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संघ से जुड़कर समझो: भागवत ने धर्मांतरण पर फिर बोला हमला, कहा- जबरन किसी दूसरे धर्म को मनवाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए

आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत दो दिन के छत्तीसगढ़ प्रवास पर थे। उन्होंने जशपुर और अंबिकापुर में वनवासी कल्याण आश्रम और आरएसएस के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

संघ से जुड़कर समझो: भागवत ने धर्मांतरण पर फिर बोला हमला, कहा- जबरन किसी दूसरे धर्म को मनवाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए
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डॉ. मोहन भागवत 
By NPG News

अंबिकापुर। आरएसएस के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने दूसरे दिन भी धर्मांतरण पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अपनी-अपनी पूजा पर पक्के रहो। अपनी-अपनी भाषा है, उसे बोलो, उस भाषा का विकास करो। अपना-अपना खान-पान है, वो उस भौगोलिक क्षेत्र के लिए उचित है। उस पर भी पक्के रहो। जो जिस धर्म को मानता है, उसे जबरन किसी दूसरे धर्म को मनवाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। धर्म, वेशभूषा, खान-पान कोई भी हो, लेकिन सभी एक हैं। आरएसएस प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिंदुत्व कोई संप्रदाय नहीं है, वह तो इस देश की चलती आई हुई परंपरागत जीवन पद्धति है।


हम सबके पूर्वज समान

अंबिकापुर के पीजी मैदान में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि हम सबके पूर्वज समान हैं। आज का विज्ञान डीएनए मैपिंग के बाद कहता है कि 40 हजार साल पहले से जो अखंड भारत था, उन सबका DNA समान है।

मोहन भागवत ने कहा कि मैं दूसरी बार सरगुजा आया हूं। मेरे आने से लोग तरह-तरह की बातें करते हैं। पिछले सालों में नई भर्ती भी संघ में हुई हैं। मैं इन लोगों को संघ की परंपरा, संस्कृति बताने जाता हूं। लोगों को लगता है कि संघ पैरामिलिट्री संस्थान है, लेकिन ऐसा नहीं है। संघ में व्यायाम के तौर पर लाठियां चलाना सीखते हैं, कबड्डी खेलते हैं। अगर संघ को समझना है तो संघ में आना पड़ेगा। यहां आने का कोई शुल्क नहीं लगता। बस आइए और समझिए कि संघ क्या कर रहा है।


उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग देवी-देवताओं को मानने वाले लोग हैं। ऐसे लोग भी हैं जो किसी देवी देवता को नहीं मानते। मैं सभी से आह्वान करता हूं कि वे सभी का सम्मान करें। वेदों में भी लिखा है कि सबका सम्मान करो, हम वसुधैव कुटुंबकम को मानने वाले लोग हैं। विविधताओं के बावजूद हम एक देश हैं। राजा बदलते रहे, आक्रमणकारी आए उन्होंने राज किया, लेकिन हम आज भी वही भारत हैं, जो सनातन समय से चला आ रहा है। सबकी पूजाओं का आदर करो, सबकी पूजा उतनी ही सत्य है जितनी मेरी है,ये सोचो।


सबको स्वीकार कर अपनी राह पर चलो। सिर्फ अपने स्वार्थ को मत देखो। सबका स्वार्थ पूरा हो सके, ऐसा प्रयास करो। अगर भारत पर संकट में आए तो हम एक हो जाते हैं। कोरोना में ऐसा ही हुआ। चीन पाकिस्तान से युद्ध के समय हम एक हुए। वास्तविकता यह है कि हम सब एक हैं। हमको जात पात की ऊंच-नीच नहीं रखना चाहिए। संघ सामाजिक एकजुटता के लिए कार्य करता रहा है और आगे भी करता रहेगा।


आरएसएस प्रमुख के उद्बोधन से पहले भव्य पथ संचलन हुआ। इसमें बीजेपी अध्यक्ष अरुण साव भी पूर्ण गणवेश में शामिल हुए।

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