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CG News, MD MS Admission: मेडिकल पीजी प्रवेश ब्रेकिंग: राज्य शासन ने राजपत्र में किया प्रकाशन, देखें राजपत्र में क्या लिखा है

CG News, MD MS Admission: मेडिकल पीजी ने प्रवेश को लेकर राज्य सरकार ने राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही अधिसूचना जारी कर दिया है।

CG News, MD MS Admission: मेडिकल पीजी प्रवेश ब्रेकिंग: राज्य शासन ने राजपत्र में किया प्रकाशन, देखें राजपत्र में क्या लिखा है
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By Radhakishan Sharma

Medical PG Admission: रायपुर। मेडिकल पीजी में प्रवेश को लेकर बीते दिनों बिलासपुर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। राज्य में लागू डोमिसाइल आरक्षण को रद्द करते हुए सेंट्रल पुल और संस्थागत आरक्षण को लेकर स्थिति साफ कर दिया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य शासन ने राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही मेडिकल पीजी में एडमिशन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। मेडिकल पीजी ने प्रवेश को लेकर राज्य सरकार ने राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही अधिसूचना जारी कर दिया है।

जारी अधिसूचना में लिखा है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा महाविद्यालय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश अधिनियम, 2002 (क्रं. 28 सन् 2002) की धारा-3 सहपठित धारा 4 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य राज्य सरकार एतद्वारा, छत्तीसगढ़ चिकित्सा स्नातकोत्तर प्रवेश नियम, 2025 में संशोधन कर दिया है। इसमें नियम-11 के स्थान पर, निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित किया जाये,

0 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों की सीटों में अखिल भारतीय कोटे हेतु समर्पित की गई 50 प्रतिशत सीटों के उपरांत, शेष उपलब्ध 50 प्रतिशत राज्य कोटे की सीटों पर वे पंजीकृत अभ्यर्थी, जिन्होंने एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से उत्तीर्ण किया है अथवा जो छत्तीसगढ़ राज्य के सेवारत अभ्यर्थी हैं, प्रवेश हेतु पात्र होंगे।

0 निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की सीटों में कुल सीटों के 50 प्रतिशत सीटों पर वे पंजीकृत अभ्यर्थी, जिन्होंने एम.बी. बी.एस. पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से उत्तीर्ण किया है अथवा जो छत्तीसगढ़ राज्य के सेवारत अभ्यर्थी हैं, प्रवेश हेतु पात्र होंगे। शेष उपलब्ध 50 प्रतिशत सीटों को प्रावीण्यता के आधार पर ओपन सीटों की भांति आवंटित किया जाएगा। इस प्रयोजन हेतु ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से उत्तीर्ण नहीं किया है (गैर संस्थागत अभ्यर्थी), पात्र होंगे। निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की 50 प्रतिशत ओपन सीटों पर भी राज्य में प्रचलित आरक्षण नियम 6 लागू होगा।

0 यदि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय की सीटों के विरुद्ध पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं एवं सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो काउंसिलिंग की तृतीय चरण की आवंटन प्रक्रिया के समय उन रिक्त सीटों को रूपांतरित (Conversion) करते हुए उन्हें गैर संस्थागत अभ्यर्थियों को आवंटित किया जा सकेगा।"

ये है हाई कोर्ट का फैसला

बिलासपुर हाई कोर्ट ने मेडिकल पीजी में प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा, संस्थागत आरक्षण हेतु 50 प्रतिशत सीटें, तथा ओपन मेरिट हेतु 50 प्रतिशत सीटेंआरक्षित रहेंगी। संस्थागत आरक्षण 50 प्रतिशत सीटों में शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेगा जिन्होंने छत्तीसगढ राज्य में स्थित एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण किया है अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी है। इन सीटों पर प्रवेश केवल संस्थागत आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों के मध्य मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। गैर संस्थागत आरक्षण शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी मानी जाएंगी। इन सीटों पर प्रवेश सभी पात्र अभ्यर्थियों हेतु राज्य स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। ओपन सीटों पर किसी प्रकार की संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगी।

राज्य सरकार ने डा समृद्धि दुबे की याचिका पर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा 20 नवंबर.2025 को पारित आदेश के पैराग्राफ 21 में निहित निर्देशों के स्पष्टीकरण की मांग करते हुए आवेदन पेश किया था। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कहा, डिवीजन बेंच ने आग्रह करते हुए कहा कि डिवीजन बेंच ने डॉ समृद्धि दुबे की याचिका पर 20 नवंबर 2025 को पारित आदेश के पैरा 21 में दिए गए निर्देशों को स्पष्ट संशोधित करने की कृपा करें, ताकि राज्य कोटा के अंतर्गत पीजी मेडिकल पाठ्यक्रम की उपलब्ध सीटों में, उन उम्मीदवारों को संस्थागत वरीयता दी जा सके जिन्होंने मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस डिग्री प्राप्त की है। छत्तीसगढ़ राज्य और आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध या सेवारत उम्मीदवाराें को।

हाई कोर्ट ने मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर जारी किया आदेश

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है,राज्य के वकील के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 01 दिसंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी कर नियम 11 (क) और (ख) को प्रतिस्थापित करते हुए, नियम 2025 के नियम (क), (ख), (ग) (घ) से प्रतिस्थापित किया है। यद्यपि यह इस याचिका का विषय नहीं है, फिर भी तथ्यों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, हम इसका उल्लेख करना उचित समझते हैं। डिवीजन बेंच ने कुछ इस तरह दिया निर्देश।

0 प्रवेश हेतु सीटों का संस्थागत आरक्षण शासकीय एवं निजी चिकित्सा की कुल उपलब्ध सीटों को दो वर्गों में विभाजित किया जाता हैं। संस्थागत आरक्षण हेतु 50 प्रतिशत सीटें, तथा ओपन मेरिट हेतु 50 प्रतिशत सीटें।

0 संस्थागत आरक्षण 50 प्रतिशत सीटें- शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल सीटों उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेगा जिन्होंने छत्तीसगढ राज्य में स्थित एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण किया है अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी है। इन सीटों पर प्रवेश केवल संस्थागत आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों के मध्य मेरिट के आधार पर दिया जाएगा।

गैर संस्थागत आरक्षण 50 प्रतिशत सीटें

गैर संस्थागत आरक्षण शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी मानी जाएंगी। इन सीटों पर प्रवेश सभी पात्र अभ्यर्थियों हेतु राज्य स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। ओपन सीटों पर किसी प्रकार की संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगी।

0 उपरोक्त दोनों श्रेणीयों में राज्य में प्रचलित आरक्षण नियम 6 के तहत लागू होगा।

0 यदि संस्थागत आरक्षण के अंतगर्त निर्धारित सीटों पर पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो मॉप-अप राउण्ड की आवंटन प्रक्रिया के समय उन रिक्त सीटों का अंतरण (कन्वर्शन) करते हुए उन्हें सामान्य (ओपन) श्रेणी में कर दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को डिवीजन बेंच ने किया स्पष्ट

डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने तनवी बहल मामले में यह टिप्पणी की है कि स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रम में निवास स्थान आधारित आरक्षण गलत है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि संस्थान आधारित आरक्षण की एक उचित संख्या अनुमेय है। इसके अतिरिक्त, एक विविध आवेदन सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया गया था, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने 24 मार्च 2025 के आदेश के पहले अनुच्छेद में यह टिप्पणी की है कि मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर सीटों के लिए निवास स्थान आधारित आरक्षण अनुमेय नहीं है और केवल सीमित सीमा तक ही संस्थागत वरीयता के लिए आरक्षण अनुमेय है, जिसका अर्थ यह है कि संस्थागत वरीयता एक निश्चित सीमा तक ही अनुमत है। 20 नवंबर 2025 को पारित आदेश के अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि "राज्य छत्तीसगढ़ चिकित्सा पोस्ट के नियम 11(क) और (ख) में उल्लिखित श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों के बीच भेदभाव नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, स्नातक प्रवेश नियम, 2025 को रद्द किया जाता है और राज्य को तनवी बहल मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित अनुपात के अनुसार कार्य करना होगा।



Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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