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सरगुजा विश्वविद्यालय में दो कुलपति!..हाईकोर्ट के आदेश के बाद ज्वाइन करने पहुंचे डॉ. रोहिणी प्रसाद तो प्रो. अशोक सिंह चाबी लेकर गायब

सरगुजा विश्वविद्यालय में दो कुलपति!..हाईकोर्ट के आदेश के बाद ज्वाइन करने पहुंचे डॉ. रोहिणी प्रसाद तो प्रो. अशोक सिंह चाबी लेकर गायब
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रायपुर। सरगुजा स्थित संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय में अजीबोगरीब स्थिति बनी, जब कुलपति प्रो. अशोक सिंह के रहते डॉ. रोहिणी प्रसाद कुलपति के रूप में ज्वाइनिंग देने पहुंचे। उन्होंने बाकायदा हाईकोर्ट का आदेश दिखाकर एकतरफा ज्वाइनिंग ली, जबकि प्रो. अशोक सिंह कुलपति के कक्ष की चाबी लेकर चले गए। डॉ. रोहिणी प्रसाद ने कहा है कि उन्होंने ज्वाइनिंग दे दी है। कक्ष के संबंध में व्यवस्था कुलसचिव को करनी है।

दरअसल, पूरा मामला पूर्व व वर्तमान सरकार में कुलपतियों की नियुक्ति से जुड़ा है। डॉ. रोहिणी प्रसाद की नियुक्ति बीजेपी सरकार में हुई थी। उनका कार्यकाल जुलाई 2022 तक था, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें हटा दिया। डॉ. रोहिणी प्रसाद ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इधर, राज्य सरकार ने 2 अगस्त 2021 को प्रो. अशोक सिंह को कुलपति बनाने का आदेश दे दिया। हालांकि आदेश में यह भी लिखा गया था कि उनकी नियुक्ति का आदेश हाईकोर्ट में दायर याचिका के फैसले के अधीन होगी। इस संबंध में 6 जून को हाईकोर्ट के जस्टिस पी. सैम कोशी ने डॉ. रोहिणी प्रसाद के पक्ष में फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद ही वे कुलपति के रूप में ज्वाइन करने के लिए मंगलवार को विश्वविद्यालय पहुंचे थे, लेकिन प्रो. अशोक सिंह पहले ही कुलपति के कक्ष में ताला लगाकर चले गए थे।


ओबीसी आयोग के अध्यक्ष के मामले में भी बनी थी ऐसी स्थिति

इससे पहले ओबीसी आयोग के अध्यक्ष के मामले में ऐसी स्थिति बनी थी। भाजपा शासन में सियाराम साहू ओबीसी आयोग के अध्यक्ष थे। उन्हें हटाकर कांग्रेस सरकार ने थानेश्वर साहू को अध्यक्ष बना दिया था। सियाराम साहू का एक साल का कार्यकाल बचा था। इसे आधार बनाकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट से केस जीतकर जब वे आयोग के दफ्तर पहुंचे, तब पता चला कि अध्यक्ष के कक्ष में ताला लगा है और चाबी अध्यक्ष के पास है। हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर सियाराम साहू ने फिर से कार्यभार संभाल लिया। कक्ष का ताला नहीं खुलने पर उन्होंने जमीन पर बैठकर मामलों की सुनवाई की थी।

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