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CG: रोजगार पंजीयन जीवित न होने पर सब इंजीनियर को सलेक्शन के बाद नियुक्ति देने से इंकार, हाई कोर्ट ने दिया अहम आदेश

CG: रोजगार पंजीयन जीवित न होने पर सब इंजीनियर को सलेक्शन के बाद नियुक्ति देने से इंकार, हाई कोर्ट ने दिया अहम आदेश
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बिलासपुर, 14 मई 2022। सिर्फ रोजगार पंजीयन जीवित न होने के आधार पर सलेक्शन के बाद नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। बिलासपुर हाई कोर्ट ने यह अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी को सब इंजीनियर को नियुक्ति देने का है।

दरसअल, याचिकाकर्ता वंदना साहू ने अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से याचिका में बताया कि उप अभियंता सिविल के 70 पदों के लिए लोक निर्माण विभाग में विज्ञापन जारी किया, जिसमें याचिकाकर्ता वंदना साहू ने भी सफलतापूर्वक भाग लिया था। 7 मार्च को उन्हें काउंसलिंग के लिए बुलाया था। काउंसलिंग के बाद उसे यह कहते हुए अपात्र घोषित कर दिया कि उसका काउंसलिंग के दौरान उन्होनें 29 नवम्बर 2019 को जारी रोजगार पंजीयन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जबकि विज्ञापन में उल्लेखित शर्त के अनुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 13 जनवरी 2019 को थी। इस कारण उसके बाद का रोजगार पंजीयन मान्य नहीं है।

याचिकाकर्ता ने अपात्र घोशित करने के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी एवं बताया कि सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार जीवित रोजगार पंजीयन नहीं होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। रोजगार पंजीयन का नियुक्ति से कोई संबंध नहीं हैं इस कारण अपात्र घोशित करने का आदेश 7 मार्च निरस्त किया जाये। शासन की ओर से जवाब पेश किया कि विज्ञापन में एवं सामान्य प्रशासन के परिपत्र के अनुसार नियुक्ति के लिए रोजगार पंजीयन जीवित होना आवश्यक है। इस कारण याचिकाकर्ता को अपात्र घोषित किया गया।

प्रकरण की सुनवाई पश्चात न्यायामूर्ति पी सेम कोशी ने कहा कि पूर्ण पीठ की निर्णय के परिप्रेक्ष्य में विज्ञापन में रोजगार पंजीयन का शर्त गलत है एवं नियुक्ति के लिए जीवित रोजगार पंजीयन का होना आवश्यक नहीं है। इस कारण अपात्र घोशित करने का आदेश 7 मार्च निरस्त किया जाता है और निर्देशित किया जाता है कि अन्य अर्हता पूरी करने पर याचिकाकर्ता को उप अभियंता सिविल के पद पर नियुक्ति दिया जावेगा।

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