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Bharat ki Pramukh krishi krantiyan: भारत की 5 प्रमुख कृषि क्रांतियां, जिन्होंने बदली किसानों की जिंदगी! जानिए श्वेत, भूरी, लाल, गुलाबी और हरित क्रांति के बारे में

Bharat ki Pramukh krishi krantiyan: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था सिर्फ उद्योगों से नहीं चलती। इनमें कृषि, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी चीजों का भी योगदान होता है। दूध उत्पादन से लेकर मांस उद्योग तक सभी का कुछ ना कुछ योगदान जरूर है और इन सभी क्षेत्रों में लगातार नए नए खोज और क्रांतियां हो रही है। आईए जानते हैं भारत के प्राथमिक क्षेत्रो को लेकर हुए क्रांतियों के बारे में।

Bharat ki Pramukh krishi krantiyan: भारत की 5 प्रमुख कृषि क्रांतियां, जिन्होंने बदली किसानों की जिंदगी! जानिए श्वेत, भूरी, लाल, गुलाबी और हरित क्रांति के बारे में
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By Chirag Sahu

Bharat ki Pramukh krishi krantiyan: किसी भी देश की अर्थव्यवस्था सिर्फ उद्योगों से नहीं चलती। इनमें कृषि, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी चीजों का भी योगदान होता है। दूध उत्पादन से लेकर मांस उद्योग तक सभी का कुछ ना कुछ योगदान जरूर है और इन सभी क्षेत्रों में लगातार नए नए खोज और क्रांतियां हो रही है। इन्होंने भारत के किसानों की जिंदगी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ाया है। आज हम जो उन्नत कृषि कर पा रहे हैं, अच्छे क्वालिटी का दूध ग्रहण कर पा रहे हैं और मत्स्य पालन काफी आसानी से हो रहा है इसके साथ ही सब्जियां भी आसानी से उत्पादित हो रही है, तो सबका श्रेय इन सभी क्षेत्रों में हुई क्रांति को जाता है। आईए जानते हैं भारत के प्राथमिक क्षेत्रो को लेकर हुए क्रांतियों के बारे में।

01. श्वेत क्रांति (White Revolution)

भारत में श्वेत क्रांति का जनक डॉक्टर वर्गीज कुरियन को माना जाता है। इसे 1970 में शुरू किया गया था जो की एक विशाल डेयरी विकास कार्यक्रम है। इस क्रांति का उद्देश्य था भारत को एक बड़ा दूध उत्पादक राष्ट्र बनाना और किसानों की आय को बढ़ाना था। इस क्रांति को ऑपरेशन फ्लड (operation flood) के अंतर्गत शुरू किया गया था। इन्होंने ही अमूल की शुरुआत की थी, जो कि आज हजारों करोड़ों का ब्रांड है। इसी क्रांति के बाद से ही भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया।

02. भूरी क्रांति (Brown Revolution)

भूरी क्रांति की शुरुआत हीरालाल चौधरी ने 1990 के दशक में की थी। इसे भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा भी काफी बढ़ावा दिया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता को बढ़ाना था जिससे की फसलों के उत्पादन में वृद्धि हो सके। साथ ही इसे उच्च मूल्य वाले उत्पाद जैसे कोको और चमड़े के उत्पादन से भी जोड़ा जाता है।

03. लाल क्रांति (Red Revolution)

यह क्रांति टमाटर और मांस के उत्पादन से संबंधित है जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में विशाल तिवारी द्वारा की गई थी। इस क्रांति को भारत सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा सहायता प्रदान किया गया था। इस क्रांति की वजह से इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर तकनीक और उन्नत बीजों का उपयोग होने लगा जिससे उत्पादन में निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई और पशुपालकों की आय भी बढ़ी।

04. गुलाबी क्रांति (Pink Revolution)

इस क्रांति की शुरुआत 1970 के दशक झींगा उत्पादन से हुई थी, फिर 2014 के आसपास इसे प्याज, पोल्ट्री और औषधि से भी जोड़ा गया। इसकी शुरुआत दुर्गेश पटेल के द्वारा की गई थी। इस क्रांति का उद्देश्य पारंपरिक तरीकों को मशीनीकृत करके उन्नत बनाना था साथ ही तटीय क्षेत्रों में रह रहे लोगों के लिए भी यह क्रांति काफी मददगार साबित हुई।

05. हरित क्रांति (Green Revolution)

विश्व में हरित क्रांति का जनक नॉर्मन बोरलॉग को माना जाता है जिन्होंने 1960 के दशक में इसे शुरू किया था। जिस वजह से इन्हें हरित क्रांति के जनक (father of Green revolution) के रूप में जाना जाता है। इन्हें 1970 में उन्नत कृषि बीज (high yielding varieties– HYVs) उत्पादन के लिए नोबेल शांति पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

भारत के संदर्भ में बात करें तो हरित क्रांति की शुरुआत 1966–67 के दौरान आरंभ हुई थी, जिसका श्रेय डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को जाता है। भारत में इस क्रांति का उद्देश्य उन्नत बीज और बेहतरीन सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना था। भारत में भुखमरी की समस्या को दूर करने हेतु दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान इस क्रांति की शुरुआत की गई थी। इस क्रांति के फल स्वरुप भारत में किसानों को अधिक उत्पादित फसल मिलने लगे और यहां के किसान दोहरी फसल भी लेने लगे।

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