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आईपीएस के डोमन सिंह

आईपीएस के डोमन सिंह
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संजय के. दीक्षित

तरकश, 10 जुलाई 2022

मंत्रियों की मुश्किलें

राज्य सरकार ने सभी विभाग प्रमुखों को लेटर भेज तीन साल में हुए ट्रांसफर की जानकारी मांगी है। इस पत्र से हड़कंप मच गया है। दरअसल, ट्रांसफर पर बैन लगा हुआ है। सिर्फ सीएम की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति की अनुशंसा से ट्रांसफर हो सकते हैं। मगर कई मंत्रियों ने मनमानी चलाते हुए विभाग प्रमुखों के जरिये बड़ी संख्या में तबादले कर डाले। एक विभाग के बारे में जानकारी आ रही....एक हजार से अधिक ट्रांसफर बिना समन्वय के अनुमोदन के कर डाला। जीएडी के इस पत्र के बाद ऐसे मंत्रियों की बेचैनी बढ़ गई है। क्योंकि, सरकार भले कुछ न करें मगर कोई अगर कोर्ट चल दिया तो क्या होगा।

एसपी की छुट्टी क्यों?

सरकार ने जशपुर एसपी राजेश अग्रवाल को दो महीने में ही हटा दिया। राजेश के हटने का बड़ा कारण उन्हीं के बैचमेट और दोस्त विजय अग्रवाल को माना जा रहा है। दरअसल, जशपुर में विजय ने इतनी बड़ी लकीर खींच दी थी कि राजेश के लिए उससे पार पाना मुमकिन नहीं था। गांजा तस्करों द्वारा साधुओं को कुचलने की बर्बर घटना के अलावा वहां जितने भी न्यूसेंस हुए, विजय ने कुशलतापूर्वक हैंडिल किया। इसका ईनाम भी उन्हें जांजगीर एसपी की पोस्टिंग के रूप में मिला। अब राजेश से भी जशपुर के लोग वही उम्मीद कर बैठे। नहीं पूरा हुआ तो तीनों विधायकों ने चढ़ाई कर दी। वैसे, बता दें राजेश अग्रवाल का पहला जिला रायगढ़ था और वहां भी वे पौने चार महीने में ही खो हो गए थे। ऐसे में, गृह विभाग पर सवाल तो उठते ही हैं। रायगढ़ जैसा जिला डायरेक्ट आईपीएस को भी पहली बार में आज तक नहीं मिला...उसे प्रमोटी को दे दिया। और जब वहां वे अपना विकेट नहीं बचा पाए, तो फिर जषपुर जैसे संवेदनशील जिला उनके सुपूर्द क्यों कर दिया गया?

संतोष का जंप

ब्यूरोक्रेसी में छोटा या बड़ा जिला मैटर नहीं करता, ट्रेक पर बने रहना महत्वपूर्ण माना जाता है। सूबे में कई ऐसे कलेक्टर, एसपी हुए, जो बड़े जिले से छोटे जिले में गए और फिर वहां से जोरदार जंप लगाए। हाल में एसपी के फेरबदल में संतोष सिंह के साथ ऐसा ही हुआ। रायगढ़ जैसे जिले के बाद उन्हें कोरिया भेजा गया तो जाहिर है, उन्हें तकलीफ हुई होगी। मगर उन्हें सब्र का फल मिला। संतोष कोरिया से राजनांदगांव भेजे गए और फिलहाल छत्तीसगढ़ के टॉप के जिला कोरबा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनसे पहिले जीतेंद्र मीणा कोरबा के बाद बालोद गए और वहां से बड़ा जंप लगाते हुए जगदलपुर के एसएसपी। भोजराम पटेल कांकेर के बाद गरियाबंद और उसके बाद हवाई जहाज के टेकआफ की तरह कोरबा पहुंच गए। लिहाजा, जगदलपुर, रायगढ़, बिलासपुर जैसे जिले की कप्तानी करने के बाद बलौदा बाजार भेजे गए एसएसपी दीपक झा को मायूस नहीं होना चाहिए। बहरहाल, बात संतोष सेषुरू हुई थी तो बता दें वे भी बद्री नारायण मीणा के रिकार्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। बद्री 9 जिले के एसपी रहे हैं। आखिरी जिला उनका दुर्ग था, जिसे आईजी बनने के पहले उन्होंने कंप्लीट किया। पुलिस अधीक्षक के रूप में संतोष का कोरबा सातवां जिला है। नारायणपुर, कोंडागांव, महासमुंद, रायगढ़, कोरिया, राजनांदगांव और अब कोरबा।

एक और आईएएस!

2008 बैच के आईएएस नीरज बंसोड़ डेपुटेशन पर जा रहे हैं। राज्य सरकार से उन्होंने एनओसी के लिए आग्रह किया था। सरकार ने ओके कर दिया है। एनओसी के बाद भारत सरकार में पोस्टिंग की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बंसोड़ को सीनियरिटी के हिसाब से डायरेक्टर की पोस्टिंग मिलेगी। हालांकि, डायरेक्टर लेवल में अफसर केंद्र में जाना नहीं चाहते। इसकी वजह यह है कि डायरेक्टर रैंक में दिल्ली में सुविधाएं काफी कम है। छत्तीसगढ़ जैसे मलाई भी नहीं। डायरेक्टर लेवल में अमित कटारिया भी दिल्ली गए थे। नीरज फिलवक्त डायरेक्टर हेल्थ हैं। वे करीब दो साल से ये जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कोविड के दौरान भी नीरज के पास हेल्थ था। नीरज बैलेंस और लो प्रोफाइल में रहने वाले आईएएस अफसर माने जाते हैं। यही वजह है कि उन पर कभी उंगलिया नहीं उठी।

डबल डोमन सिंह

राज्य सरकार ने छह जिलों का एसपी बदल दिया। इसमें प्रफुल्ल ठाकुर का नाम लोगों को चौंकाया। प्रफुल्ल को अभी आईपीएस अवार्ड नहीं हुआ है। और चौथे जिले की कप्तानी मिल गई। वो भी राजनांदगांव जैसे जिले की। लोग इस पर चुटकी ले रहे हैं...उन्हें आईपीएस का डोमन सिंह कहा जा रहा है। आईएएस के डोमन सिंह सांतवे जिले का कलेक्टर बन देश में रिकार्ड बनाया है। डोमन प्रमोटी आईएएस हैं। और देश में किसी प्रमोटी ने चार जिले से अधिक कलेक्टरी नहीं की। डोमन सातवां कर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि आईएएस और आईपीएस दोनों के डोमन सिंह राजनांदगांव में।

छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं

मीडिया में आईएएस टॉपर टीना डाबी की कलेक्टर पोस्टिंग की खबरें जमकर वायरल हो रही है। राजस्थान सरकार ने उन्हें जैसलमेर का कलेक्टर बनाया है। टीना 2016 बैच की आईएएस हैं। बता दें, कलेक्टरों की पोस्टिंग की दृष्टि से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं है। टीना के बैच के राहुल देव को मुंगेली का कलेक्टर बनाया गया है। निहितार्थ यह है कि कलेक्टरी में छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं।

राजधानी के बाद न्यायधानी

सौरभ कुमार छत्तीसगढ़ के तीसरे कलेक्टर होंगे, जिन्हें राजधानी के बाद न्यायधानी की कमान मिली है। उनसे पहिले सुबोध सिंह औरसोनमणि बोरा रायपुर के बाद बिलासपुर गए थे। सुबोध सिंह तो रायपुर से बिलासपुर गए और फिर दूसरी बार रायपुर के कलेक्टर बनाए गए। रायपुर में दो बार कलेक्टरी करने का रिकार्ड सुबोध के पास है। हालांकि, सुबोध को रायपुर कलेक्टर बनाने के कुछ महीने बाद सीएम सचिवालय बुला लिया गया था। सुबोध इसके बाद जब तक सरकार रही, रमन सिंह के सचिवालय में एक मजबूत स्तंभ के तौर पर रहे। वैसे, इस बात में आश्चर्य नहीं कि सौरभ कुछ हद तक सुबोध सिंह के ट्रेक को रिपीट करें। जाहिर है, आईटी के जानकार होने की वजह से पिछली सरकार ने उन्हें बिलासपुर कमिश्नर से चिप्स का सीईओ बनाकर रायपुर बुला लिया था। रायपुर कलेक्टर रहने के दौरान उनके सीएम सचिवालय जाने की अटकलें रही।

तीसरे कलेक्टर

सौरभ कुमार के साथ एक और रिकार्ड दर्ज हुआ है...छत्तीसगढ़़ के दूसरे ऐसे आईएएस होंगे, जो रायपुर, बिलासपुर नगर निगम के कमिश्नर रहे और फिर दोनों जिलों के कलेक्टर भी। उनसे पहले सोनमणि बोरा बिलासपुर और रायपुर के ननि कमिश्नर रहे और फिर कलेक्टर भी। हालांकि, ओपी चौधरी रायपुर ननि के कमिश्नर रहे और कलेक्टर भी। लेकिन, बिलासपुर में उन्होंने कोई पोस्टिंग नहीं की। बहरहाल, सोनमणि, ओपी और सौरभ से पहिले रायपुर का कोई निगम कमिश्नर रायपुर का कलेक्टर नहीं बन पाया। इसके बावजूद कि रायपुर का ननि कमिश्नर कई जिलों के कलेक्टरों से ज्यादा रुतबा रखता है। राजधानी में पोस्टिंग की वजह से सरकार से प्रगाढ़ता भी अच्छी हो जाती है।

पोस्टिंग या मजाक!

इस तरह के कारनामें एनआरडीए में ही संभव है...रिटायर हुआ छोटे पोस्ट से और संविदा में उससे बड़ी कुर्सी मिल जाए। दरअसल, एक सुपरिटेंडेंट इंजीरियर कुछ दिन पहले रिटायर हुए। एनआरडीए ने उन्हें संविदा पोस्टिंग दे दी। इसके साथ ही चीफ इंजीनियर का चार्ज भी। अब सीनियरिटी में जो एसई उनसे उपर थे, उन्हें अब अपने जूनियर को सलाम ठोकना पड़ रहा है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. विधायकों की शिकायत के बाद किस कलेक्टर का विकेट निकट भविष्य में गिर सकता है

2. ऐसी क्या बात है कि कुछ आईएएस, आईपीएस इन दिनों बेहद घबराए हुए हैं?

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