थोक सब्जी मार्केट में दुर्लभ रेड सैंड बोआ: सौंदर्य प्रसाधन और दवाओं में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ रेड सैंड बोआ का रेस्क्यू... ब्लैक मार्केट में इसलिए डिमांड...

रायपुर। राजधानी के थोक सब्जी मार्केट में दुर्लभ रेड सैंड बोआ रेस्क्यू किया गया है। नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इसे रेस्क्यू किया गया। रायपुर और खारुन से लगे एरिया में यह दुर्लभ सांप कभी कभार मिलता है। यह इसलिए दुर्लभ है, क्योंकि इसका इस्तेमाल दवाओं के साथ साथ सौंदर्य प्रसाधन के लिए भी होता है। ऐसा मिथक है कि रेड सैंड बोआ जिसके पास होता है, वह काफी धनवान होता है। इसके अलावा सेक्स पॉवर बढ़ाने की दवा बनाने के लिए भी इस्तेमाल करने की बात आती है। यही वजह है कि इसकी बड़े पैमाने पर तस्करी होती है। ब्लैक मार्केट में इसकी काफी कीमत बताई जाती है।
नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के सचिव मोइज अहमद ने बताया कि उन्हें थोक सब्जी मार्केट से सांप होने की खबर आई थी। अमूमन सांप देखकर लोग घबरा जाते हैं और वे चाहते हैं कि उसे रेस्क्यू टीम के सदस्य लेकर जाएं। मोइज ने फोन करने वाले को तस्वीर भेजने के लिए कहा। तस्वीर में जब उन्हें पता चला कि यह दुर्लभ रेड सैंड बोआ है तो वे खुद ही रेस्क्यू करने पहुंचे। दरअसल, थोक मार्केट होने के कारण लगातार ट्रकों का आना-जाना रहता है। ऐसे में पहिए के नीचे आने से सांप को नुकसान होता या मारा जाता। इस वजह से उन्होंने मौके पर जाकर रेस्क्यू किया।
मोइज के मुताबिक रेड सैंड बोआ दुर्लभ प्रजाति का सांप है। दवाओं के लिए इसका उपयोग होता है। रेड सैंड बोआ से कई मिथक भी जुड़े हैं, इसलिए तस्करी की खबरें भी आती रहती हैं। लोग इसे दोमुंहा सांप के रूप में भी जानते हैं। इसके दो मुंह नहीं होते, लेकिन पूंछ का हिस्सा मोटा होता है, जो मुंह की तरह दिखता है। यह सांप जहरीला नहीं होता। सामान्यतः कॉमन सैंड बोआ गांवों में दिखते रहते हैं। इसे गांव में लोग मुसलेडी या मूसलेढी के नाम से भी जानते हैं। रायपुर में देवपुरी, खारुन नदी के किनारे और कुम्हारी क्षेत्र में रेस्क्यू किया गया है।
