npg
Exclusive

दो विभाग आमने-सामने: निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल की पढ़ाई नियम के विपरीत, फिर भी उच्च शिक्षा विभाग ने दे दी अनुमति

बड़ा सवाल: राज्य में जब पहले से ही मेडिकल संबंधी पढ़ाई के लिए कानून लागू, फिर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किसके कहने पर राजपत्र में लागू कर यह अनुमति दी जा रही है?

दो विभाग आमने-सामने: निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल की पढ़ाई नियम के विपरीत, फिर भी उच्च शिक्षा विभाग ने दे दी अनुमति
X

रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल की पढ़ाई को लेकर दो विभाग आमने-सामने आ गए हैं। आयुष विश्वविद्यालय के कानून के मुताबिक निजी विश्वविद्यालय मेडिकल से जुड़ी पढ़ाई जैसे आयुर्वेद, हेल्थ एंड एलाइड साइंस, पैरा मेडिकल, नर्सिंग या फार्मेसी की पढ़ाई नहीं करा सकते। इसके विपरीत उच्च शिक्षा विभाग ने राजपत्र में ऐसा नियम प्रकाशित कर मंजूरी भी दे दी है। इसे लेकर अब आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके चंद्राकर ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। इससे पहले कुलपति की ओर से राज्यपाल को भी पत्र लिखा गया था। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे हालात को देखते हुए एक बार फिर जोगी शासन की तर्ज पर निजी विश्वविद्यालयों की बाढ़ आने की आशंका है। ऐसी स्थिति में फर्जी डिग्री बंटने की भी आशंका है।

कुलपति ने जो पत्र लिखा है, उसके मुताबिक कलिंगा विश्वविद्यालय, आईटीएम विश्वविद्यालय, भारती विश्वविद्यालय, रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय आदि निजी विश्वविद्यालयों द्वारा चिकित्सा एवं आयुष से संबंधित पाठ्यक्रमों का पाठन किया जाता है, जो नियमानुकूल नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव भुवनेश यादव द्वारा भारती विश्वविद्यालय चंदखुरी को आयुर्वेद, हेल्थ एंड एलाइड साइंस, पैरामेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी की अनुमति का राजपत्र में प्रकाशन किया गया है।


अध्यादेश लाना होगा

जानकारों के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों में इन सभी पाठ्यक्रमों को शुरू करने के पहले राज्य शासन को पूर्व नियमों को शिथिल करने के लिए अध्यादेश लागू करना पड़ेगा। इसके विपरीत कुछ निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश लागू करने के पहले ही आयुष विश्वविद्यालय के 2008 के एक्ट व राजपत्र के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र के सभी पाठ्यक्रम प्रारंभ कर रहे हैं।


इसी तरह भारत सरकार द्वारा प्रकाशित नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के पृष्ठ क्रमांक 47 में भी यह स्पष्ट उल्लेख है कि मेडिकल और लीगल पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति निजी विश्वविद्यालय को नहीं होगी पर सभी नियमों को दरकिनार करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने निजी विश्वविद्यालय को उपरोक्त पाठ्यक्रम संचालन करने हेतु राजपत्र प्रकाशित किया है।

छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) दिनांक 16 सितंबर 2008 विधि एवं विधायी कार्य विभाग, मंत्रालय, दाऊ कल्याण सिंह भवन, रायपुर क्रमांक 8850/डी. 242 / 21-अ/प्रा/छ.ग./08 छत्तीसगढ़ विधानसभा का अधिनियम छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम 2008 जिस पर दिनांक 12.09.2008 को राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हो चुकी है। इसके प्रावधानों के अनुसार छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम 2008 की धारा 06) (1), (2) एवं (3) के अनुक्रम में प्रदेश के अन्य कोई संस्था, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय द्वारा चिकित्सा शिक्षा से संबंधित किसी भी पाठ्यक्रमों का संचालन नहीं किया जा सकता है।

Next Story