Doctor ka licence kaise banta hai: भारत में डॉक्टरो को कौन देता है मेडिकल लाइसेंस; जानिए कैसे मिलती है डॉक्टर को इलाज करने की अनुमति?
Doctor ka licence kaise banta hai: क्या कभी आपके मन में यह सवाल आया है कि डॉक्टरों को किसी अन्य पीड़ित व्यक्तियों के इलाज की आधिकारिक अनुमति किसने प्रदान की है? चलिए जानते हैं कि डॉक्टरों को मेडिकल लाइसेंस कैसे प्राप्त होता है?

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Doctor ka licence kaise banta hai: डॉक्टरो को हमेशा भगवान की तरह पूजा जाता है क्योंकि मरीजों का इलाज और उनके जान बचाने की जिम्मेदारी इनकी ही होती है। भारत हो या अन्य देश डॉक्टरो का काफी सम्मान किया जाता है। भारत में हर साल लाखों की संख्या में छात्र डॉक्टर बनने की चाह रखते हुए इसका भर्ती परीक्षा NEET जरूर देते है। लेकिन क्या कभी आपके मन में यह सवाल आया है कि डॉक्टरों को किसी अन्य पीड़ित व्यक्तियों के इलाज की आधिकारिक अनुमति किसने प्रदान की है? आखिर कैसे ये कानूनी रूप से किसी व्यक्ति का इलाज कर पाते हैं? इन सबके पीछे छुपा है मेडिकल लाइसेंस! चलिए जानते हैं कि डॉक्टरों को मेडिकल लाइसेंस कैसे प्राप्त होता है?
किसे कहते हैं मेडिकल लाइसेंस
मेडिकल लाइसेंस, यह एक प्रकार की कानूनी अनुमति होती है जो किसी व्यक्ति को चिकित्सा के क्षेत्र में प्रेक्टिस करने को अनुमति प्रदान करता है। इस लाइसेंस से पता चलता है कि सामने वाला डॉक्टर कितनी परीक्षाएं पास करके आया है और उसे मानव के स्वास्थ्य को ठीक करने का अनुभव भी है। इस दस्तावेज के न होने पर किसी भी प्रकार की मेडिकल प्रैक्टिस नहीं की जा सकती।
किसके द्वारा दिया जाता है डॉक्टरो को लाइसेंस
भारतीय डॉक्टरों को लाइसेंस प्रदान करने के भारत में दो तरीके बनाए गए हैं एक है केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) और राज्य स्तर पर राज्य चिकित्सा परिषद (State Medical Council)। जब भी कोई व्यक्ति अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करता है तो उसे राज्य या केंद्र की चिकित्सा परिषद में पंजीकरण करना बहुत जरूरी होता है।
NExT परीक्षा की खासियत
भारत देश में अब चिकित्सा के क्षेत्र में लाइसेंस प्राप्त करने और पीजी में एडमिशन लेने के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट यानी NExT का पेपर उत्तीर्ण करना बहुत जरूरी होता है। एमबीबीएस के छात्रों को यह परीक्षा जरूर देनी होती है जिसमें उन्हें मेडिकल लाइसेंस और MD,MS जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज में प्रवेश दिया जाता है। इस एग्जाम में सफल होने के बाद छात्र को मेडिकल लाइसेंस दे दिया जाता है इसके बाद उन्हें संबंधित राज्य की चिकित्सा परिषद में रजिस्ट्रेशन भी करना होता है। इस पंजीकरण का समय-समय पर नवीनीकरण कराना भी जरूरी होता है। इतना करने के बाद आप अंततः डॉक्टर कहलाते है।
