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छत्तीसगढ़ी बर छत्तीस बहाना: 15 साल पुर गे फेर राजकाज के भाखा बनिस, न आठवीं अनुसूची म शामिल होइस, 4 साल ले अध्यक्ष नहीं

छत्तीसगढ़ी बर छत्तीस बहाना: 15 साल पुर गे फेर राजकाज के भाखा बनिस, न आठवीं अनुसूची म शामिल होइस, 4 साल ले अध्यक्ष नहीं
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रायपुर। आज छत्तीसगढ़ी राजभाखा दिबस आए। 15 साल पहली आजे के दिन (28 नवंबर) बिधानसभा म छत्तीसगढ़ी ल राजभाखा के दरजा देहे गए रहिस। अब्बड़ गउरव के दिन रहिस। सब झन छत्तीसगढ़ी म गोठियाइस। एक दिन बर सब कती छत्तीसगढ़ी बगर गे रहिस। फेर ओ दिन आए आउ आज के दिन। छत्तीसगढ़ी बर छत्तीस ठन ओखी (बहाना) हावय।

छत्तीसगढ़ी राजभाखा आयोग ह अपन तीन ठन उद्देश्य बनाए रहिस, तीनों ह पूरा नई होए हे। छत्तीसगढ़ी ह न तो राजकाज के भाखा बनिस, न आठवीं अनुसूची म शामिल होइस आउ न त्रिभाषायी पाठ्यक्रम के रूप में शामिल होइस। चार साल होगे फेर अभी तक राजभाखा आयोग के कोनो अध्यक्ष नइ बने हे, जबकि सिंधी साहित्य संस्थान और उर्दू अकादमी म भी नियुक्ति होगे हे।

नेता मन के भाषण के भाखा

छत्तीसगढ़ी ह राजकाज के भाखा नई बन पाइस। नेता मन के भाषण के भाखा बन के रही गे। गैर हिंदी भाषी आने राज में आईएएस-आईपीएस मन ल भी स्थानीय भाखा के ट्रेनिंग लेहे पर परथे। लिखना-पढ़ना आउ बोलना जरूरी रहिथे। पड़ोस के राज ओडिशा म सब अधिकारी-कर्मचारी मन ओड़िया म गोठियाथे आउ काम भी करथे। छत्तीसगढ़ी म प्रशासनिक अकादमी म प्रशिक्षण देहे जाथे, लेकिन ऑफिस के नोटशीट म छत्तीसगढ़ी नई लिखे जाए। यहां तक कि सरकारी आफिस के स्थानीय अधिकारी कर्मचारी मन भी फरियादी मन से हिंदी म बात करथे।

10 साल होगे कहत-कहत

दस साल पहिली छत्तीसगढ़ी के शब्दकोष बने रहिस। बड़े-बड़े दावा होए रहिस कि अब शब्दकोष बन गे हे। जल्दी प्रशिक्षण देहे जाही फेर कामकाज के भाषा बनही। रस्ता देखत-देखत 10 साल होगे हे, लेकिन आज तक कामकाज के भाखा नई बन पाइस। जानकार मन के कहना हे कि राजभाखा आयोग ह कोसिस करिस फेर अधिकारी-कर्मचारी मन उत्साह नई देखाइन। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह सबले ज्यादा छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़ी संस्कृति-लोक जीवन ल आगे लाए के कोसिस करिस, त सबके मन म ये भरोसा रहिस कि कामकाज के भाखा बनही, लेकिन सफलता नई मिलिस।

अब दू ठन योजना के बात

छत्तीसगढ़ी राजभाखा आयोग ह दू ठन योजना बनाइस, माई कोठी आउ बिजहा। माई कोठी योजना के उद्देश्य रहिस छत्तीसगढ़ी म लिखे कोनो भी प्रकार के कितना ल सहेजना। बिजहा के उद्देश्य रहिस छत्तीसगढ़ी भाखा के जेन शब्द ह नंदावत हे ओला सहेजना। छत्तीसगढ़ी ल बचाए के कोसिस करइया सियान मन के कहना हे कि जब तक छत्तीसगढ़ी ल कामकाज के भाखा नई बनाए जाही, इसकूल म पढ़ाए नई जाही, तब तक बचाए के कोसिस सफल नई हो पाए।


मुख्यमंत्री ह लिखे रहिस चिट्ठी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह 13 अगस्त 2020 के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ल चिट्‌ठी लिखे रहिस अऊ छत्तीसगढ़ी ल आठवीं अनुसूची म जोड़े के मांग करे रहिस। मुख्यमंत्री ह बताए रहिस कि छत्तीसगढ़ी के ब्याकरण हीरालाल काव्योपाध्याय ह तइयार करे रहिस, जेकर संपादन अऊ अनुवाद जॉर्ज ए. ग्रियर्सन ह करे रहिस। ए अनुवाद ह 1890 म जर्नल ऑफ एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल म छपे रहिस।

अब तक के अध्यक्ष

पहली अध्यक्ष - पं. श्यामलाल चतुर्वेदी 2008-2011

दूसर अध्यक्ष - दानेश्वर शर्मा 2011-2013

तीसर अध्यक्ष - विनय कुमार पाठक 2016-2018

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