फर्रुखाबाद: अपहरणकर्ता सुभाष ने 19 साल पहले काट दिया था पड़ोसी का गला, घर में था इतना गोला बारूद, देख पुलिस भी रह गई हैरान… सिरफिरे ने चिट्ठी में क्या लिखा?… पढ़ें पूरी खबर

घर में था इतना गोली बारूद था कि 2 दिन तक कर सकता था पुलिस से मुकाबला

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लखनऊ 31 जनवरी 2020. फर्रुखाबाद के शहर मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर करथिया गांव है। गुरुवार शाम को एक हत्यारे द्वारा 23 बच्चों को घर में बंधक बनाने के बाद यह गांव सुर्खियों में आ गया। करीब 8 घंटे बाद बंधक बनाए गए बच्चों को ऑपरेशन चलाकर पुलिस ने मुक्त कराया। ऑपरेशन के दौरान बच्चों को बंधक बनाने वाला सुभाष बाथम मार गया। उसकी पत्नी रूबी को ग्रामीणों ने पीट दिया। इसमें वह बुरी तरह जख्मी हो गई और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।  बच्चों को बंधन बनाने के बाद आरोपित ने पुलिस टीम पर उसने हमला बोला। बम से उड़ाने की धमकी दी थी। जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया गया। भीड़ ने उसकी पत्नी रूबी को भी जमकर पीटा।

सुभाष बाथम की पत्नी रूबी को बेहोशी की हालत में देर रात लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। इमरजेंसी डॉक्टर सर्वेश यादव ने बताया रूबी के गंभीर हेड इंजरी के अलावा शरीर पर तीन चोटें थीं। गंभीर हालत में सुबह छह बजे सैफई के लिए रेफर किया गया था, लेकिन उसने दम तोड़ दिया। कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि भीड़ के हाथों पिटाई से घायल महिला को बचाने का प्रयास किया गया। उसे फौरन इलाज के लिए भेजा गया, लेकिन अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम से साफ होगा कि महिला की मौत कैसे हुई है।

पुलिस से मंगाई सिगरेट, तो ले लिए बिस्कुट भी
सुभाष कितना क्रूर था। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब छह घंटे बाद भी बच्चों पर उसे तरस नहीं आया। रात करीब आठ बजे पुलिस से उसने अपने लिए सिगरेट मंगवाई। उसने दरवाजे के नीचे बनी दरार से सिगरेट के साथ बिस्कुट भी ले लिए थे।

पड़ोसी की गला काटकर की थी हत्या
सुभाष का वर्ष 2001 में गांव के ही मेघनाथ से नाली से पानी निकासी को लेकर विवाद हुआ था। इसी रंजिश में सुभाष ने मेघनाथ की चाकू से उसी के घर के बाहर गला काटकर हत्या कर दी थी। हत्या के आरोप में पुलिस ने उसे जेल भी भेजा था। ग्रामीणों के मुताबिक करीब डेढ़ साल पूर्व सुभाष जमानत पर  छूट कर आया था।

थाने से भाग गया था सुभाष
करीब आठ महीने पहले मौधा गांव के अमर सिंह राठौर के खेत में रबड़ का पाइप चोरी हो गया था। पुलिस ने जांच की तो सुभाष का नाम सामने आया। पुलिस सुभाष को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई। अंधेरा होने पर वह पुलिस को चकमा देकर भाग निकला था। पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और न सुभाष को पकड़ने का प्रयास किया। इसके बाद करीब चार महीने पहले स्वॉट टीम ने सुभाष को पकड़ा था। दो-तीन दिन तक पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। तब से सुभाष स्वॉट टीम के दो सिपाही सचेंद्र सिंह व अनुज तिवारी से नाराज था।

जब घर के अंदर से विस्फोटक के अलावा डेटोनेटर मिला तो सारी कहानी सामने आ गई। गांव करथिया निवासी सुभाष ने बच्चों को बंधक बनाने की योजना कई दिन पहले ही तैयार कर ली थी। इसके तहत ही उसने घर में ही देसी बम तैयार किए और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट का तरीका भी सीख लिया।

गुरुवार को बच्चों के आने से पहले उसने घर के बाहर दरवाजे के पास ईंटों के टुकड़ों के नीचे देसी बम में तार बांध कर छिपा दिया था। तार का दूसरा छोर कमरे के अंदर डेटोनेटर से बंधा था। बच्चों के बंधक बनाए जाने पर कोतवाल राकेश कुमार, यूपी 112 के दीवान जयवीर सिंह यादव ने दरवाजा खुलवाने के लिए ईंट पत्थर चलाए तो सुभाष ने घर के अंदर से ही डेटोनेटर के जरिए विस्फोट कर दिया था।

इसमें कोतवाल व दीवान समेत सिपाही सुनील घायल हो गया था। गुरुवार रात जब पुलिस ने मुठभेड़ में सुभाष का खात्मा कर दिया तो उसके कमरे में रखे सामान को देखकर अफसर दंग रह गए। अफसरों को समझते देर नहीं लगी कि अगर उसके घर की बिजली नहीं काटते तो वह और विस्फोट कर सकता था। इसके अलावा सुभाष ने अधिक शराब भी पी ली थी। नशे के कारण भी ज्यादा मूवमेंट नहीं कर सका था।

कमरे में बरामद हुए विस्फोटक, असलहे व कारतूस
सुभाष के कमरे से पुलिस ने चार बड़े सुतली बम तार लगे हुए, चार सुतली बम छोटे, चार बने हुए दैमार बम, पांच किलो के सिलिंडर के ऊपरी हिस्से को काटकर विस्फोटक से भर कर तैयार किया हुआ बम, प्लास्टिक के डिब्बे में भरा विस्फोटक, तार लगा हुआ डेटोनेटर, दो बैटरी, 315 बोर की देसी रायफल, 315 बोर का देशी तमंचा, 15 कारतूस 315 बोर के, 5 खोखे 315 बोर के बरामद किए गए।

फर्रूखाबाद की घटना के बाद सुभाष बाथम की जिलाधिकारी को लिखी गई चिट्ठी में सरकारी आवास, सरकार द्वारा बनाए जा रहे शौचालय के पैसे ना मिलने के सवाल खड़े किए गए. फर्रूखाबाद के जिलाधिकारी को लिखी गई चिट्ठी में सुभाष बाथम ने लिखा, ‘प्रार्थी ग्राम करथिया थाना मोहम्मदाबाद का रहने वाला है. प्रार्थी खेती मजदूर है और मजदूरी करके के ही बच्चों को पालता है. इसकी वजह से वह अपनी बूढ़ी मां का पालन-पोषण नहीं कर पा रहा है’.

सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए चिट्ठी में लिखा है, ‘उसके लिए कॉलोनी (घर) आई थी, लेकिन प्रधान ने उसे देने से मना कर दिया. अभी तक शौचालय नहीं बना है, खुले में ही शौच करने जाना पड़ता है. इसको लेकर कई बार ग्राम प्रधान को शिकायत की गई, लेकिन ना तो कोई राशि मिली और ना ही शौचालय बनाया गया.’ सुभाष बाथम ने चिट्ठी में लिखा कि वह कई बार सेक्रेटरी, अधिकारियों से बात कर चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ’.

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