CG School Education News: DEO कार्यालय में बड़ा खेला, अनुकंपा नियुक्ति में सामने आया फर्जीवाड़ा, एक घर में दो को मिली नियुक्ति, इस खेल के पीछे कौन?
CG School Education News: छत्तीसगढ़ बिलासपुर डीईओ कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जीवाड़ा का आलम ये कि एक घर में दो लोगों को एक ही प्रकरण में अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई है।

CG School Education News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर डीईओ कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जीवाड़ा का आलम ये कि एक घर में दो लोगों को एक ही प्रकरण में अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई है। मामला सामने आने के बाद डीईओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहा है। बहरहाल इस मामले की जांच को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने संभागायुक्त से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पत्र लिखा है।
संभागायुक्त को अंकित ने पत्र में लिखा है, पूरे प्रकरण में लिपिक सुनील यादव के साथ ही तत्कालीन और वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जिला प्रशासन के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दो खंड शिक्षा अधिकारियों BEO को जांच सौंपना, जांच की निष्पक्षता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
गजब का खेल: एक ही परिवार में दो अनुकंपा
शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को ताक पर रखकर एक ही घर की दो सगी बहनों को नियुक्ति दी गई है। मृत कर्मचारी की पहली पत्नी की संतान यश साहू को पहले अनुकंपा नियुक्ति दी गई। नियम पर गौर करें तो एक परिवार से केवल एक ही आश्रित कोअनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। इसके बावजूद दूसरी पत्नी के पुत्र को भी अनुकंपा नियुक्त दे दी गई।
शिकायत के अनुसार यह नियुक्तियां लिपिक सुनील यादव की भूमिका और कथित लेन-देन के बाद कराई गई। सुनील यादव वर्तमान में स्थापना शाखा से जुड़े कार्यों में प्रभावी भूमिका में पदस्थ बताया गया है, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे उस समय और वर्तमान में भी विभागीय निर्णय प्रक्रिया के शीर्ष पर रहे हैं।
पदोन्नति, वेतन और संलग्नीकरण
शिकायत में लिखा है कि वर्ष 2021 और 2022 में नियमों के विरुद्ध पदोन्नतियां की गईं। सहायक ग्रेड-03 से सहायक ग्रेड-02 के पद पर पदोन्नति दी गई, जबकि संबंधित कर्मचारियों की पात्रता और पद स्वीकृति स्पष्ट नहीं थी। इसके बावजूद वर्षों तक वेतन आहरण कराया गया और आज तक पदोन्नतियों को निरस्त नहीं किया गया। शिकायत में यह भी कहा है कि कार्यालयों में स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों को संलग्न रखा गया, जबकि स्कूलों में शिक्षक और स्टाफ की भारी कमी बनी रही। इस संलग्नीकरण की प्रक्रिया में भी सुनील यादव की भूमिका बताई गई है, जिन पर पहले भी वेतन और नियुक्ति से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।
मासिक वसूली और संरक्षण
अंकित गौराहा ने कमिश्ननर को लिखे पत्र में आरोप लगाते हुए कहा है कि कार्यालयों में पदस्थ शिक्षकों, बाबुओं और चपरासियों से मासिक अवैध वसूली की जाती रही है। शिक्षकों से 10 हजार, बाबुओं से 5 हजार और चपरासियों से 2 हजार रुपये प्रतिमाह। यह वसूली कथित तौर पर पदस्थापन, संलग्नीकरण और पदोन्नति के एवज में की जाती थी।
जांच पर उठाए सवाल
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि लोक शिक्षण संचालनालय स्तर पर पूर्व में हुई जांच में सुनील यादव दोषी पाए गए थे, लेकिन न तो प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई हुई और न ही अवैध पदोन्नतियां और नियुक्तियां निरस्त की गईं। अब जबकि शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे का नाम भी शामिल है, उसी कार्यालय के अधीन खंड शिक्षा अधिकारियों से जांच कराना “जांच को प्रभावित करने जैसा कदम” बताया गया है। अंकित गौराहा ने स्पष्ट कहा कि यदि निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो वे इसे राज्य स्तर तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ अनुकंपा नियुक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग में जड़ जमाए बैठे संरक्षित भ्रष्ट तंत्र का है, जिसे बेनकाब करना जरूरी हैँ। कमिश्नर को लिखित शिकायत कहा है कि, यदि जांच ज्वाइंट डायरेक्टर शिक्षा या कमिश्नर स्तर पर नहीं हुई, तो मामला डीपीई और सचिव स्तर तक ले जाया जाएगा।
