Begin typing your search above and press return to search.

मास्टरस्ट्रोक: नए जिले की घोषणा ने बदला खैरागढ़ उपचुनाव का समीकरण, बना मुख्य मुद्दा, सोशल मीडिया पर काउंटडाउन भी चला रहे

मास्टरस्ट्रोक: नए जिले की घोषणा ने बदला खैरागढ़ उपचुनाव का समीकरण, बना मुख्य मुद्दा, सोशल मीडिया पर काउंटडाउन भी चला रहे
X
By NPG News

खैरागढ़/रायपुर, 11 अप्रैल 2022। छत्तीसगढ़ में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद चौथी बार हो रहे उपचुनाव के लिए 12 अप्रैल यानी कल वोटिंग होगी। यह ऐसा उपचुनाव है, जिसमें चुनाव के ऐलान और प्रत्याशियों की घोषणा के बाद भाजपा को मजबूत माना गया, लेकिन सीएम भूपेश बघेल द्वारा खैरागढ़ छुईखदान गंडई को जिला बनाने के ऐलान के बाद समीकरण बदल गया। अब तो ये आलम है कि कांग्रेस जिला बनने का काउंटडाउन दिखा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 16 अप्रैल को कांग्रेस का विधायक जीतेगा और 17 अप्रैल को खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिला बनेगा। छत्तीसगढ़ में कोटा उपचुनाव को छोड़ दें तो सभी उपचुनावों में जिसकी सत्ता रही है, उसी की जीत हुई है। पिछले तीन उपचुनावों दंतेवाड़ा, चित्रकोट और मरवाही में यही ट्रेंड रहा। खैरागढ़ में अभी भी मामला टक्कर का और रोमांचक बना हुआ है। यही वजह है कि चुनाव प्रचार थमने के एक दिन पहले तक मुख्यमंत्री बघेल डटे रहे। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, पीएचई मंत्री गुरु रुद्र कुमार और नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया के साथ पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम और गिरीश देवांगन एक-एक क्षेत्र संभाल रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने अपने शीर्ष नेतृत्व को लगा रखा है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत, केदार कश्यप, शिवरतन शर्मा एक-एक बूथ संभाल रहे हैं। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और संगठन महामंत्री पवन साय सुपरविजन कर रहे हैं। जोगी कांग्रेस से अमित जोगी चुनाव प्रचार में हैं।

इस तरह शह-मात का खेल, कभी लोधी कार्ड चला तो कभी राज परिवार का प्रभाव

छत्तीसगढ़ बनने के बाद खैरागढ़ में छठवीं बार चुनाव होने जा रहा है। 2003 में जब पहला चुनाव हुआ, तब कांग्रेस से देवव्रत सिंह और भाजपा से सिद्धार्थ सिंह उम्मीदवार थे। इस चुनाव में देवव्रत 17907 यानी लगभग 18 हजार वोटों से जीते। इसके बाद 2007 में भाजपा सांसद प्रदीप गांधी की सदस्यता खत्म होने के बाद देवव्रत लोकसभा चुनाव लड़े और जीते थे, वहीं खैरागढ़ में खाली हुई सीट के लिए उपचुनाव हुआ। तब भाजपा ने लोधी समाज से कोमल जंघेल और कांग्रेस ने देवव्रत सिंह की पहली पत्नी पद्मा सिंह को। इसमें कोमल जीते। एक साल बाद ही 2008 में आम चुनाव हुए, तब कांग्रेस ने राज परिवार के बजाय लोधी समाज से मोतीलाल जंघेल को उतारा। भाजपा से कोमल ही प्रत्याशी थे। इस बार कोमल 19000 वोटों से जीते। 2013 में जब चुनाव हुए तब कांग्रेस ने प्रत्याशी बदल दिया और लोधी समाज से ही गिरवर जंघेल को उतारा। भाजपा से फिर कोमल थे। इस बार खैरागढ़ ने कोमल के बजाय गिरवर को चुना। कोमल करीब 2100 वोटों से हारे। 2018 में जब प्रत्याशी चयन की बारी आई तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने प्रत्याशियों को रिपीट किया। लोधी-लोधी वोट भिड़े और फायदा देवव्रत सिंह को हुआ। देवव्रत जोगी कांग्रेस के प्रत्याशी थे। हालांकि वे महज 870 वोटों से जीते। कोमल दूसरे नंबर पर रहे और गिरवर तीसरे नंबर पर पहुंच गए।

मास्टरस्ट्रोक: नए जिले की घोषणा ने बदला खैरागढ़ उपचुनाव का समीकरण, बना मुख्य मुद्दा, सोशल मीडिया पर काउंटडाउन भी चला रहे

खैरागढ़ में महिला और पुरुष वोटरों की संख्या लगभग बराबर है। एक लाख 05 हजार 250 महिलाएं हैं तो एक लाख 06 हजार 266 पुरुष वोटर हैं। खैरागढ़ को मैदानी और जंगल/पहाड़ दो हिस्से में बांट सकते हैं। मैदानी इलाका खैरागढ़, छुईखदान और गंडई है, जबकि साल्हेवारा जंगल-पहाड़ का इलाका है। जातिगत समीकरण के हिसाब से देखें तो लोधी वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं। साल्हेवारा का क्षेत्र वनवासियों का है, वहीं छुईखदान से गंडई क्षेत्र में सतनामी समाज के वोटर अधिक हैं। खैरागढ़ और छुईखदान के बीच सभी वर्ग के लोग हैं। शहरी इलाके में जिला बनने का उत्साह लोगों में है। खासकर व्यापारी और पढ़े-लिखे वर्ग के लोग कलेक्टर-एसपी ऑफिस, जिला अस्पताल और सुविधाओं की बात कर रहे हैं। सियासी प्रेक्षक भी मानते है कि नए जिले की घोषणा भूपेश बघेल का मास्टर स्ट्रोक रहा। इसका नतीजा ये रहा कि अधूरे पीएम आवास जैसे मुद्दे कुंद पड़ गए, जो चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की परेशानी के सबब बन सकते थे। लोगों को कुरेदने पर महसूस हो रहा कि नए जिले का अंडर करंट है। राजनीतिक पंडितों का कहना है, नया जिला इस चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गया है। जाहिर तौर पर इसका लाभ सत्ताधारी पार्टी को मिलेगा।

Next Story