CG Millet News-CM भूपेश ने लिया मिलेट के पकौड़े, भजिए का आनंद...मिलेट्स बालूशाही, अप्पे, चिवड़ा और भेल की जानकारी लेने पहुंच रहे लोग

रायपुर। राजधानी रायपुर के मिलेट कार्निवाल में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के 7 राज्यों के स्टार्टअप द्वारा मिलेट उत्पादों की बिक्री सह प्रदर्शनी लगाई गई है। स्टार्टअप द्वारा लगाई गई इस प्रदर्शनी में मिलेट से तैयार केक, कुकीस, सूप, लड्डू सहित विभिन्न उत्पाद रखें गए हैं। इन उत्पादों के संबंध में आम लोगों द्वार उत्साह से जानकारी ली जा रही है। कार्निवाल प्रतिदिन आम लोगों के लिए दोपहर 12 बजे से रात्रि 10 बजे तक खुला रहेगा। मुख्यमंत्री बघेल ने इस मौके पर लाईव फूड कांउटर का शुभारंभ भी किया। इस काउन्टर में स्व सहायता समूह के महिलाओं के द्वारा मिलेट के भजिए, पकौड़े, कटलेट आदि तैयार किए जा रहें थे। मुख्यमंत्री ने अवलोकन के दौरान महिलाओं द्वारा तैयार किए गए भजिए और पकौड़े का आनंद लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री को महिलाओं ने मिलेट से तैयार किए गए आकर्षक डॉल भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इसकी सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया।
18 फरवरी को देश के नामी शेफ विकास चावला और नीरज त्यागी मिलेट के नए-नए व्यजन बनाना सिखाएगें। लोगों के बीच लाईव डिमोस्टेशन भी देंगे। इसके आलावा राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ दैनिक आहार में मिलेट को शामिल करने और इसके फायदे के संबंध में लोगों से चर्चा करेंगे।
मिलेट कार्निवाल में 18 फरवरी को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 2.15 बजे से छत्तीसगढ़ में मिलेट की खेती एवं उपार्जन: चुनौती एवं अवसर पर संगोष्ठी, 3.15 बजे से नामी शेफ विकास चावला, रेस्टोरेंट सलाहकार एवं शेफ नीरज त्यागी मिलेट के व्यंजन बनाना सिखाएंगे। इसी प्रकार शाम 4.15 बजे से 'मिलेट प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन' पर संगोष्ठी और पाक कला प्रतियोगिता का आयोजन होगा। शाम 7 से 8 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति विभाग द्वारा किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के बीच-बीच में मिलेट से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी के संबंध में नुक्कड़ नाटको का आयोजन होगा।
राजधानी में होम साइंस पढ़ने वाली छात्राएं मिलेट यानी सुपरफूड पर शोध कर रहीं हैं। इन छात्राओं ने स्थानीय सुभाष स्टेडियम में चल रहे मिलेट कार्निवाल में फूड स्टॉल भी लगाया है। मिलेट पर शोध कर रहीं शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय रायपुर की छात्राओं ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मिलेट को दिए जा रहे प्रोत्साहन और इसके लिए शुरू किए गए मिलेट मिशन के कार्यों से प्रभावित होकर मिलेट पर शोध कर रही हैं। उनके द्वारा लगाए गए फूड स्टॉल में कोदो, कुटकी से बनाए पास्ता, नूडल्स, केक, रोटी और खुरमी जैसे व्यंजन रखे गए हैं। इनकी बिक्री भी खूब हो रही है। यहां रखे गए मिलेट के बालूशाही, कोदो के अप्पे, कोदो-कुटकी से बने चिवड़ा और भेल मुख्य आकर्षण है।
फूड स्टॉल में आगंतुक उत्साह और जिज्ञासा से इन व्यंजनों के बारे में जानकारी भी ले रहे हैं। शोधार्थी छात्राओं ने बताया कि आजकल फास्ट फूड्स का चलन है, चाउमीन, पास्ता और मंचूरियन जैसी आसानी से और जल्दी बनने वाली चीज़ें लोगों को पसंद आती हैं, लेकिन इसका हमारे स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए हमने कोदो-कुटकी से पास्ता, नूडल्स, रोटी, केक, खुरमी जैसे व्यंजन भी बनाएं हैं ताकि नई पीढ़ी भी मिलेट्स के सेवन के फायदे समझ सके।
राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में चल रहे छत्तीसगढ़ मिलेट्स कार्निवाल में शिरकत करने पहुंची समूह की महिलाओं ने बताया कि इस कैफे के माध्यम से हर माह करीब 3 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है।
मिलेट्स कैफे के माध्यम से मिलेट्स समोसा, मिलेट्स चीला, मिलेट्स दोसा, मिलेट्स दही बड़ा, मिलेट्स इडली, मिलेट्स पकोड़ा, मिलेट्स रोटी, मिलेट्स पराठा, मिलेट्स बिरयानी, मिलेट्स मंचूरियन, मिलेट्स वेज लॉलीपॉप, मिलेट्स मोमोस, मिलेट्स पिज्जा, मिलेट्स बरगर, मिलेट्स पनीर चिल्ली, मिलेट्स शेक, रागी मिल्क शेक, रागी माल्ट, रागी चाय सहित मिठाई का निर्माण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में बच्चों के लिए संचालित मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में मिलेट्स को शामिल किया जाना चाहिए। इससे देशभर के बच्चों को जहां भरपूर पोषक तत्व मिलेंगे वहीं मिलेट्स का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए मिलेट्स उत्पादों के बाजार की समस्या नहीं रहेगी और किसानों को फायदा भी होगा। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय 'छत्तीसगढ़ मिलेट कार्निवल' का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार प्रकट किए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने और इनसे मिलने वाले पोषक तत्वों के बारे में जन जागरूकता के लिए वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया गया है। छत्तीसगढ़ पहले ही मिलेट्स के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के मामले में काफी आगे है और धीरे धीरे मिलेट्स हब के रूप में उभर रहा है। आज जब मिलेट्स फसलों का रकबा जब पूरी दुनिया में सिमट रहा है, तब हमारे राज्य में इसका रकबा बढ़ रहा है। राज्य सरकार से मिलेट्स उत्पादक किसानों को मिले प्रोत्साहन से प्रदेश में मिलेट्स फसलों के रकबा में लगभग 3 गुना वृद्धि हुई है, पहले 70 हजार हेक्टेयर रकबा में मिलेट्स की खेती होती थी, अब यह रकबा बढ़कर 1 लाख 65 हजार हेक्टेयर हो गया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मिलेट्स के अंतर्गत मुख्य रूप से कोदो, कुटकी और रागी की खेती होती रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कोदो, कुटकी और रागी का समर्थन मूल्य घोषित करने वाला और समर्थन मूल्य पर खरीदी करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्य सरकार द्वारा कोदो और कुटकी का तीन हजार रूपए समर्थन मूल्य घोषित किया गया और राजीव गांधी किसान न्याय योजना में मिलेट्स उत्पादक किसानों को 9 हजार रूपए प्रति एकड़ की इनपुट सब्सिडी देने के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ में मिलेट्स का उत्पादन बढ़ा। हमारे किसानों का उत्साह बढ़ा और पहले ही साल में 55 हजार क्विंटल मिलेट्स की खरीदी की गई। मिलेट्स की डिमांड बढ़ने के कारण खुले बाजार में इसकी खपत हो रही है, इसके कारण इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 35 हजार क्विंटल की खरीदी ही हो पाई। कोदो, कुटकी एवं रागी का बाजार मूल्य भी बढ़ा, पहले 12 से 15 रुपए प्रति किलो मिलेट्स का बाजार मूल्य होता था, आज बढ़कर 25 से 28 रुपए तक पहुंच चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलेट्स प्रसंस्करण के मामले में भी छत्तीसगढ़ बहुत आगे निकल गया है। मिलेट्स प्रसंस्करण का देश का सबसे बड़ा प्लांट छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नथिया नवागांव में बनाया गया है, जिसमें 22 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। मिलेट्स के उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों और वनधन समितियों के माध्यम से संग्रहण और प्रसंस्करण के जरिए हजारों महिलाओं को रोजगार मिला। मिलेट्स की खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ा, उनकी आय में भी वृद्धि हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषक गुणों के कारण आज मिलेट्स की डिमांड देश-विदेश में बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कोदो, कुटकी और रागी छत्तीसगढ़ में यह हमेशा से बोया जाता रहा है। यह फसल ग्रामीण क्षेत्रो में उन जमीनों पर लगाई जाती थी, जहां सिचाई नहीं के बराबर होती थी। पहले छत्तीसगढ़ के बड़े किसान भी कोदो को संग्रहित करके रखते थे, क्योंकि सूखे के समय यही पेट भरने के काम आता था। कोदो के बीज 12 वर्ष तक सुरक्षित रहते हैं। इसकी फसल में बीमारी नहीं लगती इस कारण इसमें पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं होता। आज फसलों में उपयोग किए जाने वाले पेस्टिसाइड भी लाईफ स्टाईल के साथ बीपी, शुगर, कैंसर जैसे रोगों की वजह है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पानी पड़ने के बाद कोदो का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, इससे फूड पाईजनिंग का खतरा रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलेट्स विशेष रूप से कोदो को मेहनतकश लोगों का भोजन समझा जाता था, कोदो मिनरल्स और पोषक तत्वों से भरपूर है, शुगर इसमें कम से कम है। आज कोदो अमीरों का भोजन बन गया है। क्योंकि डायबिटिज सबसे ज्यादा इस वर्ग के लोगों में है। उन्होंने कोदो, कुटकी और रागी, लघु वनोपजों की खरीदी और प्रसंस्करण के कार्य में वन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलेट्स के गुणों को देखते हुए इसे भोजन की थाली में शामिल किया जाना चाहिए।
भारत सरकार के प्रतिनिधि ने की छत्तीसगढ़ मिलेट मिशन की सराहना
शुभारंभ समारोह में भारत सरकार के मिलेट्स रिसर्च इंस्टीट्यूट, न्यूट्रीहब के सीईओ डॉ. बी. दयाकर रॉव ने छत्तीसगढ़ मिलेट मिशन की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में मिलेट मिशन का कार्य काफी अच्छा है। अब तक मिलेट्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में जितने कार्य हुए उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में मिलेट मिशन का भविष्य उज्ज्वल है।
महिला स्व-सहायता समूहों को वितरित किए गए लैपटॉप
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम में नारायणपुर में फूल झाडू और वनौषधियों का उत्पादन करने वाले चरख महिला स्व-सहायता समूह की सरिता निषाद और कटघोरा के हरबोल स्व-सहायता समूह की सरोज पटेल को प्रतीक स्वरूप लैपटॉप वितरित किए। आज के कार्यक्रम में 12 समूहों को क्रॉप स्टेज के सहयोग से लैपटॉप वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया।
कार्निवाल में 7 राज्यों ने की शिरकत
प्रमुख सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ ने अपने सम्बोधन में बताया कि कार्निवाल का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ तथा आईआईएमआर हैदराबाद के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। उन्होंने बताया कि कार्निवाल 49 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 25 छत्तीसगढ़ के तथा 24 अन्य राज्यों के हैं। इस कार्निवाल में 7 राज्यों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कोदो, कुटकी और रागी की 9 प्रजातियां विकसित की गई है। विश्व विद्यालय के पास 300 क्विंटल बीज उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि 6 स्थानों पर मिलेट्स कैफे प्रारंभ करने की योजना है। कार्यक्रम को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला ने कहा कि मिलेट्स सुपर फूड हैं, इसमें फायबर, प्रोटीन, मिनरल्स के साथ ग्लूटेन फ्री है, इसका ग्लाइसेमिक इनडेक्स बहुत कम है। राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रोत्साहन से छत्तीसगढ़ में मिलेट्स का मूल्य काफी बढ़ गया है। अन्य राज्यों के लोग छत्तीसगढ़ से मिलेट्स की खरीदी कर रहे हैं। एन.टी.बी.एन. के सदस्य डॉ. राज भंडारी, आईसीएआर-आईआईएमआर की संचालक डॉ. तारा सत्यवथी, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जे. स्टेनली ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, रायपुर महापौर एजाज ढेबर, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।
