माओवादियों की मिलट्री कमीशन ने जारी किया लेखा जोखा..116 की मौत स्वीकारी..बस्तर में सर्वाधिक 78.. चार सेंट्रल कमेटी सदस्यों की भी मौत.. 68 जवानों को मारे जाने का भी दावा

रायपुर,21 नवंबर 2021। माओवादियों की मिलट्री कमीशन ने दिसंबर 2021 से सितंबर 2021 तक का लेखा जोखा पेश किया है और भविष्य को लेकर योजनाओं को लेकर संकेत दिए हैं।
माओवादियों ने दिसंबर 2020 से लेकर अक्टूबर 2021 तक के आंकडे सार्वजनिक किए हैं। इनमें 116 माओवादियों के मारे जाने की बात लिखी गई है। इन 116 में दंडकारण्य याने बस्तर में 78, बिहार झारखंड के 10,एओबी के 12,तेलंगाना के 6,ओड़िसा के 4,और एमएमसी के चार के मारे जाने का आँकड़ा दिया गया है। इनमें 34 महिलाएँ हैं।
माओवादियों ने चार सेंट्रल कमेटी सदस्यों को भी खोया है, इनमें पूर्णेंदू शेखर मुखर्जी,अक्किराजू हरगोपाल,नरेंद्र सिंह और यापा नारायण शामिल हैं।पूर्णेंदू की मौत फेफड़ों की बीमारी से जबकि अक्कि राजू हरगोपाल किडनी फेल होने की वजह से,नरेंद्र सिंह बीमारी की वजह से जबकि यापा नारायण की मौत कैसे हुई इसे लेकर कुछ नहीं लिखा गया है।
माओवादियों का दावा है कि दिसंबर 2020 से सितंबर 2021 के बीच 300 गोरिल्ला ऑपरेशन किए गए जिनमें 66 जवानों को मारा गया जबकि 85 घायल हुए।चार गोपनीय सैनिकों को भी मारा गया। माओवादियों ने चालीस की हत्या का ज़िक्र किया है जिनमें से 30 को पुलिस मुखबिर और 10 को जनविरोधी लिखा गया है। दावा यह भी है कि 15 अत्याधुनिक हथियार और हज़ारों कारतूस भी हासिल किए गए।
माओवादियों ने दंडकारण्य में 54 जवानों की हत्या और 69 को घायल करने की बात लिखी है। जीरागुडेम और कडियानार को माओवादियों ने बड़े हमले में शामिल किया है।जीरागुड़म का विशेष उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि यहाँ बटालियन की संख्या क़रीब 750 में जवान घुसे थे जिनमें से एक प्लाटून को मारा गया जबकि एक अन्य प्लाटून को घायल किया गया।
माओवादियों की सेंट्रल मिलिट्री कमिशन ने स्वीकार किया है कि, उन्हें कुछ इलाक़ों में बड़ा नुक़सान हुआ है। सीएमसी ने इसे लेकर कई कारण गिनाए हैं लेकिन दो प्रमुख कारण बताए गए हैं जिनमें गुप्त कामकाज को लागू करने में हुई गलतियां और गोरिल्ला युद्ध को सही तरीक़े से लागू करने में ख़ामियों का उल्लेख है।
बस्तर रेंज आईजी पी सुंदरराज को भी मिलट्री कमीशन के इस ब्यौरे की जानकारी है। इन आँकड़ों को लेकर उन्होंने कहा -
*"इनके बताए आंकड़े ख़ासकर माओवादियों को लेकर इसलिए ज़्यादा हो सकते हैं क्योंकि कई बार हमें शव नहीं मिलता.. हमारे रिकॉर्ड में काल्पनिक डाटा नहीं होता..हमने 20-21 में122 जबकि 21-22 में 114 मुठभेड़ की, जिनमें पिछले साल 44 जबकि इस बरस 42 माओवादी मारे गए हैं। पिछले साल शहीद जवानों की संख्या 37 थी, जबकि इस बरस यह आँकड़ा 39 है"*
रेंज आईजी पी सुंदरराज ने कहा
*"माओवादियों की सेंट्रल मिलेट्री कमीशन का यह पूरा ब्यौरा बताता है कि वे ज़बर्दस्त दबाव में है, और उन्हें बहुत ज़्यादा नुक़सान उठाना पड़ा है.. वे जो लिख रहे हैं हमारा ध्यान उस पर भी है क्योंकि मसला रणनीतिक है.. और हमें बस यह पता है कि किसी सूरत हम दबाव कम नहीं होने देंगे..विश्वास विकास सुरक्षा की त्रिवेणी असर दिखा रही है"*
