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Chhattisgarh Breaking News: ट्रांसफर बैन खोलने मंत्रिमंडलीय उप समिति की आज आखिरी और निर्णायक बैठक, CM को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में तीन साल से ट्रांसफर पर लगा बैन आजकल में खुल सकता है। इसके लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति की आज शाम अहम बैठक होने जा रही है।

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By NPG News

Chhattisgarh Breaking News रायपुर। ट्रांसफर पर लगे बैन को खोलने आज मंत्रिमंडलीय उप समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक के बाद संभवतः आज ही उप समिति अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंप देगी। जाहिर है, पिछले कैबिनेट की बैठक में ट्रांसफर से लगी रोक को हटाने के लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित करने का फैसला किया गया था। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू की अध्यक्षता में चार सदस्यीय मंत्रियों की उप समिति बनाई गई थी। इनमें मोहम्मद अकबर, प्रेमसाय सिंह और अनिला भेड़िया शामिल हैं। समिति की एक बैठक हो चुकी है। दूसरी और निर्णायक बैठक आज शाम तीन बजे होने जा रही है। वैसे, पिछली बैठक में ट्रांसफर का मोटे तौर पर प्रारूप और शर्तें तैयार कर ली गई थी। आज इसे फाइनल रूप दिया जाएगा।

पता चला है, बैठक के बाद मंत्रिमंडलीय उप समिति आज शाम तक मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। चूकि, कैबिनेट ने मंत्रिमंडलीय उप समिति को ट्रांसफर पर फैसला लेने के लिए पूरा पावर दे दिया है। लिहाजा, रिपोर्ट अब कैबिनेट में नहीं जाएगी। सिर्फ मुख्यमंत्री से अनुमोदन लिया जाएगा। सीएम की हरी झंडी मिलते ही सरकार बैन खोलने का ऐलान कर देगी। सूत्रों का कहना, मुख्यमंत्री आज देर शाम या कल तक इसका आधिकारिक घोषणा कर देंगे।

सरकार की जल्दीबाजी की वजह ये है कि इसमें काफी लेट हो चुका है। आमतौर पर गर्मी की छुट्टियों के समय पहले बैन खुलता था। इससे ट्रांसफर होने पर कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल में दाखिले लेने में दिक्कत नहीं होती थी। इस बार अगस्त शुरू हो गया है। सरकार का सोचना ये है कि अगस्त तक ट्रांसफर कंप्लीट हो जाए। सो, पन्द्रह दिन आवेदन लेने के लिए टाइम दिया जाएगा और पन्द्रह दिन ट्रांसफर आदेश निकालने में लगेगा। यानी, अगस्त तक पूरा हो जाए। खबर है, कुल सेटप का दस फीसदी ट्रांसफर किया जाएगा... मंत्रिमंडलीय उप समिति की पिछली बैठक में यह तय हुआ था। हालांकि, यह भी सही है कि बैक डेट से ट्रांसफर एकाध महीने बाद तक चलते रहते हैं।

ट्रांसफर से तीन साल बाद बैन हट रहा है इसलिए मंत्रियों में बड़ी खुशी है। अभी तक ट्रांसफर के लिए सीएम हाउस का चक्कर काटना पड़ता था। अब सीधे मंत्री को अधिकार होगा, जिसको चाहे, जहां ट्रांसफर कर सकते हैं। मंत्री ही नहीं, मंत्री का स्टाफ, मंत्री के इर्द गिर्द रहने वाले कार्यकर्ताओं में ट्रांसफर को लेकर खासा उत्साह है। दरअसल, एक बार बैन हटता है तो दो, चार साल का खर्चा पानी का इंतजाम हो जाता है।

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