शिक्षाकर्मियों को फिर पड़े वेतन के लाले…..नहीं हो सका है नवंबर के वेतन का भुगतान…. परेशान शिक्षाकर्मी कार्यालयों के चक्कर लगाने को हुए मजबूर

रायपुर 4 जनवरी 2020। जैसे-जैसे पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मियों की संख्या कम होती जा रही है, वैसे-वैसे उनकी दुर्दशा बढ़ते जा रही है और हर ब्लाक में बचे कुछ दर्जन शिक्षाकर्मियों की स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश में 1 जनवरी के बाद संविलियन से वंचित शिक्षा कर्मियों की संख्या अब केवल पंद्रह सोलह हजार रह जाएगी ऐसे में प्रदेश के 186 ब्लॉक में शिक्षाकर्मियों की संख्या बहुत कम है लेकिन उनकी समस्या कम होने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं हालत यह है कि महज कुछ शिक्षाकर्मियों को वेतन तक देने के लिए पंचायत विभाग के पास पैसे उपलब्ध नहीं है।

 

आबंटन का हवाला देकर शिक्षा कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है शिक्षाकर्मी जब अपने स्थानीय कार्यालयों में जा रहे हैं तो उन्हें एक ही रटा रटाया जवाब मिलता है की आबंटन नहीं है । प्रदेश के अधिकांश जगहों में नवंबर तक के वेतन का भुगतान नहीं हुआ है जबकि दिसंबर का भी महीना गुजर चुका है ऐसे में दो-दो महीने से वेतन का इंतजार कर रहे शिक्षाकर्मियों की स्थिति क्या होगी ये आसानी से समझा जा सकता है। जिन जगहों पर नवम्बर का वेतन नहीं मिला है उसमे राजनांदगांव जिले के मोहला , डोंगरगढ़ , खैरागढ़ , छुरिया , चौकी ब्लॉक, कोंडागांव के माकड़ी ब्लाक , जांजगीर के मालखरौदा ब्लाक , रायपुर के धरसीवा और आरंग ब्लॉक , सूरजपुर के ओड़गी और प्रतापपुर ब्लॉक , बलरामपुर के राजपुर ब्लॉक, बस्तर के बस्तानार , बस्तर ब्लॉक समेत कई जिलों के अनेक ब्लॉक शामिल है । इधर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन और सर्व शिक्षा अभियान के द्वारा नवंबर का आबंटन जारी कर दिए जाने के बावजूद कई जिलों में वेतन का भुगतान नहीं किया गया है जो सीधे-सीधे उच्च अधिकारियों के निर्देशों का उल्लंघन है ।

पंचायत के शिक्षाकर्मियों का हाल बेहाल, संविलियन ही एकमात्र उपाय – विवेक दुबे

शिक्षाकर्मियों के संविलियन की मांग को लेकर लड़ाई लड़ने वाले संविलियन अधिकार मंच के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे का कहना है कि

प्रदेश में शिक्षाकर्मियों की दुर्दशा न तो शासन से छिपी है न प्रशासन से , हम लगातार शासन प्रशासन दोनों को हमारी स्थितियों से अवगत कराते आ रहे हैं बावजूद इसके कोई सुधार नहीं है और ऐसा लगता है मानो जानबूझकर शिक्षाकर्मियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है । जनवरी के बाद प्रदेश में अब महज 16 हजार शिक्षाकर्मी ही संविलियन के लिए बच जाएंगे और हमारे संविलियन का निर्णय लेकर इस समस्या को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है पर इस दिशा में अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है इधर शिक्षाकर्मियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल रहा है , 3 साल से महंगाई भत्ता नहीं मिला है । दिवाली के पूर्व काफी हो हल्ला मचाने के बाद ले देकर वेतन मिला था और अब फिर से वही पुरानी स्थिति निर्मित कर दी गई है जिसकी अनेक जिलों से शिकायतें मिल रही है ऐसे में शिक्षाकर्मियों का घर परिवार कैसे चलेगा इस पर बड़ा प्रश्न चिन्ह है शासन प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए हम भी जल्द ही पंचायत मंत्री से मिलकर उन्हें पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराएंगे ।

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