अष्टमी विशेष: ऐसे होती है मां महागौरी की पूजा, जानिए क्यों करते हैं इस दिन कन्या पूजा...जानें विधि और विशेष मंत्र...इस दिन कन्या पूजा करना शुभ

रायपुर 9 अप्रैल 2022। 9 अप्रैल को चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि और शनिवार का दिन है। अष्टमी तिथि देर रात 1 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। 9 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है। नवरात्रि के आठवें दिन को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है । आज मां दुर्गा की आठवीं शक्ति माता महागौरी की उपासना की जायेगी । इनका रंग पूर्णतः गोरा होने के कारण ही इन्हें महागौरी या श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है । इनके रंग की उपमा शंख, चन्द्र देव और कन्द के फूल से की जाती है । मां शैलपुत्री की तरह इनका वाहन भी बैल है । इसलिए इन्हें भी वृषारूढ़ा कहा जाता है।
देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि मां के 9 रूपों और 10 महाविद्या सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं। लेकिन, महादेव के साथ महागौरी ही उनकी अर्धांगिनी के रु में विराजमान रहती है। कहते हैं महागौरी की पूजा करने से हर असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। अधिकतर लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन भी करते हैं जबकि कुछ लोग रामनवमी के दिन कन्याओं को भोग लगाते हैं।देवी भागवत के अनुसार, राजा हिमालय के घर देवी पार्वती का जन्म हुआ था। महज आठ वर्ष की आयु में ही उन्हें अपने पूर्व जन्म की घटनाओं के बारे में आभास हो गया था। उसी समय से उन्होंने भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या शुरू कर दी थी। तपस्या करते-करते एक समय ऐसा भी आया जब मां फूल, पत्तों, फलों का ही आहार करने लगी। इसके बाद तो मां ने बस वायु के सहारे ही अपना तप आरंभ रखा। मां की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको गंगा स्नान करने को कहा। जैसे ही माता पार्वती गंगा स्नान करने के पहुंची वैसे ही देवी का एक स्वरूप श्याम वर्ष के साथ प्रकट हुआ जो कौशिकी देवी कलाई। दूसरे स्वरुप चंद्रमा के समान प्रकट हुआ दो महागौरी कहलाईं।
मां महागौरी की पूजा विधि
अष्टमी के दिन की पूजा बाकी नवरात्रि की तिथि की तरह ही की जाती है। जिस तरह सप्तमी तिथि को माता की शास्त्रीय विधि से पूजा जाता है वैसे ही अष्टमी के दिन पूजा करनी चाहिए। इस दिन मां का ध्यान करते हुए उनके मंत्र ओम देवी महागौर्यै नम: मंत्र का जप करना चाहिए। इसके बाद माता को लाल चुनरी अर्पित करें। बाकी दिन की ही तरह इस दिन भी लाल एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा की स्थापना करें। इसके बाद माता को सिंदूर और चावल चढ़ाएं। जब आप मां का ध्यान करें तो अपने हाथों में सफेद फूल रखें और फिर मां को अर्पित कर दें।
मां महागौरी का भोग
अष्टमी तिथि के दिन मां महागौरी को नारियल या नारियल से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। मां को भोग लगाने के बाद उस नारियल को किसी ब्राह्मण को दे दें। इसके अलावा जो लोग इस कन्या पूजन करते हैं वह इस दिन मां को काले चले, हलवा और पूरी का भोग लगा सकते हैं।
मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समरुझा श्वेताम्बरधरा शुचिः।महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोद:या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपे स्थथिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां महागौरी की आरतीजय महागौरी जगत की माया ।जय उमा भवानी जय महामाया ॥हरिद्वार कनखल के पासा ।महागौरी तेरा वहा निवास ॥चंदेर्काली और ममता अम्बेजय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥भीमा देवी विमला माताकोशकी देवी जग विखियाता ॥हिमाचल के घर गोरी रूप तेरामहाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥सती 'सत' हवं कुंड मै था जलायाउसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥बना धर्म सिंह जो सवारी मै आयातो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥तभी मां ने महागौरी नाम पायाशरण आने वाले का संकट मिटाया ॥शनिवार को तेरी पूजा जो करतामाँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे होमहागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया ।जय उमा भवानी जय महामाया ॥हरिद्वार कनखल के पासा ।महागौरी तेरा वहा निवास ॥चंदेर्काली और ममता अम्बेजय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥भीमा देवी विमला माताकोशकी देवी जग विखियाता ॥हिमाचल के घर गोरी रूप तेरामहाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥सती 'सत' हवं कुंड मै था जलायाउसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥बना धर्म सिंह जो सवारी मै आयातो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥तभी मां ने महागौरी नाम पायाशरण आने वाले का संकट मिटाया ॥शनिवार को तेरी पूजा जो करतामाँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे होमहागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो
कन्या पूजन का महत्व
देवी मां की पूजा के साथ ही कुमारियों और ब्राह्मणों को भोजन भी कराना चाहिए। विशेष रूप से कुमारियों को घर पर आदर सहित बुलाकर उनके हाथ-पैर धुलवाकर, उन्हें आसन पर बिठाना चाहिए और उन्हें हलवा, पूड़ी और चने का भोजन कराना चाहिए। भोजन कराने के बाद कुमारियों को कुछ न कुछ दक्षिणा देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लेना चाहिए। इससे देवी मां बहुत प्रसन्न होती हैं और मन की मुरादें पूरी करती हैं।
