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दिवाली खराब नहीं

छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी और राजनीति पर केंद्रित वरिष्ठ पत्रकार संजय दीक्षित का लोकप्रिय साप्ताहिक स्तंभ तरकश

दिवाली खराब नहीं
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तरकश, 31 अक्टूबर 2021

संजय के दीक्षित

कलेक्टर, एसपी कांफ्रेंस के बाद एक ट्रांसफर लिस्ट निकलने की चर्चा थी। मगर आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव के चलते सरकार ने इसे आगे बढ़ा दिया। अब सुनने में आ रहा कि सरकार किसी कलेटर, एसपी के परिवार की दिवाली खराब नहीं करना चाहती। इसलिए, लिस्ट अब दिवाली के बाद निकाली जाएगी। सरकार कितना भी उदारता दिखला लें, जिन चार-पांच अफसरों के नाम हटने वालों में चर्चा में हैं, उनकी दिवाली पहले जैसी थोड़े ही रहेगी। ठेकेदार, सप्लायर बेहद चालाक होते हैं। दिवाली की की लेन-देन में वे डंडी मार ही देते हैं।

कागजों में सीनियर

यह पहला मौका होगा, जब पीएससी ने महीने भर की आड़ में दो मेंस परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है। पीएससी-2019 का सितंबर में और पीएससी-2020 का 29 अक्टूबर को। अब ऐसा क्यों हुआ, कोरोना से लेकर अलग-अलग कारण गिनाए जा सकते हैं। मगर पते की बात यह है कि कोरोना के बाद भी नीट और यूपीएससी के एग्जाम हुए और उसके रिजल्ट भी जारी हुए। किसी का सेशन बेकार नहीं हुआ। बहरहाल, एक महीने के अंतराल में दो रिजल्ट घोषित होने पर सबसे बड़ी दिक्कत ट्रेनिंग और सीनियरिटी की आएगी। डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी के दोनों बैच एक साथ ट्रेनिंग करेंगे तो निश्चित तौर पर 2020 बैच वालों के मन में कसक तो रहेगी। उपर से सरकार के समक्ष पोस्टिंग का संकट भी। एक साल इतने सारे डीसी और डीएसपी की पोस्टिंग भी तो देनी होगी।

गीता को एनओसी

97 बैच की छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस एम गीता को भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति के लिए राज्य सरकार ने एनओसी दे दिया है। खबर है, जल्द ही उन्हें केंद्र में पोस्टिंग मिल जाएगी। वैसे अभी भी वे डेपुटेशन टाईप की ही पोस्टिंग में हैं। सरकार ने उन्हें हाल ही में दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर बनाया है। याने हैं तो वे दिल्ली में ही। भारत सरकार में पोस्टिंग के बाद फर्क यही आएगा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लेवल हट जाएगा।

सीएम की घोषणा

छत्तीसगढ़ के चर्चित सोमानी अपहरण कांड में उद्योगपति को सुरक्षित रिहा कराने वाली पुलिस पार्टी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीएम हाउस बुलाकर उनकी पीठ थपथपाई थी। उन्होंने शाबासी के तौर पर एक इंक्रीमेंट देने का भी ऐलान किया था। ये बात जनवरी 2020 की है। अब मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल करने, कराने का काम तो विभाग का होता है। मगर दो साल होने को है, पुलिस अधिकारी इंक्रीमेंट की बाट जोह रहे हैं।

ढाई साल वाले

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आईजी-एसपी कांफ्रेंस में ढाई साल से एक जगह पर जमे सिपाहियों से लेकर अधिकारियों तक को हटाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से सैकड़ों जवानों और अधिकारियों की फेमिली में खुशी की लहर दौड़ गई है। दरअसल, रिमोट इलाकों में कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक कई-कई साल से फंसे हुए हैं। जो ये ऐसे लोग हैं, जिनके पास कोई जैक नहीं है। बिल्कुल सीधे-साधे। खटराल लोग तो रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग से हिलते नहीं। हालांकि, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आईजी, एसपी को कम-से-कम अपने लेवल वाले ट्रांसफर शुरू कर ही देना था।

फंस गया पेंच

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यकाल एक नवंबर को समाप्त हो जाएगा। नया कुलपति अपाइंट करने के लिए सर्च कमेटी ने जो पैनल राजभवन को दिया था, उनमें से कोई नाम राज्यपाल अनसुईया उइके को नहीं जंचा। राज्यपाल ने कमेटी को और नाम देने के लिए कहा है। तब तक यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर टीचिंग डॉ0 एसएस सेंगर को प्रभाारी कुलपति नियुक्त कर दिया है। तब तक नए कुलपति की तलाश जारी रहेगी। हालांकि, ये पहली बार हुआ है। इससे पहिले परंपरा रही है, विवि के किसी कुलपति को हटाया जाता था या कार्यकाल खतम होता था तो संभागायुक्त को चार्ज सौंपा जाता था। मगर अब ये परंपरा टूटी है और सूबे के विश्वविद्यालयों के सीनियर फैकल्टी इससे खुश होंगे कि अब कमिश्नर प्रभारी कुलपति नहीं बनेंगे।

नए नक्सल चीफ?

सरकार ने 96 बैच के आईपीएस विवेकानंद सिनहा को एडीजी नक्सल आपरेशन बनाया है। विवेकानंद एडीजी प्रमोट होने के बाद भी बतौर आईजी दुर्ग रेंज संभाल रहे थे। अब नई जिम्मेदारी मिलने के साथ सवाल उठता है कि डीजी नक्सल आपरेशन अशोक जुनेजा अपने पद पर बनें रहेंगे या उनके प्रभार में कोई परिवर्तन होगा। क्योंकि, नक्सल में डीजी के साथ एडीजी स्तर का अधिकारी कभी रहा नहीं। ये भी हो सकता है कि सरकार ने नक्सल आपरेशन में विवेकानंद को तैयार करना चाह रही हो। विवेकानंद काफी समय तक बस्तर के आईजी रहे हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. छत्तीसगढ़ सरकार के एक मंत्री को उनके परिवार, रिश्तेदार वाले मिठलबरा मंत्री क्यों कहते हैं?

2. सिस्टम में ये विरोधाभास क्यों है कि आबकारी विभाग शराब बेचता है और नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए समाज कल्याण को पैसा भी देता है?

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