Aasman mein aeroplane ko Disha Kaun dikhata hai: आसमान में बिना रोड के विमान कैसे उड़ते हैं? ये आपस में टकराते क्यों नहीं! जानिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल और रडार का पूरा सिस्टम
Aasman mein aeroplane ko Disha Kaun dikhata hai: क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि हवाई जहाज या कोई भी ऐसा वाहन जो हवा में उड़ता है, वह बिना किसी रोड और ट्रैफिक सिग्नल के एकदम सही टाइम और सही जगह पर कैसे पहुंच जाता है? आईए जानते हैं विमान में उपयोग होने वाले एडवांस डायरेक्शन फीचर के बारे में।

Aasman mein aeroplane ko Disha Kaun dikhata hai: क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है कि हवाई जहाज या कोई भी ऐसा वाहन जो हवा में उड़ता है, वह बिना किसी रोड और ट्रैफिक सिग्नल के एकदम सही टाइम और सही जगह पर कैसे पहुंच जाता है? कभी ये भी सोचा होगा कि दो प्लेन आपस में टकराते क्यों नहीं है? आखिर हजारों फीट की ऊंचाई में उड़ने वाले प्लेन को दिशा कौन दिखता है? जमीन पर चलते वक्त हम रोड को फॉलो करते हुए कहीं भी पहुंच जाते हैं, लेकिन हवाई जहाज के लिए यह मुमकिन नहीं है क्योंकि हवा में रोड तो होता ही नहीं! आईए जानते हैं विमान में उपयोग होने वाले एडवांस डायरेक्शन फीचर के बारे में।
विमान को दिशा दिखाने के लिए होते हैं एयर ट्रैफिक कंट्रोलर
जिस प्रकार से सड़कों में ट्रैफिक सिग्नल और ट्रैफिक पुलिस का काम होता है ठीक वैसा ही हवाई जहाज के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (Air traffic controller, ATC) काम करती है। जब भी आप कभी एयरपोर्ट जाएं तो आपको वहां एक ऊंचा टावर जैसा स्ट्रक्चर दिखेगा, जिसे देख कर आप समझ जाइए की यही ATC है। इस काम के लिए प्रोफेशनल और ट्रेंड लोगों को जॉइनिंग दी जाती है, क्योंकि ये हजारों लोगों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होते हैं।
इन टॉवर्स में कई एडवांस फीचर और बड़ी–बड़ी कंप्यूटर स्क्रीन होती है, जहां से एटीसी रियल टाइम विमान की स्थिति कंप्यूटर से और बाहर खिड़की से भी देख सकते हैं और जब कोई विमान उड़ने की अनुमति मांगता है तो उस विमान के उड़ने का सही समय एटीसी के द्वारा ही बताया जाता है। इसके साथ ही विमान किस रनवे पर लैंड करेगा यह भी एटीसी ही तय करता है।
जिस प्रकार से ट्रेन में स्टेशन मास्टर होते हैं वैसे ही एयरपोर्ट्स में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर का काम होता है। एटीसी, विमान के आने जाने को तो तय करते ही हैं इसके साथ ही वे पायलेट्स के साथ रेडियो संपर्क से भी जुड़े रहते हैं और पायलट को मौसम खराब की जानकारी, कोई आपातकालीन स्थिति या सेम वे पर दूसरे विमान के आने की जानकारी प्रदान करते रहते हैं, जिससे टक्कर आदि की कोई दुर्घटना ना हो।
रडार प्रणाली का है विशेष महत्व
रडार प्रणाली का उपयोग लगभग सभी हवाई जहाज में किया जाता है। यह एक ऐसी तकनीक है जो रेडियो तरंगों के माध्यम से वस्तु की दूरी का पता लगाता है। रडार का पूरा नाम radio detection and ranging है, जो लगातार अपने ट्रांसमीटर की सहायता से रेडियो तरंगे छोड़ता रहता है जो विद्युत चुंबकीय तरंग के रूप में होती है और यह प्रकाश की गति से गमन करता है। जब भी विमान में यह अनाउंस किया जाता है कि हम 20000 फीट की ऊंचाई पर हैं या 30000 फीट की ऊंचाई पर हैं, तो यह सटीक ऊंचाई इन्हीं रेडियो तरंगों के माध्यम से बता पाते हैं। जब भी रडार तरंगे छोड़ता है तो वह सीधे धरती पर जाती है और वापस रडार की तरफ लौट आती है जिससे ऊंचाई का पता चल पाता है और लैंडिंग सही तरीके से होती है। यह रडार सिस्टम हर मौसम में काम करता है, खासकर ठंड में जब बाहर पूरा कोहरा होता है और कुछ दिखाई नहीं देता।
दो विमान आपस में टकराते क्यों नहीं है?
विमानों के उड़ने के लिए एक खास एयर रूट्स (AIR WAYS) तैयार किए जाते हैं और विमानों को इन्ही रास्तों पर उड़ने की अनुमति दी जाती है। दो विमानों के आपस में न टकराने के पीछे रडार सिस्टम का भी बहुत बड़ा हाथ है। जब भी एटीसी द्वारा जमीन से रेडियो तरंगें भेजी जाती है, तो वे तरंगें विमान से टकराकर वापस जमीन की ओर आती है और जिस एंगल से सिंगल आती है उससे यह पता लगाया जा सकता है कि विमान किस दिशा में और कितने दूरी पर है। वर्तमान के सभी विमानों में GPS सिस्टम काम करता है। इसमें विमान खुद अपना लोकेशन ATC और आसपास उड़ रहे अन्य विमानों को शेयर करते रहता है। इसके साथ ही सभी विमानों में TCAS (Traffic collision avoidance system) लगा होता है, जो पास में उड़ रहे अन्य विमानों की चेतावनी पायलट को देता है।
पायलट को कैसे पता चलता है कि किस दिशा में जाना है
हवा में तो रोड होती ही नहीं है, फिर भी विमान अपनी सही जगह पर पहुंच ही जाता है। इस स्थिति में पायलट को सही दिशा दिखाने का काम HSI(Horizontal Situation Indicator) करती है। यह पायलट को बताती है कि अपने सही डेस्टिनेशन के लिए दाएं मुड़ना है या फिर बाएं। इस इंडिकेटर की वजह से पायलट को अपनी स्क्रीन पर सभी जगह की अक्षांशीय और देशांतरीय स्थिति साफ-साफ नजर आती है और वे यह तय कर पाते हैं कि किस दिशा की ओर जाना है। आसान शब्दों में कहे तो यह एक लाइन(रेखा) की तरह विमानो को रास्ता दिखाने का काम करता है।
