Sarakari Teacher Kaise Bane: सरकारी टीचर बनने के लिए कौन से कोर्स करें? परीक्षा और भर्ती की स्टेप-बाय-स्टेप फुल रोडमैप
Sarakari Teacher Kaise Bane: सरकारी टीचर बनने के लिए सिर्फ B.Ed ही नहीं, D.El.Ed, B.El.Ed और नया ITEP जैसे कोर्स भी रास्ता खोलते हैं। जानिए PRT, TGT, PGT के लिए योग्यता और तैयारी का रोडमैप।

Government Teacher Eligibility in India: आज बड़ी संख्या में भारत में सरकारी टीचर बनना स्टूडेंट्स का करियर-टारगेट है। इसकी बड़ी वजह नौकरी की स्थिरता, तय कामकाजी समय, प्रमोशन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे अहम् फैक्टर हैं। इसकी दूसरी वजह यह है कि देश में शिक्षकों की जरूरत लगातार बनी हुई है आंकड़े बताते हैं कि देश भर में लाखों पद आज भी खाली हैं और हर साल-दो साल में शिक्षक भर्ती की वैकेंसी निकलती रहती हैं।
इसी वजह से बहुत से स्टूडेंट्स 12वीं के बाद पूछते हैं क्या सिर्फ B.Ed करने से सरकारी टीचर बन जाएंगे? जवाब है- B.Ed एक बड़ा रास्ता है लेकिन अकेला नहीं। हक़ीक़त यह है कि सरकारी टीचर बनने का सही रास्ता इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस कक्षा तक पढ़ाना चाहते हैं- प्राइमरी, मिडिल या सीनियर सेकेंडरी।
पहले तय करें: आप PRT, TGT या PGT में से क्या बनना चाहते हैं?
सरकारी स्कूलों में शिक्षक के पद आम तौर पर तीन लेवल में समझे जाते हैं। PRT (Primary Teacher) कक्षा 1 से 5 तक, TGT (Trained Graduate Teacher) कक्षा 6 से 8 तक और PGT (Post Graduate Teacher) कक्षा 11 से 12 तक पढ़ाते हैं। एक बार आपने ने अपना लेवल सेट लिया तो यही आपके लिए कोर्स और एलिजिबिलिटी तय करता है। इसलिए 'सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स करें?" का जवाब एक लाइन में नहीं, बल्कि आपके गोल के हिसाब से अलग-अलग होगा।
प्राइमरी टीचर (PRT) के लिए कौन से कोर्स जरूरी हैं?
अगर आपका लक्ष्य कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना है, तो आमतौर पर आपकी बेसिक शैक्षिक योग्यता 12वीं होती है। इसके बाद प्राइमरी लेवल के लिए D.El.Ed (Diploma in Elementary Education) या Junior Basic Training जैसे ट्रेनिंग-फोकस्ड कोर्स प्रमुख रास्ता माना जाता है।
इसके अलावा 12वीं के बाद चार साल का B.El.Ed (Bachelor of Elementary Education) भी एक मजबूत विकल्प है। यह अंडरग्रैजुएट टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम है जिसमें साइकोलॉजी, पेडागॉजी और प्रैक्टिकल टीचिंग स्किल जैसी चीजें शामिल होती हैं। प्राइमरी लेवल पर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया और क्लासरूम हैंडलिंग ज्यादा संवेदनशील होती है इसलिए यह ट्रेनिंग-बेस्ड कोर्स महत्वपूर्ण है।
TGT (कक्षा 6–8) के लिए क्या पढ़ाई चाहिए?
कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के लिए आम तौर पर ग्रेजुएशन के साथ B.Ed अनिवार्य माना गया है। यहां फर्क यह है कि मिडिल लेवल पर पढ़ाई विषय-केंद्रित (Subject-Centered) हो जाती है। इसलिए ग्रेजुएशन आपकी सब्जेक्ट नॉलेज बनाता है और B.Ed आपको टीचिंग मेथड, पेडागॉजी और क्लासरूम प्रैक्टिस में प्रशिक्षित करता है।
PGT (कक्षा 11–12) के लिए कौन सा रास्ता सही है?
सीनियर सेकेंडरी यानी 11वीं और 12वीं में पढ़ाने के लिए आमतौर पर संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन + B.Ed की जरूरत होती है। इस लेवल पर गहराई वाली पाठ्यपुस्तक पढ़ानी होती है, इसलिए पोस्ट ग्रेजुएशन को जरूरी योग्यता माना गया है। फिर B.Ed के जरिए टीचिंग ट्रेनिंग का हिस्सा पूरा होता है।
CTET/TET क्यों इतना जरूरी है?
सरकारी टीचर बनने का सबसे अहम मोड़ सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि Teacher Eligibility Test (TET) है। यह परीक्षा नौकरी नहीं देती लेकिन इसे पास किए बिना सरकारी शिक्षक की नौकरी के लिए पात्रता मिलती ही नहीं।
सबसे अहम परीक्षा CTET (Central Teacher Eligibility Test) है जिसे CBSE कराता है। यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है और इसे क्वालिफाई करने पर आप केंद्र सरकार के स्कूलों जैसे केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय या केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों में शिक्षक बनने की पात्रता हासिल करते हैं।
CTET की तर्ज पर राज्यों में भी अपनी-अपनी TET परीक्षाएं होती हैं। TET पास करने के बाद आप संबंधित राज्य की शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने की पात्रता में आते हैं। इसके बाद राज्य के भर्ती बोर्ड एजेंसियां अपने लेवल पर चयन प्रक्रिया कराती हैं।
केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति पूरे भारत में अपने स्टाफ के लिए अलग परीक्षाएं कराते हैं। वहीं दिल्ली में DSSSB दिल्ली सरकार के स्कूलों के लिए अलग से शिक्षक भर्ती करता है।
सिर्फ B.Ed नहीं: ये कोर्स भी टीचिंग का रास्ता खोलते हैं
बहुत लोगों की पहली पसंद B.Ed होती है क्योंकि यह व्यापक रूप से मान्य और लोकप्रिय है। B.Ed ग्रेजुएशन के बाद दो साल का कोर्स है और कुछ जगह चार साल का इंटीग्रेटेड B.Ed भी उपलब्ध है जिसमें ग्रेजुएशन और B.Ed साथ हो जाते हैं।
इसके अलावा NEP के तहत एक नया विकल्प ITEP (Integrated Teacher Education Program) भी सामने आया है। यह चार साल का इंटीग्रेटेड प्रोग्राम है, जिसमें ग्रेजुएशन और B.Ed एक साथ हो जाते हैं। यह कोर्स दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया-मिल्लिया इस्लामिया और बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी में शुरू हो चुका है, और इसका फायदा यह है कि पांच साल के बजाय कोर्स चार साल में पूरा होता है।
प्राइमरी और अपर-प्राइमरी के लिए D.El.Ed और D.Ed जैसे डिप्लोमा प्रोग्राम भी महत्वपूर्ण हैं, जिनमें चाइल्ड डेवलपमेंट, पेडागॉजी और प्रैक्टिकल क्लासरूम ट्रेनिंग पर फोकस होता है। प्री-स्कूल/नर्सरी के लिए NTT (Nursery Teacher Training) एक स्पेशलाइज़्ड डिप्लोमा/सर्टिफिकेशन प्रोग्राम है।
CTET/TET की तैयारी कैसे करें?
CTET/TET जैसी परीक्षाओं में दो पेपर होते हैं- पेपर-1 उन उम्मीदवारों के लिए जो कक्षा 1–5 पढ़ाना चाहते हैं और पेपर-2 उन उम्मीदवारों के लिए जो कक्षा 6–8 पढ़ाना चाहते हैं। हर पेपर में MCQ होते हैं जिनमें चाइल्ड डेवलपमेंट और पेडागॉजी, लैंग्वेज, मैथ, EVS सोशल स्टडीज़ जैसे विषय शामिल होते हैं।
बेसिक कॉन्सेप्ट के लिए NCERT किताबें सबसे अहम सोर्स हैं। सामान्य ज्ञान के लिए लुसेंट, इंग्लिश और हिंदी के लिए पढ़ सकते है। साथ ही पिछले वर्षों के प्रश्न हल करना और नियमित मॉक टेस्ट देना जरूरी है- ताकि आपको सवालों का पैटर्न समझ आए और टाइम-मैनेजमेंट सुधरे। एक प्रशिक्षक का मानना है- अगर फोकस्ड रहे तो तीन महीने में भी मजबूत तैयारी मुमकिन है बशर्ते उम्मीदवार डेली अभ्यास करे और अपनी कमजोरियों पर काम करे।
एक जरूरी चेक: कोर्स NCTE से मान्य है या नहीं
टीचिंग से जुड़े कोर्स चुनते वक्त एक बहुत अहम बात NCTE (National Council for Teacher Education) की मान्यता। B.Ed, B.El.Ed जैसे हर कोर्स को NCTE की मान्यता मिलती है और कोर्स चुनते समय यह देखना जरूरी है कि संस्थान कोर्स NCTE से मंजूर है या नहीं। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि सिलेबस अपडेटेड हो, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कैसी है, इंटर्नशिप स्कूल का स्तर क्या है और कोर्स NCTE गाइडलाइंस के मुताबिक चल रहा है या नहीं।
