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खारकीव से लौटी रिया अदिति, कहा- मौत का न भूलने वाला मंजर जिंदगी भर याद रहेगा

खारकीव से लौटी रिया अदिति, कहा- मौत का न भूलने वाला मंजर जिंदगी भर याद रहेगा
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By NPG News

बिलासपुर 4 मार्च 2022। यूक्रेन व रसिया के युद्ध मे फंसी मेडिकल छात्रा रिया अदिति ने वापस आज बिलासपुर पहुँची। रिया अदिति ने कहा कि वहां के मौत का वो मंजर जिंदगी भर न भूलने वाला था। रिया अदिति ने खारकीव से लौट कर कहा कि वहाँ जीना खाना सोना सब मुश्किल हो गया था। यहां घर पहुँच कर अब अच्छा लग रहा हैं।

बिलासपुर की रिया अदिति लदेर वर्ष 2016 में यूक्रेन गयी हुई थी। वहां के खारकीव में रिया मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं हैं। रिया के पिता स्वर्गवासी हो चुके हैं व माता छतौना शासकीय स्कूल में शिक्षिका हैं। रिया का एक भाई 12 वी कक्षा का छात्र हैं। रिया की मात्र दो महीने की ही पढ़ाई बची थी।


रिया बताती हैं कि 20 फरवरी तक कैम्पस में जाकर पढ़ाई करने के बाद ऑनलाइन क्लास शुरू हो गयी थी। 24 फरवरी को सुबह अचानक 5 बजकर 11 मिनट पर पहला धमाका हुआ,तब हम लोगो को बताया गया कि यूक्रेनी सेना युद्धाभ्यास कर रही है। पर कुछ घण्टो बाद लगातार बम बारी शुरू हो गयी। तब हम लोगो के पास फ्लैट से निकलने का मैसेज आया और दोपहर दो बजे हम लोगो ने फ्लैट छोड़ दिया। सभी मेट्रो स्टेशन आ गए। वहां का मेट्रो स्टेशन जमीन के निचे होता हैं जहां हम लोग सुरक्षित थे।

24 व 25 को रिया व उसके साथी मेट्रो में रहे फिर 25 की रात से लेकर 28 तक बंकर में आ कर छुपे रहे। उनके बंकर के पास ही उनका फ्लैट था। इस दौरान लगातार शहर में बमबारी व गोलीबारी होती रही। रिया बताती हैं कि जब थोड़ी देर के लिए गोलाबारी व बमबारी रुकती थी इस दौरान फ्लैट आते थे और फ्रेश होना मोबाईल चार्जिंग करने के अलावा जल्दी बन जाये एसा कुछ स्नैक्स बना कर खाने के लिये ले जाते थे।

रिया के अनुसार फिर वहां खाने पीने की चीजें भी खत्म हो गयी थी। वहां कर्फ्यू लगे होने के कारण दुकाने खुलती नही थी और जब खुलती भी थी तो वहां खाने पीने की सारी चीजें खत्म हो गयी थी। यहां तक कि पानी मिलना भी दूभर हो चुका था। हम पानी की जगह जूस पीते थे। जो भी चीजे मिल रही थी काफी महंगे दामों पर। पर एटीएम व बैंकों में भी पैसे खत्म हो चुके थे जिसकी वजह से खातों में रकम रहने के बाद भी हम रकम नही निकाल पाते थे। रिया बताती हैं कि बंकर में नेटवर्क नही रहता था। जब थोड़ी देर के लिये गोलीबारी रुकती थी तब हम लोग बंकर से बाहर आकर घरवालों को मैसेज कर पाते थे। तब मेरी मां मुझे ईश्वर पर विश्वास व भरोसा दिलाते हुए कहती थी कि यदि खाने व पीने की दिक्कत है तो भगवान से प्रार्थना करो कि हमें ज्यादा भूख प्यास ही न लगे।

28 तारिख को जब ज्यादा ब्लास्ट होने लगा तो हम लोगो ने दोपहर दो बजे तक बंकर छोड़ दिया। और मेट्रो स्टेशन पहुँच गए। वहां बहुत भीड़ थी लिहाजा 3 ट्रेनें मिस हो गयी। रिया के अनुसार यूक्रेनी सैनिक भारतीय बच्चो से मारपीट भी कर रहे थे। चूंकि यूक्रेनी नागरिक भी यूक्रेन छोड़ कर निकल रहे हैं लिहाजा यूक्रेनी सेना की प्राथमिकता पहले उनको बाहर निकालने की थी। इसलिए भारतीय छात्रो से मारपीट करके पहले वो यूक्रेनी नागरिकों को बाहर भेज रहे थे। 22 घण्टे की यात्रा करके लिबिब पहुँचे। लिबिब से टैक्सी में चौप गए। चौप यूक्रेन का लास्ट बार्डर हैं। वहां 12 घण्टे लाइन में लग कर टिकट व इमिग्रेशन लिया। फिर बस से जूनी आये। जूनी हंगरी का फर्स्ट बार्डर है। जूनी में इंडियन एमबेंसी ने हमे रिसीव किया और बस से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट लाया गया। जहां हमे इंडियन एमबेंसी ने होटल में ठहराया। बुड्ढा पेस्ट से फ्लाइट से हम लोग दिल्ली आये, रास्ते मे फ्लाइट टर्की के इस्ताम्बुल मे एक घण्टे के लिये रोकी गयी फिर हम दिल्ली पहुँचे। दिल्ली मे छतीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों ने हमे रिसीव करके छतीसगढ़ भवन पहुँचाया,जहां खाना खाने व दो से तीन घण्टे आराम करने के बाद छतीसगढ़ सरकार की व्यवस्था में फ्लाइट से रायपुर पहुँचे।

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