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सामूहिक इस्तीफा: "निकम्मा" से शुरू हुई लड़ाई पहुंची इस्तीफे तक, अधिकारियों के रवैया से नाराज प्रधान पाठकों ने सौंप दिया सामूहिक इस्तीफा

सामूहिक इस्तीफा: निकम्मा से शुरू हुई लड़ाई पहुंची इस्तीफे तक, अधिकारियों के रवैया से नाराज प्रधान पाठकों ने सौंप दिया सामूहिक इस्तीफा
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बिलासपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा शिक्षकों को निकम्मा कहने पर लगी आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि कोटा के बीईओ ने कह दिया की यदि विद्यालय में सफाई कर्मचारी नहीं आ रहे हैं तो सफाई की जिम्मेदारी प्रधान पाठकों की है और सरगुजा में तो संयुक्त संचालक ने जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा भेजे गए अनुशंसा पत्र के आधार पर बच्चों से सफाई कराने के मामले में एक प्रधान पाठक को सस्पेंड भी कर दिया । अब मुंगेली जिले के डीईओ की कार्यप्रणाली से नाराज शिक्षकों ने पथरिया BEO को अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। शिक्षकों का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी राज्य सरकार के आदेश निर्देश के परे अपने मन से कई आदेश व कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं जिससे शिक्षकों में घोर नाराजगी है और वह अपने आप को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं । ऐसे भी स्कूल शिक्षा विभाग प्रयोगशाला बना हुआ है और राज्य से ही कई दर्जन आदेश जारी हो रहे हैं ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी और नए नए प्रयोग अपने मन से लाद रहे हैं जिससे शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है । जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश का पालन करवाने के लिए पथरिया विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा कहा गया था कि इन आदेशों का पालन न करने पर संपूर्ण जानकारी जवाबदारी आपकी होगी और तत्काल कार्य नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी । इस्तीफा दिए हुए प्रधान पाठकों का कहना है कि पूरी ऊर्जा से काम करने के बावजूद जिस प्रकार का व्यवहार अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है वह सही नहीं है और उनके प्रयोगों के चलते पढ़ाई हो ही नहीं पा रही है जिससे जो मूल काम है उसमें हम पिछड़ जा रहे हैं और केवल अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने के लिए ही हमारी नियुक्ति हुई है ऐसा लग रहा है इन्हीं सारे बातों का विरोध करते हुए सामूहिक इस्तीफा दिया गया है ।

इस मुद्दे पर सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक दुबे का कहना है

विभाग के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे हैं दुर्व्यवहार से क्षुब्ध प्रधान पाठकों ने अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है। प्रभारी के तौर पर प्रधान पाठक की भूमिका निभा रहे शिक्षक लगातार पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं इसके बावजूद उन्हें सम्मानित करने के बजाय उन्हें लगातार अपमानित करने की परिपाटी शुरू हो गई है जिसके विरोध में यह असहयोग आंदोलन जैसा मुहिम शुरू हुआ है । स्कूल शिक्षा विभाग में आलम यह है कि यदि सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं तो पूरे स्कूल की सफाई करने की जिम्मेदारी भी प्रधान पाठक और शिक्षकों को दी जा रही है और अधिकारियों द्वारा ऐसा बयान जारी करने के बाद खेद तक व्यक्त नहीं किया जा रहा है जो की आपत्तिजनक है और उनकी मंशा को भी स्पष्ट करता है। आने वाले समय में विरोध का बिगुल और तेज होगा ।

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