Chhattisgarh Assembly Election 2023: मजबूरी का नाम प्रबल प्रताप: कांग्रेस के अजेय गढ़ में भाजपा ने उतारा पैराशूट कैंडीडेट, जीत गए तो जीत वरना...

Chhattisgarh Assembly Election 2023 रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने दो बार में 85 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें से कुछ नामों को लेकर विवाद की स्थिति भी बन रही है। भाजपा का दावा है कि जहां पर नाराजगी है, उन्हें मना लिया जाएगा। इन सबमें एक सीट ऐसी है, जहां खुलकर कोई सामने नहीं आया, लेकिन तूफान के पहले खामोशी के संकेत हैं। यह सीट है कोटा, जहां से भाजपा ने पूर्व सांसद दिलीप सिंह जूदेव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को उतारा है। प्रबल प्रताप कभी कोटा में सक्रिय नहीं रहे। ऐसे में उन्हें मजबूरी का नाम प्रबल प्रताप के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोटा सीट पर आज तक भाजपा नहीं जीती। हर बार कांग्रेस के प्रत्याशी की जीत हुई है। डॉ. रेणु जोगी अपवाद हैं, जिन्होने जोगी कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में यहां जीत दर्ज की। हालांकि वे इससे पहले उप चुनाव और दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं, तब जाकर मतदाताओं ने पंजा छाप के बजाय रेणु के चेहरे पर वोट दिया था। यही वजह है कि प्रबल प्रताप की उम्मीदवारी को भाजपा के ब्लाइंड गेम की तरह भी देखा जा रहा है, जिससे जीत गए तो जीत वरना हार की स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि यह सीट पहले से ही कांग्रेस की है।
पहले एक नजर कोटा में अब तक के विधायकों पर...
1951 - काशीराम तिवारी, कांग्रेस
1957 - काशीराम तिवारी, कांग्रेस
सूरज कुंवर, कांग्रेस
1962 - लाल चंद्रशेखर सिंह, कांग्रेस
1967 - मथुराप्रसाद दुबे, कांग्रेस
1972 - मथुराप्रसाद दुबे, कांग्रेस
1977 - मथुराप्रसाद दुबे, कांग्रेस
1980 - मथुराप्रसाद दुबे, कांग्रेस
1985 - राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, कांग्रेस
1990 - राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, कांग्रेस
1993 - राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, कांग्रेस
1998 - राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, कांग्रेस
2003 - राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, कांग्रेस
2006 - डॉ. रेणु जोगी कांग्रेस (उपचुनाव)
2008 - डॉ. रेणु जोगी, कांग्रेस
2013 - डॉ. रेणु जोगी, कांग्रेस
2018 - डॉ. रेणु जोगी, जेसीसीजे
क्या हिंदुत्व का मिलेगा लाभ?
प्रबल प्रताप को कोटा से उतारने के फैसले पर भाजपा ही नहीं, आरएसएस का है। बल्कि यहां तक कहा जा रहा है कि आरएसएस की सिफारिश पर ही उन्हें प्रत्याशी बनाया गया है। इसके पीछे प्रबल का घर वापसी अभियान में सक्रियता है. कोटा में भी मिशनरी वोटर काफी संख्या में हैं। इससे पहले कांग्रेस ने मसीही समाज के विभोर सिंह को टिकट दिया था। डॉ. जोगी भी समाज से जुड़ी हैं। इसका फायदा समाज को मिल सकता है। कोटा में साहू वोटरों की काफी संख्या है। इससे लगी लोरमी सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव चुनाव लड़ रहे हैं। इसका फायदा मिल सकता है. दिलीप सिंह जूदेव बिलासपुर के सांसद रहे हैं। उन्होंने रेणु जोगी को हराया था। यह भी एक वजह हो सकती है। हालांकि तब जूदेव के साथ उनके बड़े बेटे शत्रुंजय प्रताप साये की तरह उनके साथ रहे थे। उस समय प्रबल पढ़ाई के लिए देश से बाहर थे। बहरहाल, सभी मुद्दों को जोड़ने पर भी प्रबल प्रताप की उम्मीदवारी को भाजपा के ब्लाइंड गेम के रूप में ही देखा जा रहा है।
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