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ये दाग अच्छे हैं: मिट्‌टी के सूक्ष्म जीव स्वास्थ्य के लिए बेहतर, इसलिए बच्चों को न रोकें, जानें क्या हैं फायदे

ये दाग अच्छे हैं: मिट्‌टी के सूक्ष्म जीव स्वास्थ्य के लिए बेहतर, इसलिए बच्चों को न रोकें, जानें क्या हैं फायदे
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By NPG News

NPG डेस्क। क्या कभी आपने यह गौर किया है कि शहरी बच्चों के बजाय गांव के बच्चों के माता-पिता हाइजिन को लेकर लापरवाह होते हैं, फिर भी गांव-देहात में पैदा हुए बच्चे ज्यादा स्वस्थ होते हैं, जबकि शहरी बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। शहरी माता-पिता बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर इतनी चिंता करने के बाद भी प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखने के बजाय अस्पताल और डॉक्टरों पर निर्भर होते हैं। यदि आप इस बात से सहमत हैं तो आज से बच्चों को मिट्‌टी में खेलने से रोकना बंद करें, क्योंकि ये दाग अच्छे हैं।

इटली के पलेर्मो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि मिट्‌टी या रेत में जो सूक्ष्म जीव यानी माइक्रो ऑर्गेनिज्म होते हैं, वे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। इससे बच्चों की इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। यहां तक कि एलर्जी और दमा जैसी बीमारियों की आशंका भी कम हो जाती है। मिट्‌टी में खेलने से तनाव या चिंता से भी दूर रहते हैं।

शोधकर्ता एलेसिया फ्रैंको और डेविड रैबसन के मुताबिक प्राकृतिक माहौल में आजादी से रहना और घूमना-फिरना बच्चों को बीमारियों के खिलाफ लड़ने के लिए ज्यादा मजबूत बनाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक मिट्‌टी, कीचड़ या रेत बच्चों की ज्ञानेंद्रियों का विकास करती हैं। यह एक तरह की थैरेपी है, जो न केवल बीमारियों का इलाज करती हैं, बल्कि बच्चों को बीमार होने से रोकती भी हैं। ये बातें भी सामने आई हैं कि समुद्र, नदी, झील के आसपास और जंगल, बाग-बगीचों व हरियाली में ज्यादा समय गुजारने वाले बच्चे बड़े होकर बेहतर इंसान बनते हैं।

बचपन प्रकृति के बीच तो जवानी अच्छी

शोधकर्ताओं ने यूरोप के 14 देशों के साथ-साथ हॉन्गकॉन्ग, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कैलिफोर्निया के 15 हजार लोगों पर सर्वे किया। इनमें यह बात सामने आई कि 16 साल तक की उम्र का समय समुद्र या हरियाली के बीच जिन लोगों ने गुजारा था, वे प्रकृति के प्रति ज्यादा लगाव रखने हैं। ऐसे लोग मानसिक रूप से मजबूत होते हैं। जवानी में भी वे ऐसी जगहों पर जाना चाहते हैं। शोधकर्ता फ्रैंको और रैबसन के मुताबिक जिस तरह पहाड़ या समुद्र की यात्रा दिलो-दिमाग को तरोताजा कर देती हैं। हम ज्यादा ऊर्जावान महसूस करते हैं, उसी तरीके से प्राकृतिक जगहें दिमाग को रिचार्ज करती हैं।

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