ससुराल में दामाद की जमकर पिटाई: प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित युवक ससुराल से भाग कर पहुंचा अपने घर... तो पत्नी ने ससुराल वालों पर ही लगा दिया पति के अपहरण का केस...

बिलासपुर 26 अक्टूबर 2021। हाइकोर्ट में आज एक अजीबो गरीब मामले की सुनवाई हुई,जिसमे पिछले वर्ष शादी होने के बाद घरजमाई बन कर रह रहे युवक ने ससुराल वालों की प्रताड़ना के चलते अपने घर वापसी कर ली थी। इसके बाद युवक की पत्नी ने उल्टा अपने ससुराल वालों पर ही पति के अपहरण कर लिये जाने का आरोप लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी। आज इसी मामले को लेकर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पत्नी को जम कर फटकार लगा दी हैं।
जानकारी के मुताबिक, शुभम विहार निवासी 35 वर्षीय अमित पांडेय का विवाह 19 मई 2020 को गौरी गणेश कालोनी निवासी आस्था पांडेय से हुई थी। अमित पांडेय को अपने पिता की जगह अनुकम्पा नियुक्ति मिली हैं और वह वर्तमान में रामदुलारे स्कूल सरकंडा में क्लर्क के पद पर पदस्थ हैं। अनुकम्पा नियुक्ति मिलने की वजह से अमित पांडेय पर माँ व दो छोटे बेरोजगार भाइयों की भी जवाबदारी थी। पीड़ित का आरोप है कि, उसकी पत्नी आस्था को भाई व माँ की जवाबदारी उठाना पसंद नहीं था, जिसके चलते वह अपने पति को ले कर अपने मायके चली गई और वहीँ दोनों रहने लगे। इस दौरान आस्था पांडेय व उसके घरवालों के द्वारा अमित पांडेय को अपनी माँ और भाई से बात नहीं करने दिया जाता था। माँ व भाई से किसी भी तरह का सम्बंध रखने पर आत्महत्या की धमकी दी जाती थी। यही नही अमित के वेतन के सारे पैसे भी ससुराल वाले रख लिए करते थे। साथ ही छोटी छोटी बातों पर उससे ससुराल पक्ष के द्वारा मारपीट की जाती थी। इस मामले को लेकर उसने अपनी पत्नी और ससुराल वालों के खिलाफ 12 अक्टूबर को सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत भी की थी। आवेदन में अमित ने पुलिस को बताया कि मुझे व मेरे घर वालो को मेरे ससुराल वालों से जान का खतरा है। इससे पूर्व भी मेरे माताजी के साथ घर घुस कर मेरे ससुराल वालों द्वारा मारपीट की गई थी।
वहीँ ससुराल से भाग कर अपने घर आने से नाराज पत्नी ने अपने पति के अपहरण की रिपोर्ट सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई थी। इधर अपहरण की शिकायत मिलने के बाद एसपी दीपक झा ने सिविल लाइन टीआई को जल्द से जल्द अमित पांडेय को बरामद कर उसके बयान लेने के निर्देश दिये थे। एसपी के आदेश के बाद अमित की तलाश कर उसका बयान लिया गया। जिसमे उसने स्प्ष्ट बताया कि वह अपनी मर्जी से ही अपने घरवालों के साथ रहने आया है और आगे भी उन्हीं के साथ रहना चाहता हैं।
पति की इस बात से गुस्साई पत्नी ने हाइकोर्ट में भी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगा दी। पत्नी ने अपनी याचिका में बताया कि, उसकी सास व देवर ने उसके पति का अपहरण कर अपने घर ले गए है। याचिका में बताया गया था कि मेरे पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, जिसका फायदा उठा कर उन्हें ससुराल वालों द्वारा बंधक बना लिया गया हैं। मामले में चीफ जस्टिस की बैंच ने बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को आस्था पांडेय के पति अमित पांडेय को अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिये थे।
आज हुई सुनवाई
आज बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में चीफ जस्टिस अरूप गोस्वामी व जस्टिस संजय के अग्रवाल की डिवीजन बैंच में सुनवाई हुई। हाइकोर्ट के द्वारा पति को आज पेश करने के आदेश चलते सिविल लाइन टीआई सनिप रात्रे आज युवती के पति अमित पांडेय को ले कर आये। जहां कोर्ट में अमित पांडेय ने बताया कि, वो किसी के दबाव के चलते नहीं बल्कि अपनी स्वयं के मर्जी से अपनी माँ व भाइयों के पास रह रहा है। आगे वो अपने ससुराल में न रहकर अपने घर मे ही रहना चाहता हूँ। याचिका में मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की बात कहे जाने के मद्देनजर अदालत ने सत्यता परखने की दृष्टि से अमित पांडेय से कई सवाल किये, जिसका अमित पांडेय द्वारा सटीक व सहीं जवाब दिया गया। जवाब सुन कर युवक के मानसिक रूप से स्वस्थ्य होने की पुष्टि अदालत को हो गई।
युवक अमित पांडेय के बयान के बाद सारी स्थितियां कोर्ट के समक्ष स्प्ष्ट हो गई। वहीँ पीड़ित की पत्नी आस्था पांडेय के अधिवक्ता के द्वारा अमित पांडेय के वेतन का अधिकतर हिस्सा घर किश्त में जाने समेत कई घरेलू मुद्दों को उठाया जाने लगा। इस बात से नाराज कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि "दिस इज नॉट ए फैमली कोर्ट"( अर्थात यह परिवार न्यायालय नही है)। यहां जो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगी थी, उसमे युवक के बयान के बाद अदालत के समक्ष स्थितियां स्प्ष्ट हो चुकी हैं। ये फैमली कोर्ट नही है, लिहाजा फैमली से जुड़े मैटर बता कर अदालत का कीमती समय नष्ट न किया जाए। याचिकाकर्ता महिला ने अपने पति से कोर्ट रूम में थोड़ी देर बात करने की अनुमति माँगी, जिस पर अदालत द्वारा उसके पति अमित पांडेय की इक्षा पूछी गयी। अमित पांडेय द्वारा अपनी पत्नी से बात करने से साफ तौर पर इंकार कर दिया गया। जिसके बाद अदालत ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके साथ ही याचिका निराकृत कर दी गई।
