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CM ने कलेक्टर की तारीफ की: भूपेश बघेल बोले- मोरे करा ले भेजे हंव, लकठा परोस के रहइया आए, ग्रामीण बोले...

शिवरीनारायण दौरे पर गए सीएम भूपेश बघेल ने कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा की तारीफ की तो ग्रामीणों ने बताई अपनी पुरानी पहचान।

CM ने कलेक्टर की तारीफ की: भूपेश बघेल बोले- मोरे करा ले भेजे हंव, लकठा परोस के रहइया आए, ग्रामीण बोले...
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By NPG News

जांजगीर। लोगों से खचाखच भरा पंडाल हो मुख्यमंत्री अफसर की तारीफ करें... ऐसा कम ही होता है। उस पर लोग भी अफसर की तारीफ कर दें, यह तो बिरले ही मिलते हैं। सोमवार को दोनों वाकये साथ-साथ हुए। शिवरीनारायण में सीएम भूपेश बघेल ने पहले कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा की तारीफ की। उन्होंने तो बाकायदा कलेक्टर का बायोडाटा ही बता दिया। सीएम के हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत के दौरान लोग भी चर्चा में शामिल हो गए और कलेक्टर सिन्हा से पुरानी पहचान बता दी। यह सुनकर सीएम ने कहा कि तब तो विश्वास हे अच्छा काम करही।


दरअसल, हुआ कुछ यूं कि सीएम बघेल अपने ठेठ देसी और छत्तीसगढ़िया अंदाज में लोगों से संवाद कर रहे थे। कलेक्टर सिन्हा की पोस्टिंग के बाद यह उनका पहला जांजगीर जिले का दौरा था, इसलिए उन्होंने परिचय कराया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी में कहा, 'तुंहर नवा कलेक्टर आ गए हे, तारण सिन्हा। मोरे करा ले एला भेजे हंव। पहली मोरे जनसंपर्क अधिकारी रहीस। डीपीआर के रूप म घलाव मंत्रालय म मोरे करा रहीस हे। फेर राजनांदगांव कलेक्टर बन के गईस। अब इहे आगे हे। इहे लकठा-परोस म बिलासपुर के रहइया आए।' सीएम की इस बात पर मंच के सामने से लोगों की आवाज आई, 'इहे हमर सीईओ रहीस हे साहब हर।' यह सुनकर सीएम बोले, 'अच्छा सीईओ घलाव रहीस। तब तो विश्वास हे कि अच्छा काम करही।'

दूसर किस्त देत हंव...सुघ्घर लुगरा लेवाहा

सीएम बघेल आज मजाकिया अंदाज में भी थे। उन्होंने महिलाओं से कहा, 'मैं हर तीजा से पहली धान बोनस के दूसर किस्त जारी करत हंव। तुंहर मइके वाला मन ल पैसा भेजत हंव। त तुमन सुघ्घर लुगरा ल लेवाहा।' मुख्यमंत्री ने कहा कि रामदेव बस तेल बना कर बेच सकते हैं क्या? हमारी बहनें भी पेर कर तेल निकाल कर बेच सकती हैं। गौठानों के संबंध में सीएम ने कहा कि हमने प्रदेश में दस हजार गौठानें बनाई हैं, जिसके लिए डेढ़ लाख एकड़ जमीनें आरक्षित की हैं। इसके लिए कहीं भी पुलिस का डंडा नहीं चलाना पड़ा है। गौठान गांव वालों को गांव में ही रखकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए है। इससे मिनी उद्योग की तरह ही कार्य किए जा सकते हैं, जिससे गांव के युवाओं के अलावा गांव की बहन-बेटियां भी आत्मनिर्भर हो सकेंगी।

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