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Civil lines ka itihaas: भारत के हर शहर में क्यों बनाया गया है सिविल लाइन्स; जानिए क्या है यह खास इलाका और किसने की इसकी शुरुआत?

Civil lines ka itihaas: भारत के लगभग हर बड़े शहर और कुछ छोटे शहरों में भी एक नाम हमें जरूर सुनने को मिलता है वह है सिविल लाइन्स। लेकिन क्या आपको पता है यह हर शहर में क्यों बनाया जाता है? आखिर इसकी शुरुआत किसने की थी?

Civil lines ka itihaas: भारत के हर शहर में क्यों बनाया गया है सिविल लाइन्स; जानिए क्या है यह खास इलाका और किसने की इसकी शुरुआत?
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By Chirag Sahu

Civil lines ka itihaas: भारत के लगभग हर बड़े शहर और कुछ छोटे शहरों में भी एक नाम हमें जरूर सुनने को मिलता है वह है सिविल लाइन्स। लेकिन क्या आपको पता है यह हर शहर में क्यों बनाया जाता है? आखिर इसकी शुरुआत किसने की थी? आपको दिल्ली, इलाहाबाद, कानपुर जैसे शहरों में सिविल लाइन्स देखने को मिल जाएगी। ये वे इलाके होते हैं जहां का माहौल काफी शांत और हरा–भरा होता है साथ ही सुव्यवस्थित कालोनियां और बड़ी-बड़ी सड़के भी बनी होती हैं। आज हम जानेंगे कि सिविल लाइंस की शुरुआत कब और किसने की थी।

अंग्रेजों ने किया था सिविल लाइंस की शुरुआत

इन ऐतिहासिक इलाकों के निर्माण के पीछे अंग्रेजों का हाथ है। भारत में अंग्रेजों का लगभग 200 सालों तक शासन रहा है जिसमें इनके द्वारा कई ऐतिहासिक इमारतें और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया गया साथ ही उन्होंने यहां अपनी कई बड़ी-बड़ी बस्तियां भी बनाईं जिनमें से एक था सिविल लाइंस और यह पूरा कॉन्सेप्ट अंग्रेजों की ही देन है।

19वीं सदी के आसपास ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में अपना एकाधिकार जमा रही थी, तभी उन्होंने यह सोचा कि उच्च अंग्रेज अधिकारी और सामान्य भारतीय नागरिक दोनों अलग-अलग निवास करने चाहिए। वे भारतीयों को आवारा कुत्तों से तुलना करते थे और अपने आप को भारतीयों से महान मानते थे। इसी विचारधारा की वजह से सिविल लाइंस की अवधारणा ने जन्म लिया।

किन-किन जगहों में बनाया गया सिविल लाइन्स

शुरुआत में अंग्रेज केवल व्यापार करने के लिए ही भारत आए थे लेकिन जब वे यहां अपना अधिकार जमाने लगे तो उन्होंने अपने रहने के लिए भी कई बड़ी-बड़ी बस्तियां भी बनाई। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना सबसे पहला आवासीय क्षेत्र इलाहाबाद यानी प्रयागराज में बनाया था। इसे ही सबसे प्रमुख सिविल लाइन माना जाता है और यही से ही अन्य जगहों जैसे दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, फतेहपुर, रुड़की और भी कई शहरों में इसे बनाने की शुरुआत हुई।

इन बस्तियों में उच्च अंग्रेज अधिकारी और उनके परिवार रहा करते थे इस वजह से सिविल लाइंस बनाने के लिए मुख्यतः ऐसे स्थानो को चुना जाता था जो काफी शांत, हरे-भरे और मूलभूत सुविधाओं से परिपूर्ण हो। अंग्रेजों के लिए भारत का तापमान काफी ज्यादा होता था जिसके कारण वे यहां गर्मी को नहीं झेल पाते थे। ऐसे में वही नहीं लाखों को इस प्रकार डिजाइन करवाते थे जिससे कि गर्मी ज्यादा न लगे। अधिकारियों की इन बस्तियों को व्हाइट टाउन भी कहा जाता था, जहां भारतीयों का प्रवेश वर्जित था। इन बस्तियों में अंग्रेज परिवारों के लिए गोल्फ मैदान, टेनिस कोर्ट, क्रिकेट मैदान, चर्च, पार्टी क्लब्स आदि की सुविधाएं भी होती थी।

सिविल लाइंस नाम के पीछे का इतिहास

अंग्रेजी हुकूमत के समय इनके लिए काम करने वाले दो प्रकार के अधिकारी हुआ करते थे जिनमें एक थे सैन्य अधिकारी और दूसरे थे ग़ैर सैन्य अधिकारी, जिन्हें सिविल अधिकारी भी कहा जाता था। सैन्य अधिकारियों के रहने के लिए छावनी या कैंटोनमेंट बनाए जाते थे लेकिन वहीं गैर सैन्य अधिकारियों के लिए बनाए गए बस्तियों को सिविल लाइंस नाम दिया गया। अंग्रेजों के चले जाने पर भी यानि आजादी के बाद भी इन सिविल लाइंस में अब भारतीय अधिकारियों को घर आवंटित किए जाते हैं।

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