सुपेबेड़ा के हालात पर वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने कहा- रिसर्च रखना होगा आगे भी जारी…. विचार-विमर्श सवाल-जवाब के साथ भू-गर्भीय परिस्थिति एवं वायु प्रदूषण के बिन्दु रखे गए

गरियाबंद 15 जनवरी 2020। सुपेबेड़ा के पानी पर अभी रिसर्च जारी रहेगा…. सुपेबेड़ा के हालात को लेकर बुधवार को वर्कशाप आयोजित किया गया, जिसमें अलग-अलग विभाग के विशेषज्ञ मौजूद थे। वर्कशाप के दौरान विशेषज्ञों से सुझाव तो आये ही, अध्ययन के जरिये अब तक के परिणामों पर भी चर्चा की गयी। डाॅ. विवेकानंद झा प्रेसिडेंट, इंटरनेशनल एसोसियेशन आफ नेफ्रोलाजी ने कहा है कि अभी निष्कर्ष पर पहुंच पाना कठिन है। अध्ययन एवं अध्यापन जारी रखे जाने की आवश्यकता है। बीमारी में चिकित्सा विज्ञान के हिसाब से कुछ नया नहीं है। वहीं डाॅ. विजय खेर, पूर्व प्रेसिडेंट, इंडियन एसोसियेशन आफ नेफ्रोलाजी ने कहा कि, जागरूकता अभियान के लिए जोर लगाना जरूरी है।
सुपेबेड़ा में किडनी के मरीजों से 14 जनवरी को हुई मुलाकात व स्थानीय चिकित्सकों के सभी तरह के तथ्यों को खंगालने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल ने यह माना कि, यह समस्या सुपेबेड़ा बस में नहीं राज्य के अन्य जगहों पर भी हो सकती है। उन्होंने आंध्रा एक गांव श्रीकाकुलम का उदाहरण भी दिया एम्स के नेफ्रोलाजिस्ट डाॅ. विनय राठौर की केस स्टडी से यह बात समाने आई। उड़ीसा के बलांगीर और कालाहांडी में भी किडनी की इस तरह की समस्या पाई गई है।
डाॅ. विवेकानंद झा ने कहा की बीमारी में चिकित्सा विज्ञान के हिसाब से कुछ नया नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होेंने कहा कि, पेन किलर एन्टीबाॅयोटिक दवाइयों के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए जागरूकता अभियान आवश्यक है। पूरे देश में इस दिशा में काम भी चल रहा है। डाॅ. विजय खेर ने जागरूकता अभियान के लिए जोर लगाने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री की सलाह महत्वपूर्ण
डाॅ. खरे व डाॅ. झा ने दिनांक 14 जनवरी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से हुई मुलाकात एवं उनकी सलाह को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री बघेल ने सिविल सोसाइटी को जोड़कर अभियान को आगे बढ़ाने की बात कही है।
पब्लिक सेक्टर चिंतित- निहारिका बारिक
सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग निहारिका बारिक ने कहा की पब्लिक सेक्टर भी इन सारी बातों को लेकर चिंतित है। दो दिवसीय कार्यशाला के बाद हम आश्वस्त हैं कि, अभी सब कुछ अच्छा नहीं है, लेकिन अब हम कुछ अच्छा कर ही लेंगे। हमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की जरूरत हर कदम पर पडे़गी। उड़िसा बाॅर्डर में स्थित सुपेबेड़ा में मिलने वाली प्रतिबंधित दवाईयां भी एक बड़ी समस्या है। इसके लिए हमने उड़िसा शासन से संपर्क भी किया है। उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सकों से एक ड्रग लिस्ट भी मांगी। जिसे पीएचसी एवं सीएचसी स्तर पर उपलब्ध कराने की बात कही। निजी अस्पतालों की सीएमई में शासकीय सलाह में मदद पर विचार करने का आश्वासन दिया। सुश्री बारिक ने कहा ने कि, किडनी के चलने वाले लंबे उपचार के लिए हमारा राज्य प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सुपेबेड़ा में डाॅक्टरों की कमी को दूर करने में निजी चिकित्सकों की मदद मिल रही है और आगे भी यह मदद मिलती रहेगी, ऐसी अपेक्षा है। उन्होेंने चिरायु दल के लिए भी आईसीएमआर से टिप्स मांगे है। कार्यक्रम सुश्री बारिक के स्वागत भाषण से शुरू हुआ।
सभी चिकित्सकों ने रखी अपनी बात
संचालक चिकित्सा शिक्षा डाॅ.एस.एल आदिले ने भी अपने पक्ष को रखा। आज हुई इस कार्यशाला में डाॅ. प्रभास चैधरी, डाॅ. संजीव काले, डाॅ. विनय राठौर एम्स, डाॅ. अभिरूची कम्युनिटी मेडिसीन मेकाहारा, डाॅ. प्रवण चैधरी नेफ्रोलाजिस्ट, डाॅ. आर.के. साहू. नेफ्रोलाजिस्ट डीकेएस हाॅस्पिटल, डाॅ. सुनील धर्मानी नेफ्रोलाजी, डाॅ. सुमित चैधरी नेफ्रोलाजिस्ट, डाॅ. साईनाथ पत्तेवार नेफ्रोलाजी, डाॅ. सुभा दुबे नेफ्रोलाजी ने पूरी परिस्थितियों पर अपना-अपना पक्ष रखा। चिकित्सा शिक्षा विभाग के डाॅ. निर्मल वर्मा भी कार्यक्रम मौजूद रहे।
भू-गर्भीय शास्त्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के वैज्ञानिक भी रहे मौजूद
भू-गर्भीय शास़्त्री डाॅ. निनाद बोधनकर ने सुपेबेड़ा की भू-गर्भीय परिस्थितियों पर अपना पक्ष रखा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के श्री कोसरिया भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और सभी पक्षों को सुना।
