आविष्कार अल्फ्रेड नोबेल ने 1867 में किया था। उन्होंने इसे नाइट्रोग्लीसरीन और कीजलगुर/सिलिका मिट्टी के मिश्रण से तैयार किया था, जो कि काफी शक्तिशाली विस्फोटक पदार्थ है। इसको मुख्यत: नाइट्रोग्लीसरीन के खतरनाक विस्फोटको को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ इसका काफी दुरुपयोग होने लगा। जिससे दुखी होकर इन्होंने 1901 में मानव कल्याण के लिए नोबल पुरस्कार की शुरुआत की।
10. बाॅलपॉइंट पेन – लुइस वाटरमैन
बाॅलपॉइंट पेन का आविष्कार 1938 में अर्जेंटीना के वैज्ञानिक लुइस वाटरमैन ने किया था। इन्होंने पेन की निब पर स्याही निकलने के लिए एक छोटा घूमने वाला बॉल लगाया था, इससे लिखने में काफी तेजी और आसानी हुई। इस आविष्कार से पहले पूरी दुनिया में फाउंटेन पेन का उपयोग होता था जिसमें बार बार स्याही भरनी पड़ती थी।
