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Papad Ka Itihaas: भारत में पापड़ को सबसे पहले किसने बनाया? जानिए पापड़ का 1500 साल पुराना इतिहास!

Papad Ka Itihaas: क्या आपको पता है कि इस सुखे व कुरकुरे पकवान की शुरुआत कब हुई आखिर किसने सबसे पहले पापड़ बनाया होगा। आज हम विस्तार से जानेंगे पापड़ की 1500 साल पुरानी कहानी।

Papad Ka Itihaas: भारत में पापड़ को सबसे पहले किसने बनाया? जानिए पापड़ का 1500 साल पुराना इतिहास!
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Chirag Sahu

Papad Ka Itihaas: भारत अनेक विविधताओं का देश है। यहां कदम-कदम पर रंग–रूप, भाषा और खान-पान में बदलाव होते रहता है। खाने के संदर्भ में बात करें तो भारतीय थाली में यदि एक चीज न हो तो खाने का मजा पूरी तरह से नहीं आता वह है लजीज पापड़। जी हां! होली–दीपावली जैसा बड़ा त्यौहार हो और भोजन के साथ पापड़ न मिले तो भोजन में कुछ कमी जरूर लगती है। यह पकवान लगभग पूरे भारत में खाया जाता है हालांकि इसके क्षेत्रीय नाम अलग-अलग हो सकते हैं जैसे केरल में पापड़म, तमिलनाडु में अप्पदम आदि। लेकिन क्या आपको पता है कि इस सुखे व कुरकुरे पकवान की शुरुआत कब हुई आखिर किसने सबसे पहले पापड़ बनाया होगा। आज हम विस्तार से जानेंगे पापड़ की 1500 साल पुरानी कहानी।

पापड़ का इतिहास

इतिहास के प्रसिद्ध खाद्य वैज्ञानिक और खाद्य इतिहासकार केटी अचाया ने अपने प्रसिद्ध किताब ’ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड' में पापड़ को 500 वर्ष पुराना बताया है साथ ही यह भी बताया है कि पापड़ को उड़द, मसूर और चने की दाल से बनाया जाता था। पापड़ बनाने की प्रक्रिया का भी इन्होंने उल्लेख किया है जिसमें वे बताते हैं कि इन दालों को पीसकर मसाले के साथ मिलते हुए पतले पतले टुकड़ों में फैलाकर धूप में सुखाया जाता था।

पापड़ के विकास में जैन व्यापारियों का हाथ

1500 साल पहले जैन ग्रंथों में पापड़ बनाने का लिखित उल्लेख मिलता है। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में जैन व्यापारियों द्वारा पापड़ का सेवन अधिक किया जाता था। चूंकि व्यापारी वर्ग व्यापार के सिलसिले में लंबी यात्राएं करते थे तो ऐसे में वे अपने साथ उन भोजन को रखना पसंद करते थे जो सूखे हो व लंबे समय तक चले इसलिए राजस्थान में आज भी खासकर जैन वर्ग के लोगों द्वारा पापड़ अधिक खाया जाता है।

पाकिस्तान से हुआ पापड़ का व्यापारिक शुरुआत

अविभाजित भारत में सिंध प्रांत के लोगों द्वारा अलग-अलग प्रकार के पापड़ बनाए और बेचे जाते थे। यह स्थान सूखे और कम नमी वाले क्षेत्र होने के वजह से यहां पापड़ बनाने की कला लगातार विकसित होती गई। फिर आजादी के बाद अधिकतर लोग पाकिस्तान से भारत की ओर पलायन कर गए और उन्होंने अपने साथ पापड़ बनाने की तकनीक भी लाई। कहते हैं कि भारत में पापड़ का व्यापार सबसे पहले इन्हीं सिंधी परिवारों द्वारा किया गया था। होली के त्यौहार में तो पापड़ से लोगों का अलग ही रिश्ता है क्योंकि यह समय इसे बनाने और खाने के लिए सबसे बेस्ट होता है।

कितने प्रकार के पापड़ बनाए जा सकते हैं

  • दाल पापड़– इसमें चना दाल, मैदे और मसाले का उपयोग किया जाता है।
  • आलू पापड़– उबले हुए आलू को मैश करके उसमें नमक व मसाले डालकर तैयार किया जाता है।
  • खिचिया पापड़– चावल आटे, नमक और जीरे से बना।
  • साबूदाना पापड़– साबूदाने में नमक, जीरा और घी आदि डालकर तैयार किया जाता है। नवरात्रि का सबसे पसंदीदा भोजन।
  • रागी पापड़– महाराष्ट्र में प्रसिद्ध यह पापड़ रागी के आटे का उपयोग करके बनाया जाता है।
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