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VIDEO -राज्यपाल लौटा दें या हस्ताक्षर करें : आरक्षण बिल पर सीएम भूपेश का राज्यपाल पर हमला, कहा – युवाओं का भविष्य अंधकार में करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए

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By Manoj Vyas

रायपुर. छत्तीसगढ़ में लंबित आरक्षण बिल पर एक बार फिर राजनीति गरमाने के आसार हैं. सीएम भूपेश बघेल ने राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दो टूक कहा है कि राज्यपाल या तो बिल को लौटा दें या दस्तखत करें. राज्यपाल को युवाओं के जीवन को खतरे में डालने या उनका भविष्य अंधकार में करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए.

राजधानी रायपुर में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम बघेल ने कहा, जितने भी गैर भाजपा शासित राज्य हैं, वहां राज्यपाल की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए. आखिर किसी चीज को कितने दिन तक रोका जा सकता है. ऐसा बिल (विधेयक) जो सीधे जनता से जुड़ा हुआ नहीं है, उसे रोक कर रखे हैं तो समझ आता है. कॉन्करेंट लिस्ट (संयुक्त सूची) में है, उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाना है तो एक अलग बात है. आरक्षण तो राज्य का विषय है. उसे राज्यपाल चार-पांच महीने तक रोककर बैठें, तो यहां के जो छात्र छात्राएं हैं, यहां के नौजवान युवक-युवती हैं, जिन्हें एडमिशन लेना है और नौकरी में भी भर्ती होना है, उसको यदि रोका जाता है तो निश्चित रूप से समीक्षा होनी चाहिए कि आखिर किसी बिल को कितने दिन तक रोका जा सकता है? राज्यपाल या तो लौटा दें या हस्ताक्षर करें. ये रोकने का काम क्या है? राज्यपाल को क्या इतना अधिकार है कि प्रदेश के युवाओं के जीवन को खतरे में डाल दें, भविष्य अंधकार में कर दें. ये अधिकार नहीं मिलना चाहिए किसी को.

भारत में लोकतंत्र खतरे में है

सीएम भूपेश ने कहा, वर्तमान में केंद्र की सरकार में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया जा रहा है. आरक्षण की बात करते हैं, आरक्षण लागू नहीं करने दे रहे हैं. जिसको जितना मिलना चाहिए वह हो नहीं रहा है. सारी भर्तियां बंद हैं. जितने भी संवैधानिक संगठन हैं, उनको भी कमजोर किया जा रहा है. न्यायपालिका को भी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. सारे संगठनों को दबाया जा रहा है. आज लोकसभा में चर्चाएं होती नहीं. अडानी के मामले में सवाल पूछने पर सदस्यता समाप्त हो जाती है. बंगले खाली करा दिए जाते हैं. आपको सवाल पूछने का अधिकार नहीं है. यह क्या है? प्रजातंत्र में जो सबसे बड़ा शस्त्र है सवाल पूछने का और सवाल से ये भागते हैं. सवाल पूछने वाले को दंडित करते हैं. उसे कुचलने की कोशिश करते हैं. इसका मतलब लोकतंत्र खतरे में है.

वे नफरत फैलाएंगे, हम प्रेम बांटेंगे

भाजपा नेताओं द्वारा विशेष समुदाय के लोगों की संख्या में वृद्धि के संबंध में वोटर लिस्ट का सर्वे कराने के मुद्दे पर सीएम ने कहा, पहले तो हिंसा कराएंगे. उसके बाद अब सर्वे करा रहे हैं. हम गरीबों के आवास के लिए सर्वे कर रहे हैं तो उसका तो समर्थन कर नहीं रहे हैं. गरीब को आवास मिलना चाहिए उसके लिए सर्वे करा रहे हैं तो भाजपा मौन है. वोट के खातिर वो कराना चाहते हैं. ये द्वेष फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. वे जितना द्वेष फैलाएंगे, उतना हम प्रेम बांटने की कोशिश करेंगे. बघेल ने कहा कि भाजपा को नफरत फैलाने के अलावा कुछ आता नहीं. समाज में नफरत फैलाओ और आधा वोट ले लो. जनता के लिए इनके पास कोई कार्यक्रम नहीं है. अभी बिरनपुर की घटना में क्या हुआ? कोई जांच कमेटी नहीं बनाए न किसी निष्कर्ष में पहुंचे और सीधे हिंसा, आग लगाओ, ताकि वे सत्ता हासिल कर सकें.

हमने किसानों के हित में काम किया है. मजदूरों के हित में फैसला लिया है. अनुसूचित जाति जनजाति, नौजवानों, छात्र-छात्राओं के लिए फैसला किया है. सभी उसका लाभ उठा रहे हैं. छत्तीसगढ़ के हितों के लिए फैसला किया है. छत्तीसगढ़ के राज्यगीत, राजभाषा और संस्कृति, मूर्ति की स्थापना से लेकर छत्तीसगढ़ की बोली भाषा संस्कृति को लेकर हमने ऊपर लाने की कोशिश की है.

Manoj Vyas

मनोज व्यास : छत्तीसगढ़ में 18 साल से पत्रकारिता में सक्रिय, सभी प्रमुख संस्थाओं में दी सेवाएं, इसी दौरान हरिभूमि समाचार पत्र से जुड़े। इसके बाद दैनिक भास्कर में सिटी रिपोर्टर के रूप में जॉइन किया। नौकरी के साथ-साथ गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय से एमएमसीजे की पढ़ाई पूरी की। न्यायधानी के बाद राजधानी का रुख किया। यहां फिर हरिभूमि से शुरुआत की और नेशनल लुक, पत्रिका, नवभारत, फिर दैनिक भास्कर होते हुए भविष्य की पत्रकारिता का हिस्सा बनने के लिए NPG.News में बतौर न्यूज एडिटर जॉइन किया। इस बीच नवभारत के भुवनेश्वर, ओडिशा एडिशन में एडिटोरियल इंचार्ज के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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