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"बस्तर बीयर" एक बार अगर चख लिया तो ताउम्र नहीं भूल पाओगे स्वाद ... फायदें भी कर देंगे हैरान

Salphi : इसे ताड़ प्रजाति के एक विशेष पेड़ से निकाला जाता है और स्थानीय लोग इसे "बस्तर बीयर" के नाम से भी जानते हैं।

बस्तर बीयर एक बार अगर चख लिया तो ताउम्र नहीं भूल पाओगे स्वाद ... फायदें भी कर देंगे हैरान
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By Meenu Tiwari

Bastar's special drink Sulfi is famous in the world : छत्तीसगढ़ का बस्तर जितना प्राकृतिक सुंदरता के कारण विश्व प्रसिद्ध है ठीक उसी प्रकार अपने संस्कृति और खानपान के लिए भी जाना जाता है. और यहाँ के खानपान में सबसे अनोखी चीज है "बस्तर बीयर". क्या कभी आपने इसका नाम सुना है या कभी बस्तर बीयर का स्वाद चखा है. खैर चौकिये मत हम बात कर रहे है सल्फी की. सल्फी न केवल एक पारंपरिक पेय के रूप में जानी जाती है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, परंपरा और जीविका से भी गहराई से जुड़ी हुई है। बस्तर के आदिवासियों के लिए सल्फी एक पारंपरिक और महत्वपूर्ण पेय है, जो विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में अत्यधिक लोकप्रिय है। इसे ताड़ प्रजाति के एक विशेष पेड़ से निकाला जाता है और स्थानीय लोग इसे "बस्तर बीयर" के नाम से भी जानते हैं।


जो भी छत्तीसगढ़ से हो या अन्य राज्यों से हो या फॉरेनर हो जो भी बस्तर की वादियों में कदम रखता है वो इसका स्वाद जरूर चखता है. और इसका स्वाद और इसके फायदें जीवन भर के लिए यहाँ से अपने जेहन में भर कर ले जाता है. कई पर्यटक को तो यह इतना भ जाता है की इसे बाद में उपयोग करने के लिए खरीद कर भी लाते हैं.


सल्फी का रस निकालने की प्रक्रिया काफी पारंपरिक होती है, जिसमें ग्रामीण या आदिवासी लोग पेड़ पर चढ़कर एक बर्तन को रस इकठ्ठा करने के लिए बांधते हैं। इसके बाद पेड़ में एक हल्का सा कट लगाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे रस टपककर बर्तन में एकत्रित होता है। यह रस ताजा अवस्था में मीठा और पौष्टिक होता है, जिसे तुरंत पीया जाता है और इसे कुछ समय तक धूप में रखा जाए, तो यह किण्वित होकर हल्का नशीला बन जाता है।


सल्फी यह पेय न केवल उनकी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी इसकी खास भूमिका होती है. सल्फी बल्कि आदिवासी समुदाय के लिए आय का स्रोत भी है। यह गर्मी के मौसम में अधिक मात्रा में निकाली जाती है और स्थानीय बाजारों में बेची जाती है। इसके अलावा, यह पेय सामाजिक मेलजोल, उत्सव और रिश्तों की पहचान का माध्यम भी है, जिससे यह आदिवासी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।




एक ऐसा पेय जो सीधे पेड़ से निकला जाता है


सल्फी का रस सीधे ताड़ जैसे पेड़ से निकाला जाता है, जिसमें किसी कृत्रिम प्रक्रिया या मिलावट की जरूरत नहीं होती। यह इसे पूरी तरह जैविक और प्राकृतिक पेय बनाता है। सल्फी का ताजा रस सुबह के समय मीठा और ताजगी देने वाला होता है, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता है और धूप लगती है, यह किण्वित होकर नशीली हो जाती है।




फायदें भी खूब


पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सल्फी शरीर को ठंडक देने, थकान दूर करने और पाचन में मदद करने वाला पेय माना जाता है, खासकर गर्मी के मौसम में।


Meenu Tiwari

मीनू तिवारी 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया में अनुभव रखती हैं। उन्होंने हरिभूमि, पत्रिका, पेज 9 सहित क्लिपर 28, लल्लूराम, न्यूज टर्मिनल, बोल छत्तीसगढ़ और माई के कोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। वर्तमान में वे एनपीजी न्यूज में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।

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