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Raat mein junglon se kyon aati Hai daravani awazen: बस्तर के जंगल का रहस्य: आधी रात को क्यों चीखता है जंगल? जानिए क्या कहता है विज्ञान

Raat mein junglon se kyon aati Hai daravani awazen:बस्तर के इन आदिवासी और घने जंगलों वाले इलाके में जब अंधेरा उतरता है तभी असली डर सामने आता है। कहा जाता है कि इन इलाकों में रात होते ही जंगलों के चीखने की आवाज आती है।

Raat mein junglon se kyon aati Hai daravani awazen: बस्तर के जंगल का रहस्य: आधी रात को क्यों चीखता है जंगल? जानिए क्या कहता है विज्ञान
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Chirag Sahu

Raat mein jungle se kyon aati Hai daravani awazein: छत्तीसगढ़ की अनोखी धरती अपने अंदर खनिज, वन संपदा और कई ऐसे रहस्यमयी चीजों को छुपाए हुए हैं जो मनुष्य को हमेशा से ही आश्चर्य चकित करती आई है। छत्तीसगढ़ के उत्तरी व दक्षिणी हिस्से में खासकर बस्तर के इलाकों में घने जंगल काफी ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं और इन वन क्षेत्र में अनेकों वन्य जीव भी निवास करते हैं। बस्तर के इन आदिवासी और घने जंगलों वाले इलाके में जब अंधेरा उतरता है तभी असली डर सामने आता है। कहा जाता है कि इन इलाकों में रात होते ही जंगलों के चीखने की आवाज आती है। आदिवासी मान्यताओं के अनुसार इस डरावनी आवाज को आत्माओं की चीख बताया जाता है साथ ही कई लोगों से जानवरों का आवाज भी मानते हैं। आज हम जानने की कोशिश करेंगे की जंगलों से आने वाली इन डरावनी आवाजों की सच्चाई क्या है।

रात में जंगलों से क्यों सुनाई देती है डरावनी आवाज

बस्तर का जंगल लगभग 39000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां की जैव विविधताओ में शेर, भालू, लोमड़ी साथ ही चिड़ियों की भी कई प्रजातियां पाई जाती हैं। शांत वातावरण, खूबसूरत झरनों, नदियों और पहाड़ों से भरे हुए बस्तर के इस जंगल में आदिवासियों का भी निवास स्थान है। इस तरह से यह जंगल 1150 से भी अधिक जीव जंतुओं की प्रजातियां का घर हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो केवल रात के समय ही अधिक सक्रिय होते हैं यही कारण है कि जब भी शेर, भालू , गीदड़, उल्लू इन तरह के जानवरों द्वारा रात के समय आवाज निकल जाता है, तो वह आवाज शांत वातावरण की वजह से काफी दूर तक सुनाई देती है और जब इंसान इन आवाजों को सुनता है तो वह किसी की चीख की तरह लगती है।

इन आवाजों को सुनकर मनुष्य जिस प्रकार की डरावनी प्रतिक्रिया देता है वह हमारे पूर्वजों से प्राप्त हुई है। पहले के समय में लोग जंगल पर ही निर्भर रहा करते थे और उन्हें जंगली जानवर का खतरा काफी ज्यादा रहता था। इसी वजह से उन्हें जानवरों की आवाजों से भी सतर्क रहना पड़ता था और उस समय से लेकर अब तक मनुष्य का दिमाग इस तरह विकसित हो चुका है कि वह जब भी रात के अंधेरे में कोई आवाज सुनता है तो उसके मन में एक डर जरूर आ जाती है।

जानिए इन डरावनी आवाजो का वैज्ञानिक पहलू

जंगल से आने वाली डरावनी आवाजों को जब वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाता है तब हमें इन आवाजों का असली मतलब पता चल पाता है। आपने यह जरूर गौर किया होगा कि जब भी दिन का समय होता है तो हमें किसी प्रकार की कीड़े मकोड़े की आवाज नहीं सुनाई देती लेकिन जैसे ही रात होती है तो हमें दूर से ही इन कीड़ों का महीन आवाज भी सुनाई देने लगता है।

इसी तरह ही जब रात के समय जंगलों में शांति होती है तो किसी एक जानवर की हल्की सी आवाज भी बहुत तेज सुनाई देती है क्योंकि रात के समय किसी प्रकार की बाहरी आवाजों का बेरियर नहीं होता। जब जानवरों द्वारा आवाज निकाला जाता है तो जंगलों के घने होने की वजह से आवाज ईको (Echo) होने लगती है। इस वजह से हमें एक ही आवाज कई दिशाओं से आती हुई महसूस होती है जो काफी डरावना लगता है।

रात में प्रकृति भी करती है डरावनी आवाज

बस्तर के घने जंगलों में ऊंचे–ऊंचे पहाड़ों से झरने लगातार गिरते रहते हैं चूंकि दिन में अधिक शोर होता है इसलिए यह आवाज़ दब जाती है लेकिन रात के समय शांत माहौल में कई सौ फीट से नीचे गिरने वाले झरने का पानी ऐसी आवाज करता है जिसे सुनकर लोग कांप जाए। कई रात में तापमान ठंडा होने से पेड़ों के सिकुड़ने की आवाज और हवा से उनके डालियों के लहराने की आवाज भी काफी भयंकर होती है ऐसा लगता है कि जंगल सच में चीख रहा हो।

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