छत्तीसगढ़ के चार हजार स्कूल 15 साल से सिंगल टीचर के भरोसे चल रहे, ट्रांसफर नीति में इस विसंगति को दूर करने मंत्रिमंडलीय उप समिति कुछ करेगी, बड़ा सवाल

रायपुर। प्रदेश के लगभग चार हजार स्कूल अब भी एकल शिक्षकीय हैं। एक शिक्षक के भरोसे इन स्कूलों का संचालन किया जा रहा। समझा जा सकता है, एक शिक्षक वाले स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता कैसी होगी। प्रदेश के अंदरूनी क्षेत्रो व दूरस्थ अंचलों के अलावा भी कई स्कूल ऐसे हैं, जिनमें सिर्फ एक ही शिक्षक पदस्थ हैं। इन्ही एकल शिक्षकों पर ही पूरे स्कूल का दारोमदार होता हैं और यह अकेले ही पूरे स्कूल के कई कक्षाओ की जवाबदारी सम्हालते हैं। या यूं कहे कि पूरे स्कूल की जिम्मेदारियां निभाने के नाम पर जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे होते हैं। ऐसे एकल शिक्षको को ही स्कूल में एडमिशन से लेकर मध्याह्नन भोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि सभी की जिम्मेदारी निभानी होती हैं। और यदि ये किसी कारणवश अवकाश पर चले जाएं तो स्कूलों में ताले लटक जाते हैं।
हालांकि, स्कूल शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार कुछ बड़े कदम उठाई है । इसमें शिक्षक भर्ती शामिल है। दरअसल, राज्य सरकार ने 2019 में व्यापम के माध्यम से 14580 शिक्षको की भर्ती निकाली थी। उस समय कहा गया था कि शिक्षक भर्ती के बाद उन्हें सर्वप्रथम शिक्षक विहीन स्कूलों में व एकल शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थ किया जाएगा। चयनित होने वाले शिक्षको में से 2642 व्याख्याता, 3473 शिक्षक व 4326 सहायक शिक्षको के दस्तावेजो का सत्यापन कर उन्हें नियुक्ति प्रदान की जा चुकी हैं। पर एकल शिक्षक पदस्थापना वाले स्कूलों की संख्या प्रदेश मे अब भी तकरीबन चार हजार से थोड़ी कम ही हैं।
विधानसभा के मानसून सत्र में इस सम्बंध में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने सदन को बताया था कि प्रदेश के 29 जिलों के 3983 स्कूल एकल शिक्षक पदस्थापना वाले हैं। जिनमे रायपुर व बेमेतरा जिले में सबसे कम एकल शिक्षकीय स्कूल हैं। दोनो जिलो में सिर्फ 6-6 स्कूल ऐसे हैं जो एकल शिक्षकीय हैं। जबकि एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या के मामले में टॉप पर बस्तर जिला उसके बाद सुकमा जिला आता है। बस्तर में कुल 592 स्कूल ऐसे है जिनमे केवल एक ही शिक्षक पदस्थ हैं और पूरे सुकमा में ऐसे स्कूलों की संख्या 427 हैं। नई पदस्थापना नही होने से 29 जिलो के 3983 स्कूलों में एक ही शिक्षक मोर्चा सम्हाले हुए है।
दरअसल पुराने शिक्षकों के अलावा नए भर्ती हुए शिक्षक भी शहर या उसके आस पास के स्कूलों में पोस्टिंग चाहते हैं। वे दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में पदस्थापना नही चाहते हैं। क्योंकि वहां पोस्टिंग मिलने पर उन्हें वही गांव में ही निवास करना होगा। जिला मुख्यालय में रहकर आना जाना संभव नही हो पाता हैं। जो कई शिक्षको को नागवार गुजरता हैं। इसलिए शिक्षको के द्वारा नेतागिरी करवा एप्रोच या चढ़ावा चढ़ा कर पास के स्कूलों में पोस्टिंग का प्रयास किया जाता हैं। यही वजह हैं कि दूरस्थ अंचलों के स्कूल खाली रह जाते हैं।
शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय स्कूल में शिक्षको की वैकल्पिक व्यवस्था हेतु कांकेर जिले में डीएमएफ मद से अतिथि शिक्षकों की भर्ती भी की जा रही हैं। जिसके तहत स्थानीय बेरोजगार योग्य युवाओं से आवेदन मंगा कर स्कूलों के जनभागीदारी समिति,स्कूलों के प्रधान पाठक व संकुल शैक्षिक समन्वयको के द्वारा अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जा रही हैं। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में दस अगस्त तक भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर शिक्षको की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार को चाहिए कि दृढ़ निश्चय के साथ एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना करें। और इसके लिये यदि जरूरत पड़े तो एसे नियम कायदे भी बनाये जाए कि जॉइनिंग के बाद एक निश्चित अवधि तक शिक्षको की पोस्टिंग अनिवार्य रूप से पहुच विहीन दूरस्थ स्कूलों में हो। और इसके लिए बकायदा शिक्षको से भी बांड पत्र भी यदि आवश्यकता पड़े तो भरवा लेना चाहिए।
