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छत्तीसगढ़ की पूजा सिंघल...

छत्तीसगढ़ की पूजा सिंघल...
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संजय के. दीक्षित

तरकश, 8 मई 2022। पड़ोस के झारखंड में ईडी ने आईएएस पूजा सिंघल के आधा दर्जन ठिकानों पर दबिश दी...और इसमें जो आउटकॉम निकला, पूरा देश सन्न है। पूजा के घर 25 करोड़ कैश मिला। सीए के पास भी 17 करोड़। सवाल ये नहीं कि महिला आईएएस के पास नोटों का जखीरा आया कहां से। प्रश्न यह है आईएएस की नौकरी सिर्फ पैसा बटोरने के लिए रह गई है। छत्तीसगढ़ में भी 20 साल में कुछ अलग नहीं हुआ। कई आईएएस, आईपीएस दो-दो, तीन- तीन सौ के आसामी बन गए। सरकार रिकार्ड सर्च करा ले, रायपुर के आसपास 50 परसेंट लैंड नौकरशाहों के नाते-रिश्तेदारों या नौकर-चौकर के नाम मिलेंगे। इनमें महिला आईएएस भी पीछे नहीं। ठीक है...यूपीएससी कठिन परीक्षा होती है। इतना परिश्रम करके सर्वोच्च नौकरी मिली है तो औरों से ज्यादा बनता है। मगर आखिर कितना। सेल्फ लिमिट तय नहीं करेंगे तो पूजा सिंघल जैसा ही होगा। अब पहले जैसा नहीं है। इंकम टैक्स वाले आईएएस का लिहाज करते थे। मगर अब ईडी का युग है...पैसे की भूख को कंट्रोल करें।

खतरे का अलार्म

अभी तक रिश्वत मांगते या लेते कोई वीडियो वायरल होता था तो संज्ञान में नहीं आता था। मगर मुंगेली में पटवारी का वीडियो वायरल होने के बाद एसीबी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्ट अफसरों के लिए ये अलार्म है। अब आम आदमी भी मोबाइल से वीडियो बनाकर वायरल कर दिया तो सलाखों के अंदर समझिए। दरअसल, भ्रष्टाचार अधिनियम में प्रावधान है कि वायरल वीडियो पर भी कार्रवाई हो सकती है।

चाकलेटी अफसर और...

जमीनी हकीकत देखने सूबे के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री के साथ कई अधिकारी भी चल रहे हैं...जिले के कलेक्टर, एसपी भी। ज्यादातर अधिकारी इनमें ऐसे हैं, जहां जाते हैं, उनके लिए फुल इंतजाम रहता है... पूरा वातानुकूलित सिस्टम। मगर अभी ये दिन...43 डिग्री टेम्पेरेचर में जब सूरज आग उगल रहा, अधिकारियों को मुख्यमंत्री के साथ दौड़ना-भागना पड़ रहा है। सीएम को धूप हो या बरसात कोई फर्क नहीं पड़ना। मगर चकलेटी अफसरों की तकलीफें समझी जा सकती है।

बारिश से उम्मीद

मुख्यमंत्री जिस अंदाज में दौरे कर रहे हैं, उससे कलेक्टरों को पसीना छूट रहा है। बलरामपुर में और सूरजपुर में चार दिन से जो चल रहा, उससे कलेक्टरों को अपनी कुर्सी खिसकती प्रतीत हो रही। वरुणदेव से वे प्रार्थना कर रहे...हे भगवन! बारिश करा दो...सीएम साहब का उड़नखटोला गांवों में उतर ही न सकें। दरअसल, सीएम के इस अंदाज की कलेक्टरों ने कल्पना नहीं की थी। उन्हें लगा सरकारी तौर-तरीकों से जैसे चौपाल लगाए जाते हैं, सीएम उसी तरह का कुछ करेंगे। लेकिन, सीएम आम लोगों से सीधे लगे बात करने।

आराम के दिन गयो रे

मुख्यमंत्री के तेवर को देखते लग रहा, कलेक्टरों के अब चैन के दिन चले गए। अगले चुनाव तक उन पर तलवार लटकी रहेगी। कलेक्टरों ने भी मान लिया है कि अब आराम के दिन चले गए। अब एसी कमरों से निकलकर लोगों के बीच जाना होगा। राशन कार्ड से लेकर तमाम योजनाओं का ईमानदारी से रिव्यू करना होगा। वरना, भरी सभा में भद पिटेगी और कोई आश्चर्य नहीं कि कुर्सी भी चली जाए।

ग्रह-नक्षत्र का खेल

सूरजपुर के डीएफओ मनीष कश्यप सस्ते में आउट हो गए। मनीष इससे पहले मनीष भानुप्रतापपुर के डीएफओ थे। बड़ी मशक्कत कर दो महीने पहिले सूरजपुर पहुंचे। लेकिन, ग्रह-नक्षत्र का खेल कहिए...गोठान के कार्यों में लापरवाही में निबट गए। हालांकि, उनके सस्पेंशन पर घंटे भर तक सस्पेंस बना रहा। सूरजपुर से लेकर रायपुर तक फोन घनघनाता रहा। अंत में फायनल हुआ, मनीष कश्यप भी सस्पेंड होंगे और उनसे पहले के प्रभारी डीएफओ बीएस भगत भी।

कुछ पूजा-पाठ भी

रायपुर विकास प्राधिकरण में कोई सीईओ टिक नहीं पा रहा है। 2019 से लेकर अभी तक छह सीईओ पोस्ट हो चुके हैं। इनमें से अय्याज तंबोली को छोड़ दें तो चार सीईओ चार महीने में खो कर दिए गए या कलेक्टर बनकर चले गए। जुलाई 2019 से लेकर अभी तक की बात करें तो प्रभात मलिक से लेकर भीम सिंह, ऋतुराज रघुवंशी, अभिजीत सिंह मुश्किल से चार महीना पूरा कर पाए। अभिजीत सिंह इसी साल 15 जनवरी को सीईओ अपाइंट किए गए और 15 अप्रैल को विदा हो गए। अब 2017 बैच के आईएएस चंद्रकांत वर्मा नए सीईओ बनाए गए हैं। चंद्रकांत को आरडीए में किसी अच्छे पंडित से पूजा-पाठ कराना चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. सीएम के दौरे में किसी कलेक्टर, एसपी का भी विकेट गिरेगा?

2. क्या एक महिला कलेक्टर की इंट्री होगी और एक की छुट्टी?

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