Begin typing your search above and press return to search.

Chhattisgarh Exotic Magur Ban: छत्तीसगढ़ में इन मछलियों पर लगा प्रतिबंध, पालते हुए पाए गए तो होगी जेल और 10 हजार रूपए का जुर्माना....

Chhattisgarh Exotic Magur Ban: छत्तीसगढ़ में इन मछलियों पर लगा प्रतिबंध, पालते हुए पाए गए तो होगी जेल और 10 हजार रूपए का जुर्माना....
X
By NPG News

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, मछलीपालन विभाग द्वारा प्रदेश में एक्सोटिक मांगुर (क्लेरियस गेरीपिनस) एवं बिग हेड ( हाइपोप्थेलमिक्थीस नोबीलीस) मछलियों के मत्स्य बीज उत्पादन, मत्स्य बीज संवर्धन एवं पालन को प्रतिषिद्ध घोषित किया गया है।

इन प्रतिषिद्ध मछलियों का कोई भी मछुआ, वैयक्तिक, समूह या समिति, केंद्र या राज्य शासन द्वारा मत्स्यों का मत्स्य बीज उत्पादन, शासन अथवा वैयक्तिक जलस्रोत में संवर्धन एवं पालन नहीं करेगा। राज्य शासन के द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन मछलियों का परिवहन, आयात एवं विपणन भी प्रतिबंधित किया गया है।

संचालक मछली पालन के द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रतिबंध का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) अधिनियम 2015 के तहत एक वर्ष का कारावास एवं 10 हजार रूपए अथवा दोनों से दंडित किया जा सकेगा। राज्य शासन इन प्रतिबंधित मछलियों से संबंधित किसी भी गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर दोष सिद्ध उपरांत संबंधित को मत्स्य विभाग द्वारा दी जाने वाली सभी प्रकार की योजनाओं से प्रतिबंधित भी किया जाएगा।

अधिक मुनाफा कमाने पालते है...

मांगुर का वैज्ञानिक नाम क्लेरियस गेरीपाइंस है। मछली पालक अधिक मुनाफे के चक्कर में पालते रहे है। क्योंकि यह मछली चार महीने में ढाई से तीन किलो तक तैयार हो जाती है। इस मछली में 80 फीसदी लेड एवं आयरन के तत्व पाए जाते है।

मांसाहारी मछली

मांगुर एक मांसाहारी मछली है। यह किसी भी पानी (दूषित पानी) में तेजी से बढ़ती है जहां अन्य मछलियां पानी में ऑक्सीजन की कमी से मर जाती है, लेकिन यह जीवित रहती है। मांगुर छोटी मछलियों समेत यह कई अन्य जलीय कीड़े-मकोड़ों को खा जाती है। इससे तालाब का पर्यावरण भी खराब हो जाता है।

सेहत के काफी खराब

इसका सेवन मुनष्यों के सेहत के लिए काफी खराब है। इससे मनुष्यों में कई घातक बीमारियां हो सकती है। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान भी चलाया जाता है लंकिन बाजारों में कोई रोक-टोक न लगने के कारण इसकी बिक्री आसानी से की जा रही थी।

मांगुर मछली पर बैन

भारत सरकार ने वर्ष 2000 में ही विदेशी थाई मांगुर पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। इसके बाद भी लोग अवैध तरीका से इसका कारोबार कर रहे है। विदेशी मांगुर को देसी मांगुर बताकर बाजारों में बेचा जाता है. और लोग भी बड़े शोक से इस मछली को अपने आहार में शामिल कर रहे। वैज्ञानिको का दावा है कि थाई मांगुर के खाने से कैंसर जैसे गंभीर रोग हो सकते है। यह मछली गला सडा माँस खाने में सक्षम है। जिसके चलते इन मछली का शारीर बहुत तेजी से बढ़ता है। मांगुर में आयरन और लेड बहुत अधिक मात्र में पाया जाता है। जो 80 प्रतिशत तक होता है, जिसके चलते मांगुर इन्सान और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा है।

Next Story