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'बटन' से बंद किया दिल का सुराख: 71 साल के मरीज को हार्ट अटैक, टेढ़ी थी रीढ़, बटन डिवाइस से बंद की दिल की फटी दीवार

एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में अष्ट व्रक रीढ़ के मरीज का ऑपरेशन सफल

बटन से बंद किया दिल का सुराख: 71 साल के मरीज को हार्ट अटैक, टेढ़ी थी रीढ़, बटन डिवाइस से बंद की दिल की फटी दीवार
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रायपुर, 03 मई 2022। एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट में 71 साल के एक मरीज के दिल की फटी दीवार को डॉक्टरों ने बटन डिवाइस से बंद किया। यह ऑपरेशन काफी मुश्किल था, क्योंकि अष्टवक्र रीढ़ की वजह से मरीज का पैर ऑपरेशन टेबल पर सीधा और स्थिर नहीं रहता था। रीढ़ के टेढ़ेपन के कारण एंजियोग्राफी का कार्डियक कैथेटर महाधमनी से पार नहीं जा पाया। आखिरकार बटन डिवाइस की प्रक्रिया से प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। इस टीम में निश्चेतना विभाग से डॉ. शशांक, डॉ फाल्गुधारा पांडा, कार्डियक सर्जरी से डॉ. निशांत सिंह चंदेल, कार्डियोलॉजी से डॉ. जोगेश, डॉ. सरजू, डॉ. निधि, टेक्नीशियन इंचार्ज आईपी वर्मा, नवीन ठाकुर, खेम सिंह, अश्वन्तिन, महेंद्र, प्रेम, कुसुम, और नर्सिंग सिस्टर में हेमलता, पूर्णिमा, अनीता, निर्मला शामिल थीं।

दिल के अंदर ही टूट गया कैथेटर का सिरा, आगे पढ़ें कैसे निकाला...


'27 अप्रैल को 71 साल के मरीज को अचानक तीव्र हार्ट अटैक आया। शॉक की स्थिति में एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट में रेफर कर दिया गया। अष्टव्रक रीढ़ से लगातार खिंचाव होने के कारण मरीज पैरों को ऑपरेशन टेबल पर सीधा स्थिर नहीं रख पा रहा था। शनिवार को दिल के सुराख को जांचने के लिए एंजियोग्राफी का कार्डियक कैथेटर रीढ़ के अति टेढ़ेपन के कारण महाधमनी एओर्टा से पार नहीं जा पाया था। इको कार्डियोग्राफी से सुराख का अनुमान लगा कर सुराख और हार्ट की बंद नसों की एंजियोप्लास्टी की योजना बनाई गई। बटन डिवाइस (टीसीसी-ट्रांसक्यूटेनियस क्लोजर) की प्रक्रिया ऐसे शॉक के मरीज में स्वयं में ही चुनौतीपूर्ण होती है। अष्ट व्रक रीढ़ के टेढ़ेपन के कारण ऑपरेशन और ज्यादा जटिल हो गया था। मरीज ऑपरेशन टेबल स्थिर नहीं लेट पा रहा था।

हर क्षण रीढ़ से पैरों की मांसपेशियों में संकुचन की लहर उठती थी, जो प्रक्रिया की प्रगति को शून्य कर फिर से शुरू करना पड़ता था। मरीज की पहले हार्ट की दो नसों की एंजियोप्लास्टी की गई ताकि हार्ट को सपोर्ट मिल सके और सुराख को बंद करने की लंबी और कठिन प्रक्रिया को सहन कर सके। फिर तुरंत सुराख को बटन डिवाइस से इलाज किया गया। सुराख और हार्ट की बंद नसों की एंजियोप्लास्टी सफल होने के बाद अष्ट व्रक रीढ़ के टेढ़ेपन से निर्मित अति संकर्षण से कार्डियक कैथेटर का सिरा दिल के अंदर ही टूट गया, जिसे फिर फंदा से महाधमनी एओर्टा से मछली की तरह पकड़ कर निकला गया। सुराख के बंद होते ही मरीज का ब्लड प्रेशर सामान्य हो गया और एक दिन के बाद इंस्टीट्यूट से छुट्टी देने की तैयारी है।

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