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14 February ko Valentine Day kyon manaya jata hai: 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है? जानिए इसके पीछे का दर्दनाक इतिहास! 90% लोगों को नहीं पता यह बातें।

valentine day history: अधिकतर लोगों को वैलेंटाइन डे सुनते ही यह लगता है कि इस दिन सिर्फ प्रेमी जोड़े के लिए रोमांटिक समय बिताने का दिन है लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वैलेंटाइन डे आखिर क्यों और कब से मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं कैसे हुई वैलेंटाइन डे मनाने की दर्दनाक शुरुआत ।

14 February ko Valentine Day kyon manaya jata hai: 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है? जानिए इसके पीछे का दर्दनाक इतिहास! 90% लोगों को नहीं पता यह बातें।
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Chirag Sahu

14 February ko Valentine Day kyon manaya jata hai: हर साल सभी प्रेमी जोड़े और लवर्स को फरवरी महीने का इंतजार काफी बेसबरी से रहता है। इस महीने में आने वाला वेलेंटाइन वीक सभी को लाल गुलाब, चॉकलेट्स और ग्रीटिंग कार्ड्स की याद दिलाता है। इस वेलेंटाइन वीक के दौरान सबसे प्रमुख दिन 14 फरवरी का होता है, इस दिन को वैलेंटाइन डे के रूप में भी मानते हैं। अधिकतर लोगों को वैलेंटाइन डे सुनते ही यह लगता है कि इस दिन सिर्फ प्रेमी जोड़े के लिए रोमांटिक समय बिताने का दिन है लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वैलेंटाइन डे आखिर क्यों और कब से मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं कैसे हुई वैलेंटाइन डे मनाने की दर्दनाक शुरुआत ।

वैलेंटाइन डे मनाने की शुरुआत

वर्तमान में जितना रोमांटिक वैलेंटाइन डे मनाया जाता है शुरुआत में यह बिल्कुल भी ऐसा नहीं था। इस दिन को साहस और बलिदान के रूप में जाना जाता है लेकिन समय के साथ-साथ इसे मनाने के तरीके में भी काफी बदलाव होते गए। लगभग तीसरी शताब्दी के आसपास रोम में ईसाई धर्म का काफी प्रचार प्रसार किया जा रहा था। यहां के सम्राट क्लॉडियस द्वितीय एक महान योद्धा थे और इनका मानना था कि कुशल योद्धा वही हो सकता है जो अविवाहित है। विवाहित व्यक्ति कभी भी योद्धा नहीं बन सकता क्योंकि वह हर समय अपने परिवार के बारे में ही सोचता रहता है। अपने इस अजीब सोच को उन्होंने कानून बना दिया और किसी भी सैनिक को विवाह करने की अनुमति प्रदान नहीं की गई।

इस कठोर कानून के लागू होते ही सम्राट का काफी विरोध हुआ और ऐसा माना जाता है कि इसी समय एक महान संत हुए जिनका नाम वैलेंटाइन था। इन्होंने प्रेम को सर्वोपरि मानते हुए सम्राट के आदेश को नहीं माना और कई सैनिकों के गुप्त विवाह करवा दिए। संत वैलेंटाइन का मानना था कि दो लोगों के प्रेम संबंधों को एक करना किसी प्रकार का गुनाह नहीं है

संत वैलेंटाइन का बलिदान

संत वैलेंटाइन द्वारा सम्राट की आज्ञा का उल्लंघन करते हुए सैनिकों के गुप्त विवाह की बात जब सम्राट क्लॉडियस को पता चली तो इन्होंने संत वैलेंटाइन के ऊपर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए तुरंत जेल में डलवा दिया और वैलेंटाइन के सामने यह शर्त रखी कि वे अपना ईसाई धर्म छोड़कर रोमन धर्म अपना ले ताकि उनकी जान बख्श दी जाए परंतु उन्होंने अपना धर्म छोड़ने पर पूरी तरह से इनकार कर दिया।

जेल में रहते हुए वैलेंटाइन की एक और कहानी काफी फेमस है। कहते हैं कि जिस जेल में वैलेंटाइन को रखा गया था वहां के जेलर की पुत्री अंधी थी और जब वैलेंटाइन की मुलाकात जेलर की पुत्री से हुई तो इन्होंने अपने प्रार्थना और आशीर्वाद से उसकी आँखों की रोशनी फिर से लौटा दी। इस घटना के वजह से संत वैलेंटाइन लोगों के बीच काफी फेमस हुए थे और अपने आखिरी दिन में इन्होंने इसी लड़की को ही एक खत लिखा था जिसके आखरी शब्द थे ’From Your Valentine’ जो आज भी दो लवर्स के बीच उपयोग किया जाता है। फिर कुछ दिनों बाद लगभग 270 ईस्वी में 14 फरवरी के दिन संत वैलेंटाइन को फांसी दे दी गई और इन्हीं के बलिदान को वैलेंटाइन डे के रूप में जाना जाता है

एक बलिदान दिवस कैसे बन गया रोमांटिक डे

संत वैलेंटाइन की मृत्यु के कई सौ सालों तक यह दिन एक बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता था। लेकिन सवाल उठता है कि यह धार्मिक दिवस कैसे एक प्रेम दिवस में बदल गया। वैलेंटाइन डे को प्रेम से जोड़ने का श्रेय अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि, लेखक और दार्शनिक जेफ्री चौसर को जाता है। इस दिन को इन्होंने ही अपने कविताओं के माध्यम से प्रेम व रोमांस से जोड़ा था। 18 वीं शताब्दी के आते-आते यह दिन पूरी तरह से एक लव डे बन चुका था। जहां प्रेमी जोड़े एक दूसरे को फूल, गिफ्ट, चॉकलेट और कई अन्य सरप्राइज देकर खुश करने की कोशिश करते है। क्रिसमस के बाद सबसे ज्यादा ग्रीटिंग कार्ड वैलेंटाइन डे के दिन ही बांटे जाते हैं।

भारत में वैलेंटाइन डे का विरोध

जिस तरह से प्रेमी जोड़ों को वैलेंटाइन डे का इंतजार होता है उसी तरह भारत में बजरंग दल व अन्य हिंदू संगठनों के लिए भी यह दिन काफी खास होता है क्योंकि ये दल पूरे देश में वैलेंटाइन डे का पुरजोर विरोध करते हैं और संदिग्ध अवस्था में पाए गए किसी भी प्रेमी जोड़े पर तुरंत कार्यवाही करते है। कई स्थानों पर तो लाठी के पूजन से इस दिन का विरोध किया जाता है।

इन दलों का यह मानना है कि 14 फरवरी को मनाया जाने वाला वैलेंटाइन डे भारतीय संस्कृति के लिए खतरा है और यह परंपरा भारत में नहीं मनानी चाहिए। ये कहते है कि यह दिन भारतीय युवाओं को खुद के संस्कृति और समाज से दूर करने का प्रयास करता है। इसलिए इन दलों के द्वारा इस दिन पार्क, कॉलेज, धार्मिक स्थल जैसे कई सार्वजनिक जगहों पर कपल्स के अश्लील व मनचाहे कृत को रोकने का कार्य किया जाता है और इस दिन को मातृ पितृ दिवस के रूप में मनाने की सीख भी दी जाती है।

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