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आतंकी के साथ गिरफ्तार DSP ने 12 लाख रुपये में की थी डील…. आतंकी को चंडीगढ़ तक पहुंचाने के एवज में मिलनी थी रकम….अब वीरता पुरस्कार वापस लेने की तैयारी…आईजी बोले- आतंकी जैसा होगा डीएसपी से सलूक

आतंकी के साथ गिरफ्तार DSP ने 12 लाख रुपये में की थी डील…. आतंकी को चंडीगढ़ तक पहुंचाने के एवज में मिलनी थी रकम….अब वीरता पुरस्कार वापस लेने की तैयारी…आईजी बोले- आतंकी जैसा होगा डीएसपी से सलूक
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By NPG News

श्रीनगर 13 जनवरी 2020। आतंकी के साथ गिरफ्तार डीएसपी देविंदर सिंह की मुश्किलें बढ़ने वाली है। 11 लोगों की हत्या में वांटेड आतंकवादी नवीद बाबा के साथ गिरफ्तार किए गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह का वीरता पुरस्कार वापस लिया जा सकता है। केंद्र सरकार ने वीरता पदक की वापसी को लेकर विचार करना शुरू कर दिया है।

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि डीएसपी की कार में सवार दोनों आतंकियों से कथित तौर पर 12 लाख में डील हुई थी। इसके बदले वह उन आतंकियों को सुरक्षित चंडीगढ़ ले जाने वाला था। इतना ही नहीं, अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उसने बकायदा चार दिन की छुट्टी भी ले ली थी।

NIA जल्द ही डीएसपी देविंदर सिंह और नवीद को अपनी कस्टडी में ले लेगी।जांच में पता चला है कि देविंदर सिंह कई साल से आतंकवादियों को ठिकाना मुहैया करा रहा था और वह इसके बदले मोटी रकम लेता था। देविंदर सिंह को रविवार को उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह नावीद बाबा को अपनी कार से ले जा रहा था। देविंदर ने पूछताछ में बताया कि नवीद को उसने श्रीनगर स्थित अपने घर में भी ठहराया था।

आतंकी नवीद पुलिस का भगोड़ा था, जो कि 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया था। सूत्रों के अनुसार डीएसपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों की स्क्रीनिंग होगी। गौरतलब है कि पुलिस अधिकारी देविंदर सिंह का नाम संसद हमले के बाद भी चर्चा में आया था. बताया जा रहा है भारतीय लोकतंत्र के ‘मंदिर’ संसद पर आतंकी हमले के केंद्रीय साजिशकर्ता गुरु अफजल ने यह दावा किया था कि उसे कार देविंदर सिंह ने ही उपलब्ध करवाई थी. फिलवक्त पुलिस महानिरीक्षक कश्मीर विजय कुमार ने इससे इंकार किया है. हालांकि उन्होंने पत्रकार वार्ता में साफ-साफ यही कहा कि फिलहाल उनके पास इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है. इससे पूर्व भी डीएसपी कई बार आरोपों के घेरे में आ चुके हैं. इसमें वूसली के आरोप भी हैं. सूत्रों की मानें तो कुख्यात आतंकियों के लिए हथियारों की डील कराने का जिम्मा भी डीएसपी के पास था.

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