शर्मनाक : SDM की मौजूदगी में तहसीलदार और पुलिस टीम ने कारोबारी पर अंधाधुंध लाठियां बरसाकर किया लहूलुहान, कलेक्टर बोले….

जांजगीर 25 अप्रैल 2020। कोरोना संकट में एक ओर जहां पुलिस प्रशासन को देवदूत मानकर लोग पूज रहे हैं…तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के जांजगीर में प्रशासन का ऐसे क्रूर चेहरा सामने आया है कि देवता तो छोड़िये इंसानियत भी शर्मिंदा हो जायेगी। यहां के अफसर और पुलिसकर्मियों ने एक व्यापारी पर इतनी लाठियां और लात-घूंसे बरसाये कि कारोबारी जमीन पर लहूलुहान होकर गिर पड़ा। व्यापारी का गुनाह इतना था कि उसने अपनी हार्डवेयर के साथ वाली बर्तन की दुकान भी खोल ली थी। शर्मिंदा करने वाली बात ये है कि व्यापारी पर लाठियां एसडीएम मेनका प्रधान की मौजूदगी में तहसीलदार प्रकाश साहू और मौजूद पुलिसकर्मियों ने की।

घटना शनिवार दोपहर करीब 12 के आसपास की है। प्रशासन की टीम लॉकडाउन का पालन कराने निकली थी। एसडीएम मेनका प्रधान और डंडा पकड़े तहसीलदाल प्रकाश साहू के साथ पुलिस की टीम घूम-घूमकर लॉकडाउन का पालन करा रही थी। इसी दौरान जब प्रशासन और पुलिस की टीम नेताजी चौक के करीब पहुंची तो एक हार्डवेयर की दुकान को खुला पाया। प्रशासन ने इसे लॉकडाउन के नियम विरुद्ध बताते हुए कारोबारी अजय गट्टानी पर जुर्माना कर दिया। पहले 500 और फिर बाद में 1500 रुपये का चालान काटा गया। 2000 का चालान काटने पर व्यापारी गुस्सा हो गया और विरोध में व्यापारियों को लामबंद करने लगा।

इस दौरान प्रशासन की टीम कुछ देर आगे चली गयी थी, नाराज व्यापारियों ने प्रशासन की टीम का पीछा करते हुए मौका पर गया और इस तरह की कार्रवाई का विरोध करने लगा। व्यापारियों का आरोप था कि उसने बर्तन की दुकान नहीं खोली थी, बल्कि हार्डवेयर की दुकान खोली थी, जिसके बाद उस पर 500 के बजाय 2000 रुपये का जुर्माना कर दिया। व्यापारियों ने इस कार्रवाई को रोकने और चालान रद्द करने की मांग करने लगे। दोनों ओर से तू-तू-मैं-मैं होने लगी। तब तक व्यापारी के बेटे ने इस पूरे विवाद का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

एक तो सरेराह विवाद और दूसरी तरफ नोंक-झोंक की वीडियो बनते देख तहसीलदार प्रकाश साहू ने आपा खो दिया और व्यापारी की डंडे से पिटाई शुरू कर दी, अब तहसीलदार ने लाठियां बजानी शुरू की तो पुलिस भी फिर कहां पीछे रहने वाली थी, व्यापारी अजय गट्टानी की इस कदर पिटाई कर दी कि वो लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।

दवाब में व्यापारी ने कर ली रजामंदी

मामला थाने तक पहुंचा, लेकिन चश्मदीदों का कहना है कि प्रशासन ने दवाब बनाकर मामले का रफा दफा कर दिया। हालांकि इस दौरान कुछ नेता भी व्यापारी के पक्ष में थाने पहुंच गये और पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई की बात कहने लगे। व्यापारियों को भारी पड़ते देख कई अधिकारी भी थाने पहुंचे। दो घंटे के घमासान के बाद दोनों पक्षों ने रजामंदी से समझौता कर लेने की बात कही। बताया जा रहा है कि इस दौरान अधिकारी ये भी धौंस दिखाते रहे कि अगर मामला दर्ज हुआ तो आगे कारोबार और अन्य चीजों में कारोबारी को दिक्कत होगी, लिहाजा डर की वजह से व्यापारी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी।

कलेक्टर बोले- अधिकारियों ने गलत किया है

इधर इस पूरे मामले पर कलेक्टर जनक पाठक ने NPG से कहा कि अभी तक इस मामले में उनके पास लिखित शिकायत नहीं आयी है, लेकिन जिस तरह की जानकारी उन्हें मिली है, वो बेहद गंभीर है। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी को इस तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं है, कि वो डंडा लेकर किसी की पिटाई कर दे और ये सब अगर एसडीएम की मौजूदगी में हुआ है, तहसीलदार ने किया है, तो ये और भी गंभीर बात है। अगर प्रशासन के अधिकारी की मार पिटाई करेंगे तो फिर पब्लिक किसके पास जायेगी। मैं इसे बहुत गलत मानता हूं। अब हालात वहां क्या थे, क्या हुआ इसकी लिखित तौर पर मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। लेकिन फिर भी मैं कहता हूं कि अधिकारी को कार्रवाई के आदेश देने का अधिकार है, ना कि खुद ही कार्रवाई करने का।

 

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