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Chhattisgarh Assembly Election 2023: फिर जूदेव-जोगी की जंग: जब रेणु जोगी को हराने के बाद दिलीप सिंह जूदेव ने कहा था, आपको हराकर अच्छा नहीं लगा

Chhattisgarh Assembly Election 2023: साल 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जब अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी को उम्मीदवार बनाया, तो जोगी और जूदेव की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को देखते हुए और इसका फायदा उठाने के लिए ही भाजपा ने दिलीप सिंह जूदेव को मैदान में उतार दिया।

Chhattisgarh Assembly Election 2023: फिर जूदेव-जोगी की जंग: जब रेणु जोगी को हराने के बाद दिलीप सिंह जूदेव ने कहा था, आपको हराकर अच्छा नहीं लगा
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By Sanjeet Kumar

Chhattisgarh Assembly Election 2023: रायपुर। छत्तीसगढ़ के सियासी इतिहास में अजीत जोगी और दिलीप सिंह जूदेव परिवार के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता जगजाहिर है। लेकिन वक्त गुजरने के साथ अब जूदेव और जोगी, दोनों ही परिवार के मुखिया अजीत जोगी और दिलीप सिंह जूदेव इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन जोगी और जूदेव परिवार के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता अब भी बरकरार है। भाजपा में कोट से अपने फायर ब्रांड नेता और जूदेव परिवार के बेटे प्रबल प्रताप जूदेव को उम्मीदवार बनाया है। यानी यहां की लड़ाई एक बार फिर से जोगी विरुद्ध जूदेव पर आकर ठहर गई है। कोटा के सियासी महासमर में एक बार फिर जूदेव गरज रहे हैं और उनके खिलाफ जोगी अपने नाम, काम और व्यवहार की बदौलत लोगों के बीच हैं। लोगों में मैडम जोगी के नाम से लोकप्रिय डॉ. रेणु जोगी एक बार फिर लोगों के बीच अपने लिए वोट मांग रही हैं। उधर पिता की तरह छवि और अंदाज लिए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव लोगों की भीड़ में अपने लिए आशीर्वाद मांग रहे हैं। चुनावी सभाओं में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का वही तेवर और अंदाज दिख रहा है, जिसके लिए छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनके स्वर्गीय पिता दिलीप सिंह जूदेव युवाओं में काफी लोकप्रिय रहे। एक सभा में गरजते हुए उन्होंने कहा कि 'मैं कांग्रेस के नेताओं, भ्रष्टाचारियों एवं अधिकारियों से कहना चाहता हूं कि मेरे कार्यकर्ताओ का बाल भी बांका हुआ तो तुमको नेस्तनाबूत कर दूंगा। टाइगर अभी जिंदा है।'

याद आ गया 2009 का चुनाव

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जब अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी को उम्मीदवार बनाया, तो जोगी और जूदेव की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को देखते हुए और इसका फायदा उठाने के लिए ही भाजपा ने दिलीप सिंह जूदेव को मैदान में उतार दिया। हालांकि 2003 में पैसे लेते हुए वीडियो में कैद होने के बाद जूदेव का वो प्रभाव नहीं रहा, जो पहले कभी हुआ करता था। फिर भी दिलीप सिंह जूदेव ने जबरदस्त माहौल बना दिया। भले ही चुनाव रेणु जोगी लड़ रही थीं, लेकिन असल मायने में चेहरा अजीत जोगी का ही था। लिहाजा देश भर में इस चुनाव को जोगी बनाम जूदेव की तौर ही देखा गया था। भाजपा का गढ़ बन चुके बिलासपुर सीट को जीतने कांग्रेस ने भी पूरी ताकत लगा दी थी। लेकिन जूदेव के आगे बिलासपुर में टिकना किसी के लिए आसान नहीं था। जय जूदेव के नारे बीच आखिकार परिणाम भाजपा के पक्ष में ही आया। करीब 20 हजार वोटों से रेणु जोगी को परास्त किया था। कोटा के महासमर में दिलीप सिंह जूदेव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और उनके सामने रेणु जोगी को देखकर एक बार फिर लोगों को 2009 का बिलासपुर लोकसभा चुनाव याद आ रहा है।

जब जूदेव ने कहा था- 'आपको हराकर अच्छा नहीं लगा'

ये बात साल 2009 के लोकसभा चुनाव के नतीजे के दिन की है। बिलासपुर के कोनी स्थित इंजीनियरिंग कालेज परिसर के मतगणना स्थल में दिलीप सिंह जूदेव पहुंचे। उन्हें जीत मिली थी। वहीं पर उनकी मुलाकात कांग्रेस की उम्मीदवार डा रेणु जोगी से हो गई। बताते हैं कि तब जूदेव ने उनकी ओर बढ़कर हाथ जोड़ा। साथ ही ये कहा कि भाभी जी आपको हराकर हमें बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा है और न ही हम खुश हैं। जोगी जी लड़ते और उनको हराते तो बात कुछ और होती और तब बात भी बनती।

कोटा का सियासी इतिहास

कोटा कांग्रेस का अभेद्य किला है, जिसे 2018 तक कोई भी पार्टी नहीं भेद सका था। छत्तीसगढ़ का कोटा विधानसभा सीट का इतिहास ऐसा है कि पिछले सात दशक से यहां हमेशा से कांग्रेस ही बाजी मारती रही। कोटा की काट ढूंढ पाना भाजपा और दूसरे दलों के लिए हमेशा टेढ़ी खीर रहा है। 2018 में जेसीसीजे की उम्मीदवार डॉक्टर रेणु जोगी ने इसे भेदने में कामयाबी हासिल की। हालांकि इससे पहले रेणु जोगी इसी सीट से तीन बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ चुकी और जीत हासिल कर चुकी थीं। लिहाजा माना जा रहा है कि लोगों ने अपना वोट नहीं बदला। आजादी के बाद से अब तक कोटा विधानसभा में 72 साल में 16 बार चुनाव हुए। इन 16 चुनाव 6 ऐसे नेता हैं जो विधानसभा तक पहुंचे। 1952 में काशीराम तिवारी पहले विधायक बने। मथुरा प्रसाद दुबे यहां से 4 बार और राजेंद्र शुक्ल 5 बार विधायक चुने गए। इसके अलावा 2006 में डॉ. रेणु जोगी पहली महिला विधायक बनीं और पिछले 3 बार से वे यहां से विधायक हैं।

जब एक साथ चुने गए दो विधायक

कोटा विधानसभा ऐसी विधानसभा है जहां से एक बार में दो विधायक भी बने हैं। बहुत कम लोगों को ये जानकारी है कि 1957 में हुआ विधानसभा चुनाव द्विसदस्यीय प्रणाली में हुआ था। इस तरह के चुनाव में एक सामान्य और एक आरक्षित सीट होती थी। उस चुनाव में कांग्रेस के काशीराम तिवारी और सूरज कुंवर विधायक बने थे। इस चुनाव में कोटा की जनता ने अपने लिए अपना नेतृत्वकर्ता दो लोगों को बनाया था। दोनों जनता की अपेक्षाओं पर खरा भी उतरे।

कौन है प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

भाजपा ने बिलासपुर जिले की कोटा विधानसभा से प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को अपना प्रत्याशी बनाया है। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव छत्तीसगढ़ की राजनीति के दिग्गज नेता रहे दिलीप सिंह जूदेव के पुत्र हैं। दिलीप सिंह जूदेव के दो पुत्रों शत्रुंजय प्रताप सिंह जूदेव और युद्ध वीर सिंह जूदेव की मौत के बाद दिलीप सिंह जूदेव की राजनीतिक विरासत प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के ऊपर है। वह अपने पिता की ही तरह आदिवासी इलाकों में ऑपरेशन घर वापसी चला रहे हैं। छत्तीसगढ़ के साथी झारखंड उड़ीसा जैसे राज्य में ऑपरेशन घर वापसी के जरिए 10000 लोगों की हिंदू धर्म में वापसी करवा चुके हैं। इस अभियान के तहत वे गांव गांव में घूम कर हिंदू धर्म से अन्य धर्म में जा चुके लोगों के पैर धोकर हिंदू धर्म में वापस लाते हैं। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव 2013 से 2018 तक नगर पालिका परिषद जशपुर के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वे वर्तमान में प्रदेश भाजपा मंत्री भी है। वह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। कोटा विधानसभा से वर्तमान में जनता कांग्रेस की रेणु जोगी विधायक हैं। ज्ञातव्य है कि जूदेव परिवार व जोगी परिवार की पुरानी राजनैतिक प्रतिस्पर्धा है। रेणु जोगी के पति अजीत जोगी के खिलाफ दिलीप सिंह जूदेव ने 1988 में खरसिया उपचुनाव लड़ा था। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में रेणु जोगी ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में बिलासपुर से भाजपा प्रत्याशी दिलीप सिंह जूदेव से लड़ा था।

कौन हैं रेणु जोगी?

छतीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी बिलासपुर के कोटा से 2006, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की टिकट से विधायक चुनी गई थी। 2018 में वे कोटा विधानसभा से ही छतीसगढ़ जनता कांग्रेस से चुनाव जीत कर विधायक बनी है। अजीत जोगी के निधन के बाद से रेणु जोगी ही छतीसगढ़ जनता कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन कर पार्टी को संभाल रहीं हैं। 27 अक्टूबर 1950 को जन्मी डॉ. रेणु जोगी एक कुशल नेत्र चिकित्सक भी है। उनकी शिशुओं की देखभाल के लिए लिखी गई पुस्तक को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से पुरुस्कार भी मिला है। वर्तमान सिटिंग विधायकों में से सबसे अधिक विदेश यात्राएं रेणु जोगी ने की हैं। उन्होंने बिलासपुर लोकसभा सीट से 2014 में कांग्रेस की टिकट पर भाजपा के दिग्गज नेता व केंद्रीय मंत्री रहें दिलीप सिंह जूदेव के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। जिसमें उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा था।



Sanjeet Kumar

संजीत कुमार: छत्‍तीसगढ़ में 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय। उत्‍कृष्‍ट संसदीय रिपोर्टिंग के लिए 2018 में छत्‍तीसगढ़ विधानसभा से पुरस्‍कृत। सांध्‍य दैनिक अग्रदूत से पत्रकारिता की शुरुआत करने के बाद हरिभूमि, पत्रिका और नईदुनिया में सिटी चीफ और स्‍टेट ब्‍यूरो चीफ के पद पर काम किया। वर्तमान में NPG.News में कार्यरत। पंड़‍ित रविशंकर विवि से लोक प्रशासन में एमए और पत्रकारिता (बीजेएमसी) की डिग्री।

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