Imli ke beej ke fayde: अब इमली के बीज नहीं जाएंगे बेकार! शरीर की सफाई में कर सकते हैं मदद; जानिए इमली के बीजो का अनोखा इस्तेमाल
Imli ke beej ke fayde: आपने इमली (Tamarind) का उपयोग किसी भी सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए जरूर किया होगा लेकिन इसके बीजों को बेकार समझ के फेंक भी देते हैं। कई शोधों से यह पता चला है कि इमली के बीच में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं जो हमारे शरीर के अंदर माइक्रोप्लास्टिक कणों को हटाने का काम करते है।

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Imli ke beej ke fayde: आपने इमली (Tamarind) का उपयोग किसी भी सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए जरूर किया होगा लेकिन इसके बीजों को बेकार समझ के फेंक भी देते हैं। कई शोधों से यह पता चला है कि इमली के बीच में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं जो हमारे शरीर के अंदर माइक्रोप्लास्टिक कणों को हटाने का काम करते है। माइक्रोप्लास्टिक कण (Microplastics) बहुत ही महीन कण होते है, ये आंखों से दिखाई भी नहीं देते। जब ये कण पानी, हवा, और खाने के साथ हमारे शरीर के अंदर जाते हैं तो ये कोशिकाओं और इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते है। इसी समस्या के लिए इमली के बीजों (Tamarind Seed) का उपयोग बहुत ही मददगार हो सकता है।
इमली के बीजों पर किए गए शोध
इमली के बीजों पर किया गया यह महत्वपूर्ण शोध अमेरिका के Tarleton State University में कंडक्ट कराया गया था। यहां के वैज्ञानिकों ने पाया कि इमली के बीजों में कई ऐसे प्राकृतिक यौगिक मौजूद होते हैं जिनके मदद से पानी में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक कणों को हटाया जा सकता है।
माइक्रोप्लास्टिक कण 5 मिमी से भी छोटे प्लास्टिक कण होते हैं और जब ये हवा व पानी की सहायता से हमारे शरीर के अंदर जाते हैं तो ब्लड इंफेक्शन, फेफड़े और पाचन तंत्र की समस्या बनने लगती है
इमली के बीजों का उपयोग
शरीर से माइक्रोप्लास्टिक कणों को निकालने के लिए इमली के बीजों का उपयोग एक सफल उपाय हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि इसमें पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides), जाइलोग्लूकान (Xyloglucans) और एक चिपचिपा जेल पाया जाता है। यह सभी पदार्थ छोटे माइक्रो प्लास्टिक कणों से चिपक जाते हैं और उसके आकार को बड़ा करके शरीर से बाहर निकाल देते हैं।
लैब में हुए प्रयोग यह बताते हैं कि इमली में मौजूद प्राकृतिक पॉलीमर जल के 90% माइक्रो प्लास्टिक कणों को हटा सकती है, इससे पानी और भी शुद्ध हो सकता है। यह शोध केवल लैब में पानी को शुद्ध करने तक ही सीमित है। मानव शरीर में इसके उपयोग को लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है।
